" /> डांटे, तो गए!, डांटनेवालों को मार देता था सनकी

डांटे, तो गए!, डांटनेवालों को मार देता था सनकी

लोग अक्सर कमजोर, गरीब को दबाते हैं, डांटते हैं या अपमानित करते हैं। ऐसा करनेवाले लोग इसमें बड़प्पन महसूस करते हैं लेकिन कभी-कभी कमजोर को डांटने या अपमानित करने की बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ जाती है, क्योंकि कुछ कमजोर लोग सनकी भी होते हैं। अपने अपमान का बदला लेने के लिए वे कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। मध्यप्रदेश के दतिया जिले में पुलिस ने ऐसे ही एक सनकी को गिरफ्तार किया है। उसने एक, दो नहीं बल्कि ४ लोगों को महज इसलिए मौत के घाट उतार दिया, क्योंकि उन लोगों ने उसे डांटा था। उक्त सनकी सीरियल किलर ११ साल पहले अंजाम दी गई हत्या की एक वारदात के कारण पुलिस के हत्थे चढ़ गया और फिर पुलिस हत्या की तीन ऐसी वारदातों की गुत्थी सुलझाने में सफल हुई, जो दो साल तक अनसुलझी थी।

मध्य प्रदेश के दतिया में पुलिस ने एक ऐसे सीरियल किलर को गिरफ्तार किया है, जिस पर रात में सोते हुए लोगों के कत्ल का आरोप है। इस आरोपी की गिरफ्तारी से दो सालों में हुए तीन ब्लाइंड मर्डर का राज खुल गया लेकिन पुलिस का इस केस को सॉल्व करने का तरीका इससे ज्यादा दिलचस्प है।
दरअसल, अक्टूबर २०१८ को जिले के भांडेर में रात के समय याकूब बेग और उसकी पत्नी सलमा की हत्या कर दी गई थी। हत्या करनेवाले ने दोनों के सिर पर भारी चीज से वार किया था, जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई थी। दो साल तक पुलिस इस केस में अंधेरे में हाथ-पांव मारती रही लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। पुलिस पहले ही हताश हो चुकी थी
इस बीच इसी साल जून में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रामकुमारी सोनी की भी किसी अज्ञात शख्स ने सोते समय हत्या कर दी। तीनों ही हत्याएं एक ही तरह से की गई थीं, जिसके बाद इलाके में सीरियल किलिंग को लेकर लोगों में दहशत थी।
पुलिस के सामने लगातार हो रहे ऐसे कत्ल की गुत्थी को सुलझाना बड़ी चुनौती थी। पुलिस के पास हत्यारे का कोई सुराग नहीं था सिवाय कत्ल के तरीके के अलावा। हत्यारे ने तीनों ही कत्ल एक ही तरीके से किए थे। तीनों ही कत्ल रात के वक्त तब किए गए जब पीड़ित गहरी नींद में सो रहे थे। तीनों ही हत्याओं में मृतकों के सिर पर भारी वस्तु से जोरदार वार किया गया था। दो साल तक की गर्इं नाकाम कोशिशों एवं तीन-तीन कत्ल के कारण लोगों में सीरियल किलर की दहशत बढ़ रही थी। पुलिस हताश हो चुकी थी लेकिन हार मानने को तैयार नहीं थी। पुलिस ने अंततः जिले व आसपास के क्षेत्रों में अतीत में हुई हत्याओं का अध्ययन करने का निर्णय लिया। यह निर्णय कारगर सिद्ध हुआ। पुलिस ने दतिया जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बीते १५ सालों में हुई हत्याओं की केस डायरी खंगालना शुरू किया। इसी दौरान पता चला कि वर्ष २००९ में इरफान नामक शख्स का कत्ल का तरीका भी लगभग इन तीन अंधे कत्लों से मिलता हुआ ही था। पुलिस ने पाया कि २००९ में हुई इरफान की हत्या में जुगल किशोर ढीमर नाम के एक शख्स को जेल हुई थी लेकिन बाद में वो जमानत पर जेल से बाहर आ गया था। पुलिस के पास बस यही वो सुराग था, जिसने जांच की दिशा को बदल दिया।
इसके बाद पुलिस ने जुगल किशोर ढीमर पर नजर रखना शुरू किया। इलाके के लोगों से पुलिस के सूत्रों को ढीमर के व्यवहार में बदलाव की जानकारी मिली तो पुलिस ने उसको हिरासत में लेकर पूछताछ की तो एक-एक कर तीनों ब्लाइंड मर्डर का राज खुल गया।

मामूली बात पर की थी हत्याएं
पूछताछ में आरोपी जुगल किशोर ने पुलिस को बताया कि उसने ही तीनों हत्याओं को अंजाम दिया था। उसने बताया कि याकूब और सलमा का खून उसने इसलिए किया था क्योंकि याकूब ने उसको बरामदे में बैठने से मना किया था और इस दौरान बहस होने पर उसने धक्का देकर उसे गिरा दिया था, इसलिए उसने रात को घर में घुसकर सोते समय याकूब और उसकी पत्नी की लकड़ी के लट्ठे से हत्या कर दी। इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रामकुमारी सोनी की हत्या भी उसने उसकी डांट से नाराज होकर की थी। दरअसल, जुगल का पैर रामकुमारी के पैर पर गलती से रखा गया था और वो गिरते-गिरते बची थी, इससे नाराज होकर जुगल ने रात के समय रामकुमारी के सिर पर लट्ठे से वार कर हत्या कर दी थी। इस तरह पुलिस ने सूझबूझ से तीन-तीन अंधे कत्ल का खुलासा करने में सफलता हासिल की।