डूब रही ‘डी’ कंपनी! ११ महीनों में लगभग १,५०० करोड़ रुपयों का घाटा

एक वक्त था जब ‘डी’ कंपनी का नाम सुनते ही बड़े-बड़े लोगों के होश उड़ जाते थे। इसी डर को हथियार बनाकर मुंबई का लोकल गुंडा दाऊद इब्राहिम कासकर अंडरवर्ल्ड डॉन की गद्दी पर जा बैठा। उसके बाद से ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की ‘डी’ कंपनी काले धंधों के जरिए सालाना २ हजार करोड़ रुपए कमा रही थी। डॉन हिंदुस्थान में नहीं था फिर भी उसके परिवारवाले डी कंपनी की कमान संभालकर कंपनी को दौड़ा रहे थे। दाऊद के देश छोड़ने के बाद दाऊद की बहन हसीना पारकर कंपनी संभाल रही थी। हसीना पारकर की मृत्यु के बाद दाऊद के छोटे भाई इकबाल कासकर ने ‘कंपनी’ की कमान संभाल ली। इस प्रकार ‘डी’ कंपनी चल रही थी लेकिन ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन सेल के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रदीप शर्मा ने जब से इकबाल कासकर को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है तब से ही ‘डी’ कंपनी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस सूत्रों और ‘डी’ कंपनी से रिटायर हुए कुछ खिलाड़ियों का कहना है कि जब से इकबाल कासकर की गिरफ्तारी हुई है तब से ही डी ‘कंपनी’ घाटे में जा रही है। सूत्रों का कहना है कि सितंबर २०१८ से ही ‘डी’ कंपनी को लगभग १५ सौ करोड़ रुपए तक का नुकसान हुआ है और तो और कासकर की गिरफ्तारी के बाद से ही कंपनी के सीईओ पद की गद्दी भी खाली पड़ी है।
बेनाम है ‘डी’ की कमान
बता दें कि ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन सेल द्वारा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर को हफ्ता मांगने के अलग-अलग तीन मामलों में वर्ष २०१८ के सितंबर माह में गिरफ्तार किया गया था। कासकर की गिरफ्तारी के बाद ‘डी’ कंपनी में कुल ६० गुर्गे ही बचे थे। सभी गुर्गे ‘डी’ की कमान संभालना चाहते थे लेकिन डॉन को परिवारवालों के अलावा किसी और पर भरोसा नहीं था इसलिए डॉन ने अब तक ‘डी’ कंपनी के सीईओ पद पर अपने किसी भी गुर्गे को नहीं बैठाया। ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन सेल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने पर बताया कि जब से इकबाल कासकर की गिरफ्तारी हुई है तब से ‘डी’ कंपनी के गुर्गों के दिल में पुलिस और खुफिया एजेंसियों का डर बैठ गया है। डॉन के सभी गुर्गे कंपनी की कमान संभालने से कतरा रहे हैं। ‘डी’ कंपनी सूत्रों का कहना हैं कि कंपनी पहले जैसी नहीं रह गई है। लोगों के दिल से ‘डी’ कंपनी का डर निकल +गया हैं। डॉन दाऊद इब्राहिम का बेटा और इकबाल कासकर का बेटा काले धंधों से काफी दूर हैं इसलिए कंपनी को अब तक उसका वारिस नहीं मिल पाया है। फिलहाल तो डी कंपनी की कमान बेनाम है। अब आगे देखना यह है कि कंपनी की कमान किसके हांथों में जाती है?