पाकिस्तान में है दाऊद! हिंदुस्थानी दावे पर अमेरिकी मुहर

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जारी की आतंकवादियों और चरमपंथियों की सूची में हिंदुस्थान के मोस्ट वांडेट गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में छिपा है। ऐसा दावा हिंदुस्थान सरकार एवं जांच एजेंसियां वर्षों से कर रही हैं लेकिन पाकिस्तान हमेशा हिंदुस्थानी दावों का खंड़न करता रहा है। दाऊद के पाकिस्तान में होने संबंधित दावे पर अब अमेरिका ने भी अपनी मुहर लगा दी है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने लंदन की एक कोर्ट में दावा किया है कि दाऊद और उसके भाई पाकिस्तान के कराची में रह रहे हैं और इसका पुख्ता सबूत उनके पास है। एफबीआई का कहना है कि डी-कंपनी का नेटवर्क पाकिस्तान, हिंदुस्थान और यूएई तक फैला हुआ है। एफबीआई के इस दावे के बाद अब दाऊद की मुश्किलें बढ़ जाएंगी और पाकिस्तान पर दाऊद के प्रत्यर्पण का दबाव बढ़ सकता है।
बता दें कि दाऊद वर्ष १९९३ में मुंबई में हुए बम धमाकों जैसे देश विरोधी कृत्यों सहित हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली जैसे कई संगीन मामलों में हिंदुस्थान का मोस्ट वांटेड आतंकी है। पहले वह दुबई में छिपा था, बाद में पाकिस्तान भाग गया। हिंदुस्थानी जांच एजेंसियां लंबे अर्से से उसके पाकिस्तान में होने का दावा कर रही हैं लेकिन पाकिस्तान सरकार लगातार इससे इंकार करती रही है। अब अमेरिका ने लंदन की एक कोर्ट में दावा किया है कि अंडरवर्ल्ड डॉन और मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है। अपने अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट को वह कराची से ऑपरेट करता है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने लंदन की एक अदालत में यह दावा किया। एफबीआई ने दाऊद के सहयोगी जाबिर मोतीवाला के प्रत्यर्पण के ट्रायल के पहले दिन लंदन की कोर्ट में यह दावा किया। एफबीआई की तरफ से वकील जॉन हार्डी ने कोर्ट में कहा कि एफबीआई न्यूयॉर्क में `डी’ कंपनी के लिंक की जांच कर रही है। इस दौरान पता चला कि `डी’ कंपनी का नेटवर्क पाकिस्तान, हिंदुस्थान और यूएई में फैला हुआ है। जॉन हार्डी ने कहा कि डी-कंपनी मनी लॉन्ड्रिंग और उगाही के जरिए पिछले १० वर्षों से अमेरिका में भी अपने पैर फैलाने का प्रयास कर रही। खासतौर पर काम `डी’ कंपनी अंजाम दे रही है।’ दाऊद के खास सहयोगी जाबिर मोतीवाला के इस काम में संलिप्त होने की जानकारी एफबीआई को मिली है। एफबीआई की जांच में स्पष्ट हुआ है कि मोतीवाला सीधे दाऊद को रिपोर्ट करता था। डॉन के इस करीबी सहयोगी का काम हफ्ता उगाही, मनी लॉन्ड्रिंग, वसूली करना था।’ अमेरिकी जांच एजेंसी उसे अमेरिका ले जाकर ड्रग्स ट्रैफिकिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और दूसरे अपराधों का ट्रायल शुरू करना चाहती है। यह मामला २००५ में एफबीआई की जांच से संबंधित है लेकिन अमेरिका की प्रत्यर्पण अपील के खिलाफ मोतीवाला ने अपील की है। १७ अगस्त २०१८ को स्कॉटलैंड यार्ड ने मोतीवाला को अंडरकवर एजेंट के जरिए लंदन में जाल बिछाकर पकड़ा था।