" /> डेडली डिप्रेशन!, समय रहते हो सकता है मनोवैज्ञानिक इलाज

डेडली डिप्रेशन!, समय रहते हो सकता है मनोवैज्ञानिक इलाज

डिप्रेशन को ‘गंभीर मानसिक रोग’ मानता है डब्ल्यूूएचओ

अवसाद यानी डिप्रेशन एक गंभीर रोग है पर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते जबतक मर्ज खतरनाक स्तर पर न पहुंच जाए। पूरी दुनिया में लोग डिप्रेशन का स्तर बढ़ने पर खुदकुशी करते हैं और इसकी संख्या काफी ज्यादा है। पर जब कोई मशहूर हस्ती खुदकुशी करती है तो यह सुर्खियों में आ जाता है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी ने एक बार फिर इस गंभीर रोग की ओर ध्यान खींचा है।
डब्ल्यूएचओ की इस साल जनवरी में जारी एक रिपोर्ट कहती है कि डिप्रेशन एक सीरियस मेंटल डिसॉर्डर यानी गंभीर मानसिक रोग है। इस बीमारी में इंसान का तनाव अक्सर उसे मौत की तरफ ले जाता है। रिपोर्ट की मानें तो पूरी दुनिया में तकरीबन २६ करोड़ लोग डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्रेशन के चलते हर साल करीब ८ लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। १५ से २९ साल की उम्र के लोगों की मौत का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इंसान के डिप्रेशन में जाने की कई वजहें हो सकती हैं। अचानक हुई कोई घटना भी इंसान को डिप्रेशन में ले जा सकती है।

मनोचिकित्सकों का कहना है कि डिप्रेशन में सुसाइड का स्टेज तभी आ सकता है जब किसी व्यक्ति को भावनात्मक रूप से गहरी चोट पहुंची हो। यह सोचना बिल्कुल गलत है कि सितारों की जिंदगी में कोई दुख नहीं होता है। हर व्यक्ति पहले एक इंसान है और बाद में फिल्मस्टार है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाएं डिप्रेशन की ज्यादा शिकार होती हैं। यदि इस गंभीर बीमारी को समय रहते काबू ना किया जाए तो लोग जिंदगी की परवाह किए बगैर सुसाइड कर लेते हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि साइकोलॉजिकल और फार्माकोलॉजिकल के जरिए डिप्रेशन का इलाज किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार किसी करीबी की मृत्यु, रिलेशनशिप में दिक्कतें, हार्मोंस में बदलाव, घातक बीमरियों की सच्चाई, मन-मुताबिक परिणाम ना मिलना, नौकरी या कर्ज की दिक्कतें, किसी करीबी दोस्त या रिश्तेदार का छूट जाना जैसी निजी घटनाएं एक इंसान को डिप्रेशन में ले जाने के लिए काफी हैं। इसलिए परिवार के लोगों का यह दायित्व है कि अगर किसी सदस्य में कोई भी असमान्य लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श की जानी चाहिए।