" /> भारतीय सेना के सबसे डेंजरस कमांडो, घातक ने दिया, चीन को गहरा घाव!

भारतीय सेना के सबसे डेंजरस कमांडो, घातक ने दिया, चीन को गहरा घाव!

गलवान घाटी में गत सोमवार की रात हुई हिंसक झड़प का सच धीरे-धीरे बाहर आ रहा है। शुरू में यही लगा था कि २० जवानों की शहादत के साथ भारत ने चीन के सामने बुरी तरह मात खाई मगर यह सच नहीं है। पता चला है कि उस रात भारतीय सैनिकों ने चीन से भरपूर बदला लिया और दोगुने से ज्यादा ड्रैगन के सैनिकों को मार गिराया था। इस कार्य को अंजाम देने में भारतीय सेना की `घातक’ टुकड़ी का सबसे प्रमुख रोल था। सेना में इन्हें `घातक ट्रूप्स’ कहा जाता है। ये थल सेना के सबसे खतरनाक कमांडोज होते हैं। भारतीय सेना की इन्फेंट्री के साथ ही `घातक ट्रूप्स’ भी मौजूद होते हैं और आमने-सामने की लड़ाई में इनका कोई तोड़ नहीं है। उस रात जब बिहार रेजिमेंट के कर्नल संतोष बाबू की चीनियों ने हत्या कर दी तो उसका बदला भारतीय सेना के इन जांबाज घातक कमांडो ने ही लिया था। इन्होंने `भारत माता की जय’ और `बजरंगबली तोड़ दुश्मन की नली’ के नारों के साथ चीन की लाल सेना पर जबरदस्त पलटवार किया और १८ चीनियों सैनिकों की गर्दनें तोड़ डाली थी। इतना ही नहीं, इन घातक कमांडोज ने एक चीनी कर्नल का भी किडनैप कर लिया था। बाद में मेजर जनरल स्तर की जो दो वार्ताएं हुई उसमें चीन अपने कर्नल को छुड़ाने के लिए ही गिड़गिड़ा रहा था। हालांकि चीन ने भी भारत के कुछ सैनिकों को बंदी बना लिया था।

सैन्य सूत्रों से छनकर जो कहानी बाहर आ रही है, उससे साफ है कि गत सोमवार की रात चीन के हमले का भारतीय जांबाजों ने जबरदस्त तरीके से जवाब दिया था। गलवान वैली में एलएसी पर जो बिहार रेजीमेंट तैनात है, उनका घोषवाक्य ही `बजरंगबली तोड़ दुश्मन की नली है।’ अपने शहीद साथियों को श्रद्धांजलि देने के लिए रेजिमेंट ने जो वीडियो बनाया है, उसमें बजरंगबली और वीर कुंवर सिंह के साथ ही बिरसा मुंडा का भी जिक्र किया गया है।

बहरहाल, उस दिन एलएसी पर दोपहर में लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की जो बातचीत हुई थी, उसमें तय हुआ था कि दोनों देशों के सैनिक अपनी जगह से पीछे हट जाएंगे। शाम के करीब ५ बजे कर्नल संतोष बाबू अपने कुछ सैनिकों को लेकर एलएसी पर यही देखने गए थे कि क्या चीनी वहीं हैं या पीछे हट गए! कई दिनों से आमने-सामने होने के कारण भारत और चीन के सैनिकों के बीच बातचीत हो रही थी और वे एक दूसरे को पहचानते भी थे पर शाम को कर्नल संतोष बाबू यह देखकर दंग रह गए कि वहां पर सैनिक बदल गए हैं और नए अनजाने चेहरे वाले सैनिक तैनात हैं। उन्होंने अपने टेंट भी नहीं हटाए थे। जब संतोष बाबू ने इस बारे में पूछताछ की तो एक चीनी सैनिक ने कर्नल को धक्का देकर गिरा दिया। सीओ की स्थिति रेजीमेंट में पिता समान होती है। यह देख कर बिहार रेजीमेंट के सैनिक चीनी सैनिकों से भिड़ गए और वहां पर हिंसक झड़प होने लगी। बाद में उन चीनियों पर संतोष बाबू की टुकड़ी ने काबू पा लिया और उन्हें पकड़कर भीतर चीनियों के बड़े अधिकारी के पास ले गए ताकि उन्हें इनकी करतूत बता सकें मगर वहां उन्होंने संतोष बाबू की टीम पर आक्रमण कर दिया। कर्नल के सिर पर एक बड़ा पत्थर मारा, जिससे वह नदी में गिर गए। वहां पर कई भारतीय सैनिक हताहत हुए। यह खबर तुरंत भारतीय कैंप में पहुंची तो रात के ११ बजे के करीब घातक ट्रूप इन्फेंट्री के सैनिकों के साथ चीनी कैंप भागी। उनके साथ बिहार रेजिमेंट के भी जवान थे। उन्होंने चीनियों से जबरदस्त बदला लिया। कई चीनियों के कंटीले रॉड व डंडे छीन लिए और उससे उन्हीं को मारा। हालत यह हुई कि चीनी सैनिक जान बचाने के लिए पहाड़ों में इधर उधर भागे। उनका भारतीय जवानों ने पीछा किया और उन्हीं में से कुछ जवानों को चीन ने बंदी बना लिया। इधर घातक ट्रूप्स ने कई चीनियों की गर्दन तोड़ दी और कई चीनियों के सिर पत्थर से बुरी तरह कुचल दिए। करीब ४ घंटे तक चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हिंसक झड़प होती रही। चीनी सैनिक भारतीयों के मुकाबले ५ गुना ज्यादा थे बावजूद इसके भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए।

अनजान होते हैं `घातक’
भारतीय थल सेना के सबसे खतरनाक ट्रूप्स का नाम है `घातक’। ये कमांडोज होते हैं। ये अनजान होते हैं। इनकी पहचान नहीं जाहिर की जाती। ये पहाड़ पर चढ़ सकते हैं। नदी में कूद सकते हैं और किसी भी परिस्थिति में दुश्मन पर टूट पड़ते हैं। इनका सिर्फ एक ही उद्देश्य होता है दुश्मन को मार डालो। सैन्य सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना में लगभग ७,००० घातक कमांडोज हैं। यह हर जगह इन्फेंट्री के साथ ५० से लेकर १०० की संख्या में तैनात हो रहते हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश से लेकर सिक्किम और अरुणाचल तक इंडियन आर्मी की यह घातक फोर्स तैनात है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि ये घातक कमांडो इतने खतरनाक होते हैं कि एक कमांडो १० से १५ सामान्य आदमियों का सामना आसानी के साथ कर सकता है। यही वजह है कि कम संख्या में होने के बावजूद उस दिन चीन के कैंप में भारत के इस घातक ट्रूप्स ने भगदड़ मचा दी थी। सूत्र बताते हैं कि ग्लोबल टाइम्स ने पीएलए के मारे गए सैनिकों की एक लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड भी की थी मगर चंद मिनटों के बाद ही उसे हटा दिया गया क्योंकि चीन खुद को महाशक्ति समझता है। ऐसे में भारत के सामने उसके सैनिकों का मरना और वो भी ज्यादा संख्या में चीन की छवि को खराब करता और खुद चीन के भीतर चीनी नागरिकों के सामने वहां की कम्युनिस्ट सरकार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता।