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मौत का मलबा!

देश की आर्थिक राजधानी और सपनों का शहर मुंबई की चमक-धमक के पीछे एक स्याह पक्ष भी है। इस के बारे में मुंबईकर हर साल बरसात में विभिन्न माध्यमों से देखते तथा सुनते भी हैं पर इसको लेकर कभी कोई गंभीर नजर नहीं आता। यह स्याह पक्ष है मुंबईभर में खड़ी वे इमारतें जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। मुंबई में होनेवाली मूसलाधार बरसात की मार के सामने असहाय हो मौत के मलबे के रूप में अचानक से तब्दील हो जाती हैं। मौत का तांडव मचानेवाली ३,९४५ ऐसी इमारतें ७ वर्ष में अब तक मलबे में तब्दील हो चुकी हैं, जिसके नीचे दबने से ३०० लोगों की मौत और १,१४६ लोग जख्मी हुए हैं। २०१३ से लेकर २०१९ तक का यह आंकड़ा आरटीआई एक्टीविस्ट शकील शेख द्वारा महाडा और मनपा से निकाला गया है।
बता दें कि गत वर्ष यानी २०१९ में मुंबईभर में ६२२ इमारतें ढह गर्इं। इसके मलबे में दबने के कारण ५१ लोग अकाल मौत के ग्रास बने जबकि २२७ लोग जख्मी हुए हैं।
२०१३ से २०१८ तक के आंकड़े
वर्ष २०१३ में ५३१ इमरत या घर गिरने की घटनाएं घटी, इसमें १०१ लोग मारे गए। मरनेवालों में ५८ पुरुष तो ४३ महिलाओं का समावेश था। जख्मी १८३ लोगों में ११० पुरुष तो ७३ महिलाएं शामिल थीं।
वर्ष २०१४ में ३४३ इमारत या घर गिरे। २१ लोगों की मौत हुई, जिसमें १७ पुरुष और ४ महिलाएं थीं। ६२ पुरुष तथा ३८ महिलाएं मिलाकर १०० लोग घायल हुए।
२०१५ में ४१७ घर या इमारत ढह गए। ११ पुरुष और चार महिलाएं मिलाकर कुल १५ लोग मौत के गाल में समा गए। घायल १२० लोगों में ७९ पुरुष तो ४१ महिलाओं का समावेश था।
२०१६ में इमारत या घर गिरने का आंकड़ा ४८६ रहा। मौत २४ लोगों की हुई, १७ पुरुष और ७ महिलाएं। ११३ पुरुष और ५९ महिलाओं को मिलाकर कुल १७२ लोग जख्मी हुए थे।
२०१७ में घर या इमारत गिरने का आंकड़ा बढ़ कर ५६८ जा पहुंचा। इन हादसों में ६६ लोग बेमौत मारे गए। मरनेवालों में ४४ पुरुष और २२ महिलाओं का समावेश था। इन हादसों में १६५ लोग घायल भी हुए थे, जिसमें १०१ पुरुष तथा ६४ महिलाएं शामिल थीं।
२०१८ में इमारत या घर सबसे ज्यादा गिरे, यह आंकड़ा ६१९ जा पहुंचा था। मौत का आंकड़ा महज १५ था। इन घरों या इमारतों के मलबे में दब कर १२ पुरुष तथा ३ महिलाओं ने अपनी जान गंवाई थीं। मलबे ने ६० पुरुष और १९ महिलाओं यानी ७९ लोगों को जख्मी भी किया था।
२०१९ में घर या इमारत के गिरने, बिजली का शॉक लगने, समुद्र या नाले में बहने की ९,९४३ घटनाएं घटित हुईं। इनमें १३७ लोग अपनी जान गवां बैठे। इन घटनाओं में ५७९ व्यक्ति जख्मी भी हुए थे, जिनमें ३७२ पुरुष तथा २०७ महिलाएं शामिल थीं।