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कोरोना काल में डिजिटल की बल्ले-बल्ले, मिल रहा है डिजिटल को बढ़ावा

नोटबंदी के बाद देशभर में डिजिटल लेन-देन की मुहिम चली थी, कोरोना काल में उसे और बढ़ावा मिला है। सरकारी संस्थान और कई निजी कंपनियां भी अब डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्राथमिकता दे रही हैं। इसी कड़ी में पश्चिम रेलवे ने भी ३५४ स्टेशनों पर ग्राहकों से ट्रांजैक्शन के लिए डिजिटल माध्यम की शुरुआत कर दी है। इसमें अनारक्षित और आरक्षित टिकट खरीदनेवाले काउंटर, खानपान यूनिट और माल इत्यादि पार्सल करनेवाले काउंटर पर डिजिटल लेन-देन की व्यवस्था उपलब्ध करा दी गई है।
४.५ लाख यात्री कर रहे ट्रांजेक्शन
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर के अनुसार रोजाना करीब ४.५ लाख यात्री डिजिटल ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। इसमें टिकट बुकिंग, पार्सल या खानपान के लेन-देन के अलावा ऑक्शन सेल, रेलवे की सीमा में किराए का भुगतान, पेमेंट के लिए डिपोजिट, बिल रिकवरी जैसे काम भी डिजिटल माध्यम से शुरू हो गए हैं। इन सभी ट्रांजैक्शन के लिए ई-रसीद जारी की जाती है।
कैशलेस के लिए लगी ९२८ मशीनें
डिजिटल ट्रांजेक्शन में सबसे बड़ा हिस्सा कैशलेस लेन-देन का होता है। इसके लिए पश्चिम रेलवे ने अब तक ९२८ पीओएस मशीनें लगा दी हैं। इन मशीनों की मदद से कार्ड पेमेंट आसानी से होता है। इसके अलावा यूपीआईआई और भीम ऐप के जरिए पेमेंट की सुविधाएं यूटीएस और पीआरएस काउंटरों पर दी गई हैं। मुंबई से शुरू की गई अनारक्षित टिकट ऐप की सुविधा को अब लगभर पूरे भारतीय रेल में शुरू कर दिया गया है।
लोकल स्टेशनों पर क्यूआर कोड
अनारक्षित टिकट खासतौर से लोकल ट्रेनों के टिकट खरीदने के लिए मुंबई के हर स्टेशन पर क्यूआर कोड लगा दिए गए हैं। यात्री चलते हुए अपने मोबाइल के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर टिकट बुक कर सकता है। इस सुविधा को अब गैर उपनगरीय स्टेशनों पर भी शुरू किया जाएगा।
राजधानी जैसी ट्रेनों में स्कैनिंग
राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में पश्चिम रेलवे ने ६४ हैंडहेल्ड टर्मिनल दिए हैं। इसमें पेपरवाले चार्टिंग और यात्री की उपस्थिति दर्ज करने के सिस्टम को कंप्यूटर प्रणाली से जोड़ दिया गया है। ये सिस्टम टीटीई के पास होते हैं। इसके अलावा पश्चिम रेलवे की सभी कैटरिंग यूनिट पर कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए पीओएस सिस्टम दिए हुए हैं। रेलवे के पार्किंग स्थलों पर भी डिजिटल ट्रांजेक्शन की शुरुआत हो चुकी है। इसके अलावा १९ पे एण्ड यूज वाले स्थानों पर और ३० स्टेशनों के रिटायरिंग रूम के लिए भी डिजिटल ट्रांजेक्शन की शुरुआत हुई है।