मौत के साए में जी रहे १० हजार लोग

भिवंडी मनपा के अंतर्गत ७५६ जर्जर इमारतें हैं जिनमें २,४६० परिवार के १० हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। यह लोग मौत के साए में रहते हैं। बारिश के दौरान इन इमारतों में कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है इसके बावजूद मनपा ने सिर्फ नोटिस थमाकर कार्रवाई से मुंह मोड़ लिया है।
बता दें कि भिवंडी मनपा के सभी पांच प्रभागों में कुल ७५६ इमारतों को जर्जर घोषित किया गया है जिसमें २९८ इमारतें अति जर्र्जर हैं। इन इमारतों में पुरानी चाल, बिल्डिंग, पॉवरलूम कारखाने तथा दुकान शामिल हैं। जिसके तहत मनपा प्रभाग समिति एक में ३२ इमारतें अति जर्जर सहित ४० जर्जर इमारतें हैं। प्रभाग समिति दो में १५२ इमारतें जर्जर हैं। प्रभाग समिति तीन में ७५ इमारतें जर्जर व २६ इमारतें अति जर्जर हैं। प्रभाग समिति ४ में १९५ इमारतें जर्जर व ७७ इमारत अति-जर्जर हैं। इसी तरह प्रभाग समिति क्रमांक पांच में सबसे ज्यादा २११ जर्जर इमारतें हैं लेकिन मनपा प्रशासन ने इन जर्जर बिल्डिंगों में रहनेवालों के लिए कोई पर्यायी व्यवस्था नहीं की है। बता दें कि जर्जर इमारतों को खाली कराने में सबसे बड़ा रोड़ा स्थानीय, नेता, नगरसेवक व बिल्डर होते हैं। हालांकि अतिरिक्त आयुक्त अशोक रणखाव ने तकरीबन २० दिन पहले सभी प्रभाग अधिकारियों की मीटिंग लेकर जर्जर व अति-जर्जर बिल्डिंगों को बरसात से पहले तोड़ने का आदेश दिया था लेकिन उनके आदेश के बावजूद जर्जर इमारतों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।