" /> मेलघाट बाघ परियोजना से जानेवाली रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज मत करो! -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

मेलघाट बाघ परियोजना से जानेवाली रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज मत करो! -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

बाघ संरक्षण के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राथमिकता दी है। बाघ परियोजना की सफलता को देखते हुए यह दुनिया भर में पैâला हुआ है। मेलघाट बाघ परियोजना से गुजरनेवाली प्रस्तावित अकोला-खंडवा रेलवे ब्रॉडगेज परियोजना को अन्य वैकल्पिक माध्यमों से बाहर किया जाए। ऐसा अनुरोध मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रेल मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर किया है। रेल मंत्रालय ने मौजूदा अकोला से खंडवा तक १७६ किलोमीटर रेलवे लाइन को मीटर गेज से ब्रॉडगेज में परिवर्तित करने का प्रस्ताव किया है। इसलिए इस रेलवे मार्ग से सटे २३.४८ किमी को रियलाइनमेट करना होगा और इस रेलवे मार्ग को परिवर्तन करना होगा।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि अगर मेलघाट टाइगर रिजर्व की बजाय बाहर से वैकल्पिक मार्ग को परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया तो दुर्लभ बाघों के निवास स्थान को धक्का देने की आवश्यकता नहीं होगी और दूसरी ओर जलगांव, जामोद और संग्रामपुर तालुका और आसपास के १०० गांवों को नए ब्रॉडगेज मार्ग से लाभ होगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि १९७३-७४ में देश में घोषित नौ बाघ परियोजनाओं में से मेलघाट पहले स्थान पर है। २७६८.५२ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली यह परियोजना दुनिया की शीर्ष विकसित परियोजनाओं में से एक है। प्रस्तावित ब्रॉडगेज स्वाभाविक रूप से इस क्षेत्र में भारी पैमाने पर रेल यातायात की मात्रा में वृद्धि करेगा, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना के मूल में भी वन्यजीव निवास स्थान का व्यवधान आने की संभावना है। इसके अलावा, इस बदलाव से ट्रेनों की गति भी बढ़ेगी। मूलरूप से इस भाग को अबाधित और सुरक्षित रखने के लिए १६ गांव और इस क्षेत्र के बाहर के ६ गांव अन्य स्थानों पर पुनर्वसित किए गए हैं। ये गांव रेलवे लाइन के १० किमी के दायरे में थे। गांवों के पुनर्वास और प्राणियों के आवास के लिए किए गए प्रयासों से वन्यजीवों में तेजी से वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि भारतीय वन्यजीव संस्थान ने यह सुझाव दिया है कि रेलवे  ब्रॉडगेज को इस क्षेत्र से न ले जाते हुए अन्य वैकल्पिक क्षेत्रों की ओर किया जाए। केंद्रीय समिति के राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने मेलघाट परियोजना वन अभयारण्य में १६०.९४ हेक्टेयर वन भूमि को रेलवे मार्ग परिवर्तन के लिए आवंटित करने पर पुनर्विचार करने को भी कहा है। बोर्ड ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव भेजने पर विचार करने के लिए भी सूचित किया है। रेलवे को विकसित किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा करते समय, विशेषकर मेलघाट जैसी जगहों पर, बाघों के संरक्षण और पर्यावरणीय क्षरण को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, इसलिए वैकल्पिक मार्गों को ब्रॉडगेज के लिए चुना जाना चाहिए। ऐसा मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है।