" /> अब प्रवचन नहीं चाहिए!

अब प्रवचन नहीं चाहिए!

कोरोना के बारे में खबर मिली-जुली है। जिसे देखो वही अब कोरोना पर अपने तरीके से प्रवचन दे रहा है। डॉक्टर, पुलिस, नर्स, वार्ड बॉय युद्धरत हैं और वे इसमें अपनी जान गंवा रहे हैं। मुंबई के उपनगरीय इलाके में कोरोना मुक्ति के लिए दिन-रात काम कर रहे मनपा सहायक आयुक्त अशोक खैरनार कोरोना से लड़ते हुए शहीद हो गए। खैरनार ने बांद्रा पूर्व क्षेत्र को कोरोना से मुक्त करने के लिए अपनी जिंदगी को जोखिम में डाल दिया और उसमें अपनी जान गवां दी। ऐसे लड़ाके हैं इसलिए हम कोरोना का सामना कर पा रहे हैं। यह चौंकानेवाली बात है कि परदे के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और उनके पुत्र अभिषेक बच्चन को भी कोरोना हो गया। बच्चन इस दौरान घर पर ही थे और खुद की देखभाल कर रहे थे। सोशल मीडिया पर समय-समय पर वे कोरोना के बारे में लोगों को सकारात्मक मार्गदर्शन दे रहे थे। फिर भी श्रीमान बच्चन तक कोरोना पहुंच ही गया। यह चिंताजनक है। बच्चन और उनके चिरंजीव योद्धा स्वभाव के हैं। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे इस लड़ाई को जीतेंगे और सुरक्षित घर लौटेंगे। कोरोना संकट बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में एक बार फिर कड़ा लॉकडाउन किया गया। सवाल यह है कि उन्हें ये लॉकडाउन क्यों करना पड़ा? कुछ दिनों पहले हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में कोरोना को नियंत्रण में लाने के लिए योगी सरकार के प्रयासों की सराहना की और उन प्रयासों को एक सफल ‘मॉडल’ बताया। हमारा भी यही कहना है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जब तक कोरोना नियंत्रण में नहीं लाया जाता, तब तक देश में कोरोना के खिलाफ युद्ध नहीं जीता जा सकता। इसलिए केंद्र को कोरोना के बारे में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उत्तर प्रदेश ‘मॉडल’ के बावजूद फिर से सख्त लॉकडाउन की नौबत आए मतलब कुछ गड़बड़ है। बिहार में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं। इसलिए कोरोना के लिहाज से भाजपा के लिए ये भी एक महत्वपूर्ण राज्य है। इस परिप्रेक्ष्य में मुंबई में धारावी के संबंध में अच्छी खबर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना है कि धारावी में स्थिति नियंत्रण में आ रही है और इस मामले में शाबाशी भी दी है। कोरोना को लेकर दुनिया भर में परिस्थिति हाथ से निकल जाने की निराशाजनक तस्वीर के बावजूद इसे अभी भी नियंत्रण में लाया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडनोम ग्रेब्रेयासिस ने कहा है कि इटली, स्पेन, दक्षिण कोरिया और मुंबई के धारावी में इस बीमारी पर जिस प्रकार नियंत्रण लाया गया, वह अनुकरणीय है। धारावी मुंबई उपनगर का एक हिस्सा है, लेकिन एशिया में सबसे बड़ी झुग्गी के रूप में, धारावी हमेशा दुनिया के नक्शे पर पहचानी जाती रही है। पहले ऐसा लग रहा था कि धारावी की भीड़भाड़, अनियोजित, घनी आबादी वाली झुग्गी में कोरोना ने घुसपैठ की और अगर संक्रमण फैल गया, तो कोरोना को यहां से दूर करना मुश्किल होगा, लेकिन मुंबई मनपा और पुलिस ने स्थिति को अच्छी तरह से संभाला और कोरोना को वहां से दूर कर दिया। यह दावा नहीं किया जा रहा कि कोरोना से आज धारावी पूरी तरह मुक्त हो गया है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वीकार किया कि उस पर नियंत्रण हासिल करने में सफलता अवश्य मिली है। महाराष्ट्र के विपक्ष के नेता श्री फडणवीस फिलहाल राज्यभर का दौरा करके कोरोना संकट के बारे में जान रहे हैं और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार वैâसे विफल रही है, इस पर दैनिक प्रवचन दे रहे हैं। इसकी बजाय उन्हें पलथी मारकर पूरी धारावी में सरकारी तंत्र द्वारा किए गए सफल काम को देखना चाहिए, लेकिन एक नया प्रचारी फंडा फैलाया जा रहा है, ‘धारावी में कोरोना की सफलता केवल संघ के स्वयंसेवकों के कारण मिली है!’ यह एक आतिश्योक्ति हो गई। ये सफेद कपड़ों के देवदूतों का अपमान है। मतलब कुछ भी अच्छा हुआ तो हमारी वजह से! भैंसे को बछड़ा हुआ हमारी वजह से, रेगिस्तान में हरियाली छाई हमारी वजह से। संकट के समय में इस प्रकार की बातें इन्हें कैसे सूझती हैं? संघ का काम अच्छा नहीं है, ऐसा कोई नहीं कहेगा। लेकिन धारावी में कोरोना को नियंत्रित करने के लिए सारी यंत्रणाओं ने कड़ी मेहनत की है। यह सफलता सामुदायिक है, उनमें भी मुंबई महानगरपालिका का काम महत्वपूर्ण है, तुम ये स्वीकार करोगे कि नहीं? दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ आदि में स्वयंसेवक हैं, तो वहां संघ धारावी की तरह दक्ष क्यों नहीं है? इसलिए कोरोना युद्ध में संघ को अकारण घसीटने की कोई आवश्यकता नहीं है। हर कोई अपनी क्षमतानुसार लड़ रहा है। आरबीआई गवर्नर शशिकांत दास ने कहा कि कोरोना सौ साल का सबसे बड़ा संकट है। दास का कहना है कि कोरोना के कारण उत्पादन, नौकरियों और स्वास्थ्य पर अभूतपूर्व नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जनता वर्तमान में इन सभी नकारात्मक परिणामों से गुजर रही है। इससे छुटकारा वैâसे मिले, कृपया यही बताएं साहेब। अब प्रवचन नहीं चाहिए!