" /> गुरुदक्षिणा, नववर्ष से पहले निशाचर बना शिष्य

गुरुदक्षिणा, नववर्ष से पहले निशाचर बना शिष्य

उत्तर प्रदेश में शामली शहर में सात महीने पहले हुआ अजय पाठक उनके परिवार के तीन सदस्यों की हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दुनिया जब नववर्ष के स्वागत की योजना बना रही थी, उससे ठीक दो दिन पहले शामली की पंजाबी कॉलोनी में मशहूर भजन गायक अजय पाठक, उनकी पत्नी और दो बच्चों का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था। चार लोगों की हत्या के इस सनसनीखेज एवं बहुचर्चित मामले में पुलिस ने अजय के सहयोगी हिमांशु सैनी को गिरफ्तार किया था। करीब १५ दिन पहले इस हत्याकांड से जुड़ी फोरेंसिक विभाग की रिपोर्ट सामने आई है। फोरेंसिक टीम द्वारा की गई डीएनए जांच में वसुंधरा के हाथ में मिले बाल से आरोपी हिमांशु सैनी के होने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर कार में मिला अधजला शव अजय पाठक के बेटे भागवत का होने की भी पुष्टि हो गई है।
इंटरनेशनल भजन गायक अजय पाठक उनकी पत्नी, बेटे और बेटी के हत्या आरोप में पुलिस ने हत्यारोपी हिमांशु सैनी को हरियाणा के पानीपत से गिरफ्तार किया था। वह कैराना के झारखेडी थाना क्षेत्र का रहनेवाला है। पूछताछ में हिमांशु ने पुलिस को पहले बताया था कि उसने अजय पाठक को छोटी-छोटी धनराशि के रूप में करीब ६० हजार रुपए उधार दे रखे थे। मांगने पर भी पैसा लौटा नहीं रहे थे। बार-बार अपना पैसा मांगने पर अजय पाठक उसे अपमानित करते थे। ३० दिसंबर की रात भी पैसे की मांग किया तो अजय ने अपशब्द कहते हुए डांट दिया था। इससे क्षुब्ध होकर वह उन्हीं के घर ही रुक गया। रात ३ बजे अजय के घर में रखी तलवार से ही उनके पूरे परिवार का नरसंहार कर दिया। हालांकि बाद में जांच में हिमांशु द्वारा बताई गई हत्या की वजह झूठी साबित हुई।
इसलिए किया कुकर्म
हिमांशु की माली हालत ठीक नहीं चल रही थी। उसके ऊपर कई लोगों का कर्ज भी हो रहा था। इसके अतिरिक्त उसने बैंक से भी लाखों का लोन ले रखा था, जिसकी किस्त समय से वापस नहीं लौटाने के कारण उसके खिलाफ बैंक से लीगल नोटिस भी जारी हुई थी। इससे वह मानसिक तनाव में रहने लगा था, जिसके चलते वह अजय पाठक से अधिक पारिश्रमिक की मांग करता था, परंतु अजय पाठक उसको केवल मेहनताना ही देते थे।
भजन मंडली में करता था काम
हिमांशु अजय पाठक की भजन मंडली में लगभग ढाई साल से काम करता था। अजय पाठक के घर उसका आना-जाना रहता था। रात में अजय पाठक के यहां रुक भी जाया करता था। घटनावाली रात हिमांशु खाना खाने के बाद सोने चला गया। रात करीब ३ बजे वह उठा और पहली मंजिल पर बने कमरे में आया। जहां घर में ही रखी तलवार से सो रहे अजय पाठक पर कई वार कर हत्या कर दी। अजय की हत्या के दौरान उसी कमरे में सो रही उनकी पत्नी स्नेह जाग गई। इसलिए स्नेह का मुंह बंद करने के लिए हिमांशु ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। बाद में हिमांशु ने सोचा कि वह रात में अजय के घर रुका था ये बात अजय की बेटी वसुंधरा और बेटे भागवत सुबह में सबको बता सकते हैं, इससे वह पकड़ा जाएगा। इसी डर से उसने तुरंत दूसरे कमरे में सो रही वसुंधरा को उसी तलवार से मार डाला और भागवत का गला घोंटकर मार डाला।
नीचे लाया था बच्चों का शव
हत्या के बाद हिमांशु चारों शवों को कहीं ले जाकर ठिकाने लगाना चाहता था। उसने भागवत और वसुंधरा के शव एक-एक कर पहली मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर ले आया। बाहर खड़ी ईको स्पोर्टस की डिग्गी को खोलकर भागवत का शव रख लिया, जबकि बॉडी भारी होने के कारण वसुंधरा की लाश वह गाड़ी में नहीं लाद पाया। इसलिए वसुंधरा के शव को नीचे कमरे में लेकर गया और वहां रखी रजाई से ढंक कर कमरे को बाहर से ताला लगा दिया, क्योंकि सुबह होने को थी। कहीं किसी को मालूम न चल जाए, वह ऊपर कमरे में गया। इसके बाद उसने अजय और स्नेह को कंबल से ढंक दिया। वह जानता था कि अजय ३१ दिसंबर की सुबह अपने परिवार के साथ करनाल जानेवाले थे। लोगों को लगेगा कि अजय परिवार सहित कहीं बाहर गए हैं। ये सोचकर उसने अजय के कमरे और घर के मुख्य दरवाजे पर भी बाहर से ताला जड़ दिया और नीचे आकर ईको स्पोर्टस गाड़ी में शव रखकर बाहर निकल गया। रात होने पर वह पुन: घर पहुंचकर उन तीनों लाश को गाड़ी में रखकर ले जाने और आसानी से ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी, ताकि किसी को उसके कुकर्म का पता नहीं लग सके लेकिन पुलिस को जानकारी मिल गई। इससे वह डर गया। पकड़े जाने के डर से उसने साक्ष्य मिटाने के लिए पानीपत टोल प्लाजा के पास ईको स्पोर्टस में पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे भागवत का शव भी आधा जल गया था।
पुलिस ने हिमांशु की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार, अजय के घर से चुराए गए तीन मोबाइल फोन और खून से लथपथ कपड़े बरामद कर लिए थे। पुलिस को वसुंधरा के हाथ में बाल मिले थे। पुलिस ने वसुंधरा के हाथ में मिले बाल और आरोपी हिमांशु के बालों का सैंपल लेकर डीएनए जांच को लखनऊ प्रयोगशाला में भेजा था। पुलिस को डीएनए की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। डीएनए रिपोर्ट में वसुंधरा के हाथ में मिले बाल आरोपी हिमांशु सैनी के होने की पुष्टि हुई है। साथ ही डीएनए रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि हो गई है कि कार में मिला शव अजय के बेटे भागवत का ही था। डीएनए रिपोर्ट इस कांड का साइंटिफिक साक्ष्य है, जो आरोपी को कड़ी सजा दिलाने में मजबूत और विश्वसनीय साबित होगा। अर्थात वारदात के मौके पर मिले बाल आरोपी हिमांशु के मौके पर मौजूद एवं वारदात में शामिल होने की पुष्टि करते हैं। अब डीएनए रिपोर्ट अजय को कोर्ट में दोषी सिद्ध करवाने में पुलिस का सबसे बड़ा हथियार सिद्ध होगी।