" /> ड्रैगन ने फिर की दगाबाजी, भारतीय कर्नल की पीठ पर किया वार!

ड्रैगन ने फिर की दगाबाजी, भारतीय कर्नल की पीठ पर किया वार!

 हिंदुस्थान के २० जवान शहीद
 चीन के भी ४३ सैनिक मारे जाने की खबर
 कल रात पेट्रोल पाइंट १४ पर हुई दोनों सेनाओं की तनातनी

दगाबाजी के मामले में ड्रैगन यानी चीन दुनिया का सरताज है। कोई भी मौका हो, वह दगाबाजी करने से बाज नहीं आता। चाहे १९६२ हो, १९६७ हो या १९७५, उसने हमेशा भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की है। पिछले कुछ साल से वह ऐसी कोशिश बार-बार कर रहा है। २०१७ में उसने डोकलाम में ऐसी ही कोशिश की थी। पिछले ३ महीने से सिक्किम से लेकर लद्दाख तक वह एक बार फिर दगाबाजी की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच एक समझौता है जिसके तहत वे एक दूसरे पर सैन्य बल या हथियारों का प्रयोग नहीं कर सकते, लेकिन परसों रात उसने दगाबाजी की इंतिहा करते हुए भारतीय सेना के एक कर्नल और १८ जवानों की जान ले ली। ड्रैगन ने धोखे से सोमवार की रात के अंधेरे मेंं कर्नल की पीठ पर वार किया। भारतीय सैनिकों को इसका जरा भी अंदाजा नहीं था। इस अचानक हमले के बाद वे संभले और फिर वहां दोनों सैनिकों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। फिर भारतीय सैनिक भारत माता की जय के नारों के साथ चीनियों पर टूट पड़े और ४३ सैनिकों का खात्मा कर दिया। देर रात भारतीय सेना ने २० सैनिकों के शहीद होने की पुष्टि कर दी। मगर ड्रैगन की ओर से चुप्पी छाई रही।
बता दें कि लद्दाख में गलवान वैली पर जारी टेंशन को लेकर गत ६ जून से दोनों देशों के टॉप सैन्य कमांडरों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। उसमें सारी समस्या आपसी बातचीत से सुलझाने पर ही जोर दिया जा रहा था। ऐसे में चीन की इस कायराना और दगाबाजी की हरकत ने हर किसी को हतप्रभ कर दिया है। चीन की तरफ भी काफी सैनिकों के मारे जाने की खबर है। कल रात वहां एलएसी पर कुछ चीनी हेलीकॉप्टर आए और चीनी सैनिकों के शव ले गए। भारतीय सेना के सर्विलांस यंत्र ने इसका पता भी लगा लिया।

बहरहाल, इस संबंध में वरिष्ठ डिफेंस जर्नलिस्ट और स्ट्रेट न्यूज ग्लोबल के एडिटर इन चीफ नितिन ए गोखले के अनुसार रात के अंधेरे में भारतीय सेना की टुकड़ी एलएसी के पास पेट्रोलिंग पॉइंट १४ के पास निगरानी के लिए गई थी। दूसरी तरफ चीनी सेना थी। दोनों पक्ष एलएसी का मुआयना कर वापस लौट रहे थे और सबकुछ ठीकठाक था, तभी चीनी सैनिकों ने धोखे से पीछे की ओर से भारतीय कर्नल के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया। कर्नल जमीन पर गिर पड़े। यह देख भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों से भिड़ गए। लेकिन चीनी पूरी तैयारी के साथ थे। उसके पीछे करीब हजार सैनिकों की एक यूनिट मौजूद थी जो मौके पर पहुंच गई। यह देखकर भारतीय सैनिकों ने भी पीछे खबर भेजी और उनकी मदद के लिए भारतीय सेना की बड़ी टुकड़ी पहुंच गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जोरदार हिंसक झड़प हुई। इसमें लोहे की रॉड, पत्थर और डंडों का जोरदार प्रयोग हुआ। इसमें दोनों पक्ष के कई सैनिक घायल हुए। भारतीय पक्ष में एक कर्नल के अलावा कई जवान शहीद हो गए। उधर चीन की तरफ भी ४३ सैनिकों के मारे जाने की खबर है। हालांकि चीन की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई। वह इसे छुपा रहा है। दूसरी तरफ चीनी सरकार के अखबार ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने इस बारे में ट्वीट कर बताया कि चीन की सेना को भी नुकसान हुआ है और कैजुअल्टी हुई है। हालांकि उन्होंने संख्या नहीं बताई।

रात की झड़प के बाद सुबह होते ही जैसे ही यह खबर फैली, दोनों पक्ष के टॉप कमांडर घटनास्थल पर भागे। उसके बाद बातचीत करके इस विवाद को हल करने की कोशिश दिन भर चलती रही। उधर चीनी विदेश मंत्रालय भी बार-बार कहता रहा कि हिंसा से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसे बातचीत करके ही सुलझाना पड़ेगा। लेकिन सोमवार की रात जो घटना हुई है, उससे चीनी दगाबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। जानकारों का मानना है कि बिना ऊपर के आदेश के चीन की सेना ऐसा कदम नहीं उठा सकती। यानी चीन की कथनी और करनी में भारी फर्क है। इसलिए इसे देखते हुए भारत को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। इस मामले में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनायक का कहना है कि भारतीय सैनिकों को अब काफी सतर्क रहना होगा। वे जब भी एलएसी के पास जाएं तो अपने साथ हाई रिजोल्यूशन कैमरा लेकर जाएं और पूरी गतिविधि को फिल्माते रहें। इससे अगर चीनी सैनिक वहां कुछ गड़बड़ी करते हैं या वे भारतीय सीमा के अंदर घुसते हैं तो यह सारी चीजें कैमरे में आ जाएंगी। उसके बाद यह फिल्म चीन के राजदूत, चीन के टॉप कमांडर और चीन के विदेश मंत्रालय को दे दी जाए कि देखो आपके लोग वहां क्या कर रहे हैं? यह एक सबूत होगा और इसके बाद शायद चीन ऐसी हरकत नहीं करेगा।