" /> ड्रैगन की जद में आया, डीबीओ एयर बेस!, हिंदुस्थानी योजना पर पानी फेरना चाहता है चीन, ३० प्रतिशत ट्रुप्स बढ़ाए,

ड्रैगन की जद में आया, डीबीओ एयर बेस!, हिंदुस्थानी योजना पर पानी फेरना चाहता है चीन, ३० प्रतिशत ट्रुप्स बढ़ाए,

दौलत बेग ओल्डी के सामने खोला नया मोर्चा
डीबीओ को नाकाम करने के लिए बनाई ट्रिपल अटैक योजना

ड्रैगन चीन ने इस बार लद्दाख में मजबूत घेराबंदी की है। उसकी नजर पूरी तरह डीबीओ (दौलत बेग ओल्डी) पर है। भारत ने वहां हाल के वर्षों में अपने को मजबूत किया है और चीन इसे खुद के लिए खतरा मान रहा है। असल में उसे डर है कि चीन ने पीओके होकर पाकिस्तान तक की जो सड़क बनाई है, उसे भारतीय सेना कभी भी निशाना बना सकती है। इसलिए इस बार उसने डीबीओ के सामने मोर्चा खोला है। इसके साथ ही उसने वहां ३ तरफ से अटैक की योजना भी बना ली है। अब ड्रैगन की नजर डीबीओ एयरबेस पर है। उसने इस एयरबेस को तबाह करने के लिए एरिया में ३० प्रतिशत अपने ट्रूप्स भी बढ़ा लिए हैं।

सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हिंदुस्थानी सेना की उत्तरी सीमा पर सबसे ऊंची हवाई पट्टी डीबीओ से करीब २० किलोमीटर दूर एलएसी के उस पार चाइनीज सेना ने जबरदस्त ट्रुप बिल्ड अप किया है। उसी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर चीन की आर्टिलरी डिप्लॉय हो रही है। इसमें टैंक और तोप दोनों शामिल हैं। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इन डिप्लॉयमेंट के और पीछे चाइना ने ‘सरफेस टू एयर मिसाइल’ सिस्टम (सैम) तैनात किया है। हो सकता है यह सिस्टम रूस से लिया गया एस-४०० हो। यह फाइटर जेट्स को नाकाम करने के लिए काफी उत्तम प्रणाली मानी जाती है। इन सब के अलावा चीन ने अपने हाइटन एयर बेस पर स्वनिर्मित जे-११ और जे-१६ फाइटर्स के साथ रूस निर्मित सुखोई-३० तैनात किए हैं, जिनकी सीधी रेंज में डीबीओ हवाई पट्टी आती है। चीन ने यह एयरबेस काफी जल्दी बनाया है। ऊपर सैटेलाइट इमेज में यह साफ दिख रहा है। पहली इमेज ६ अप्रैल की है। दूसरी इमेज २१ मई की है जो बता रही है कि चीन ने वहां कितना तेज कंस्ट्रक्शन किया है। कुल मिलाकर डीबीओ हवाई पट्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए चाइना ने अपनी आर्टिलरी, सैम और सुखोई -३० की यह तिहरी डिप्लॉयमेंट कर रखी है। हालांकि हिंदुस्थानी सेना ने भी उन्हें जवाब देने के लिए बराबरी का डिप्लॉयमेंट किया है।

चीनी सेना की रेंज में पूरा लद्दाख!
चीन की नजर लद्दाख को निगलने पर लगी है। पूरा लद्दाख एक तरह से इस समय उसके रेंज में है। सीमा पर तनातनी का आलम यह है कि लाल सेना एलएसी पर करीब ६ विवादित स्थानों पर हजारों की तादाद में फौजियों का जमावड़ा कर चुकी है। और वह इन इलाकों में तोपखानों के साथ ही टैंकों की भी तैनाती कर चुकी है। इन सबके पीछे का मकसद भारतीय सेना की पैट्रोलिंग को बाधित करते हुए कराकोरम दर्रे तक जानेवाली सड़क को काटना है ताकि भारतीय सेना उस इलाके में मिलनेवाली सियाचिन लाइन तक न पहुंच सके।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना ६ इलाके में भीतर तक घुस आई है। भारतीय पक्ष इसे जमीन पर बॉर्डर रेखा के रेखांकित न होने की स्थिति में भ्रम करार दे रहा है, जबकि हालत यह है कि लाल सेना साजो समान और हजारों की संख्या में आ डटी है।
सूत्रों के मुताबिक, लद्दाख के उत्तर, मध्य और दक्षिण के ६ हिस्सों में चीनी सेना घुसी है। उत्तरी लद्दाख में गलवान घाटी और देपसांग, मध्य लद्दाख में हाट स्प्रिंग्स, पेंगोंग लेक और चुशूल तक तो दक्षिणी लद्दाख में दमचोक और चुमार में पीएलए की घुसपैठ हुई है। नतीजा सामने है। उत्तरी लद्दाख में भारतीय सेना पेट्रोलिंग पॉइंट १० से १३ तक में चौकसी नहीं कर पा रही है, क्योंकि चीनी सेना ने भारत की सीमा में १५ किमी अंदर तक सड़क बना ली है। दरअसल चीन जीवन नाला तक घुस चुका है। अब नजर बेहद अहम राकी नाला पर है। भारत की सेना पेट्रोलिंग पॉइंट १४ पर है, लेकिन उससे २५ किमी दक्षिण में पीपी १५ पर चीन ने २ सड़कें बनाई हैं। पैंगोंग त्से के उत्तर में चीन ने फिंगर ८ से फिंगर ४ तक के ८ किमी क्षेत्र को हड़प लिया है। इस घुसपैठ से भारत की दुर्बुक-शयोक-दौलतबेग ओल्डी रोड खतरे में है। वहीं जीवन नाला और राकी नाला तक चीन की घुसपैठ से भारत के कराकोरम दर्रे तक पहुंचने वाले दो रास्तों से कटने का खतरा पैदा हो गया है।
अधिकारी बताते हैं कि दौलत बेग ओल्डी में भी उसकी घुसपैठ डीबीओ की हवाई पट्टी के लिए खतरा पैदा कर रही है। हालांकि अपुष्ट समाचारों के मुताबिक, इस इलाके में चीनी सेना से निपटने की खातिर भारतीय सेना ने भीष्म टैंकों के सथ ही के-९ वज्र तोपखानों को उतारा है। यह सारी कवायद पिछले हफ्ते ही की गई है। दरअसल चीन डीबीओ रोड को काट देना चाहता है। वह डीबीओ में भारतीय सेना की मौजूदगी को अपने उस कराकोरम दर्रे के लिए खतरा मानता है जहां से चीन-पाकिस्तान जाने के लिए रोड बना चुका है और इस रोड के एक किनारे पर सियाचिन ग्लेशियर के हिमखंड आरंभ होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो चीन मानता है कि भारतीय सेना इस मार्ग पर उसकी रसद को काटने की कुव्वत रखती है। कई स्थानों पर चीन की सबसे खतरनाक तोपें पीसीएल-१८१ भी नजर आई हैं। चीनी सेना के दावानुसार, उसकी यह तोप दुनिया की सबसे खतरनाक तोप है।
गलवान वैली में पहले ही खूरेंजी झड़पें हो चुकी हैं और अब चीन अधिक सैनिकों के साथ फिर से इस इलाके में जमने लगा है। साथ ही पैंगोंग झील, चुशूल और दमचोक में भी उसके गश्ती दल देखे गए हैं जो टैंट गाड़ने में व्यस्त थे। एक तरह से चीन ने अक्साई चीन में लद्दाख से सटी पूरी एलएसी के उन महत्वपूर्ण इलाकों में घुसपैठ कर फौज को बिठा दिया है जो पिछले कई सालों से दोनों के बीच विवाद का कारण बने हुए हैं। फिलहाल भारतीय सेना इस पर खामोशी अख्तियार किए हुए थी।