" /> यूपी पुलिस की पहुंच से दूर निकला दुबे?

यूपी पुलिस की पहुंच से दूर निकला दुबे?

६ दिन बीत गए पर कानपुर पुलिस नरसंहार कांड का मुख्य आरोपी विकास दुबे अब भी पुलिस को छका ही रहा है। गत ६ दिनों में ५ बार बढ़ी उसकी इनामी राशि भी इसी ओर इशारा कर रही है कि पुलिस के लिए दूबे अभी दूर है। ५ दिनों में ₹५० हज़ार से ५ लाख तक पहुंची दुबे की इनामी राशि यही साबित करती है कि यूपी पुलिस दुर्दांत दुबे को लेकर अब भी क्लूलेस ही है। उसे एक अदद सुराग की शिद्दत से तलाश है। दुबे को दबोचने का फ़िलहाल तो कोई रास्ता उसके सामने नहीं है। दुबे गैंग के छोटे-मोटे बदमाशों का एनकाउंटर और धरपकड़ करने व दुबे की मुखबिरी करने वाले पुलिस वालों पर मामला दर्ज करने से आगे गत ५ दिनों में यूपी पुलिस के नाम कोई बड़ी उपलब्धि दर्ज नहीं हो पाई है। उस पर दुबे को लेकर मिले ताजा सुराग के आधार पर हरियाणा में हुई छापेमारी ने तो यह भी साफ कर ही दिया है कि वह यूपी से शायद दूर निकल चुका है। यूपी पुलिस के हाथों से लगभग सरक ही चुका है। लिहाजा चिंता की बात यह कि यदि वह यूपी से निकलकर सीमावर्ती राज्य हरियाणा पहुंच सकता है तो फिर सीमावर्ती देश नेपाल क्यों नहीं? यदि ऐसा हुआ तब तो मामला यूपी पुलिस के हाथ से भी दूर ही निकला समझो!
कानपुर कांड के बाद से लगातार खबरें आ रही थीं कि विकास दुबे उत्तरप्रदेश की सीमा पार कर चुका है। कभी खबर आई कि वो मध्यप्रदेश में है, कभी आई कि वो दिल्ली पहुंच गया है, तो कभी कयास लगाया गया कि वो नेपाल भाग सकता है। लेकिन इन सबके बीच कल जब दुबे को लेकर हरियाणा में फरीदाबाद पुलिस ने छापेमारी की तो दुबे के उत्तर प्रदेश से निकलने की खबरों को पुख्ता आधार मिल गया। पुलिस उस घर के दरवाजे तक पहुंची तो जहां दुबे दुबका था पर वो वहां से भी चकमा देकर भाग निकला। फरीदाबाद पुलिस को दुबे तो नहीं मिला पर उसके द्वारा इस्तेमाल की गई एक पिस्टल, पुलिस से चुराई गई एक अन्य पिस्टल और उसकी मदद करनेवाले तीन सहयोगी जरूर मिल गए। हो सकता है अब पुलिस को इन्हीं से दुबे की दोबारा दबिश के लिए कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल जाए, क्योंकि माना भी जा रहा है कि दुबे दो-तीन दिन हरियाणा में ही रुका था। एक होटल के सीसीटीवी की तस्वीरें भी इस ओर इशारा करती हैं। इस बीच २४ घंटों के घटनाक्रम के तहत यूपी पुलिस के नाम उपलब्धि के तौर पर दुबे गैंग के एक इनामी बदमाश अमर दुबे का एनकाउंटर, दूसरे इनामी बदमाश श्यामू वाजपेई की जिंदा पकड़, चौबेपुर थाने के सभी ६८ पुलिसवालों को लाइन हाजिर करना व दुबे की मुखबिरी के आरोप में निलंबित दो पुलिस वालों को गिरफ्तार करने समेत एक संदिग्ध एसएसपी का तबादला दर्ज हो चुका है।

हर दिन टेंशन डबल

इन दिनों इंडियाज मोस्ट वांटेड अपराधी विकास दुबे की इनामी राशि जिस तरह हर दिन डबल होती जा रही है, उससे साफ है कि दुर्दांत दुबे की वजह से हर दिन यूपी पुलिस का टेंशन भी डबल हो रहा है। पुलिस पर दुबे को जिंदा या मुर्दा पकड़ने का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। हो सकता है इसी दबाव में आनेवाले दिनों में यह राशि फिर डबल होकर रु. १० लाख तक पहुंच जाए। वैसे भी जब तक पुलिस को दुबे के खिलाफ कोई पुख्ता सुराग नहीं मिलता, तब तक उसे ऐसे ही उपायों पर केंद्रित होना पड़ेगा। अन्यथा दुबे की पकड़ के लिए बनाई गईं तमाम जांच टीमें यूं ही अंधेरे में हाथ-पैर मारती रहेंगी। खैर, इस कांड से कम-से-कम एक काम तो सकारात्मक हो ही रहा है, जिसमें पुलिस दुबे के साथ गठबंधन रखनेवाले तमाम अधिकारियों को गंभीरता से खोज रही है, उनके कनेक्शन जांचे जा रहे हैं, उनके कार्यालयों के कंप्यूटर सिस्टम सीज किए जा रहे हैं और उन तमाम पुलिस वालों के मोबाइल को सर्विलांस पर रखकर उनका सीडीआर निकाला जा रहा है, जो दुबे से सहानुभूति रखते थे। यहां सवाल यह उठता है कि यह ‘सफाई कार्यक्रम’ सीमित क्यों? इस काम को भी सीमित न रखकर विस्तारित करना चाहिए और हर उस पुलिसवाले की जांच होनी चाहिए जो किसी-न-किसी अपराधी से मधुर संबंध रखता है। तभी यूपी का भविष्य सुरक्षित रह सकेगा। खैर, यह अच्छी बात है कि यूपी पुलिस दावा कर रही है कि पुलिस वालों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी, परंतु केवल विकास के विनाश से काम नहीं बनेगा, जब तक पूरे प्रदेश से अपराध की जड़ें साफ नहीं होतीं तब तक ‘विकास दुबे’ पैदा होते ही रहेंगे। इसलिए पुलिस का प्रण अब ऐसा होना चाहिए जिससे दोबारा कोई अपराधी ऐसी हिम्मत न करे, कोई पुलिस वाला व्यर्थ शहीद न हो और किसी आला पुलिस अधिकारी को जन भावनाओं को शांत कराने के लिए ऐसी शपथ न लेनी पड़े।

अपराध चेक-मेट होना ही चाहिए

कानपुर कांड के बाद अब शासन-प्रशासन को पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाने का काम गंभीरता से करना पड़ रहा है। सरकार का कोई मंत्री किसी शहीद के घर सहायता राशि का चेक लेकर पहुंच रहा है तो आला पुलिस अमला शोकाकुल परिजनों के पास दुबे को चेक-मेट करने का वादा। जिस तरह पुलिस ने इस कांड को गंभीरता से लिया और इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया है, उससे लग तो रहा है कि विकास दुबे गैंग को अपने किए के लिए पछतावा जरूर होगा। जैसा कि एडीजी प्रशांत कुमार दावा भी कर चुके हैं। यह शायद उनके उस दावे का ही असर हो, जिसमें दूसरों को बेरहमी से मारनेवाले अपनी जिंदगी के लिए दर-दर भटक रहे हों। अमर दुबे वही है जिस पर विकास की सुरक्षा के लिए किसी को भी मारने का जिम्मा रहता था पर इस जघन्य कांड के बाद जब उसकी खुद की जान खतरे में आई तो वो भागकर अपने किसी रिश्तेदार के घर पहुंचा। शरण देने के लिए गिड़गिड़ाया पर उसे शरण नहीं मिल सकी, मिली तो मुठभेड़ के बाद जमीन पर पड़ी उसकी गीली पेंट में लाश। हालांकि मुस्तैदी का यह कदम पुलिस ने यदि उस रात ही उठा लिया होता जब विकास दुबे बेरहमी से पुलिस वालों को मार रहा था और उसकी जानकारी शहीद होने से पहले सीओ ने पुलिस को दे भी दी थी तो तस्वीर अलग होती। उस रात सूचना मिलते ही वायरलेस संदेश पूरे प्रदेश में पहुंच चुका था, उसके बावजूद दुबे न केवल अपने घर से, अपने जिले से, बल्कि यूपी से सुरक्षित निकल पाने में कामयाब हो गया। एक दुर्दांत अपराधी द्वारा किए गए किसी जघन्य कांड की जानकारी समय से मिलने के बावजूद वो कैसे प्रदेश की सीमा लांघ लेता है, खासकर वायरलेस एलर्ट के बावजूद? इस पर प्रशासन को विचार करना होगा क्योंकि ऐसा तब हुआ है जब कोरोना लॉकडाउन की वजह से चप्पे-चप्पे पर पुलिस की सतर्कता थी।
आज यह साफ है कि विकास दुबे चाहे जहां हो, वो अब यूपी में नहीं है, वो यूपी की सीमा पार कर चुका है या एनसीआर में कहीं छिपा बैठा है, जो मौका मिलते ही देश से बाहर भागने की कोशिश भी कर सकता है। शायद इसी के लिए उसके लोगों की ओर से ‘सरेंडर करने की अफवाह’ उड़ाकर पुलिस को भ्रमित करने का प्रयास हो रहा हो। सच्चाई जो भी हो पर पुलिस को फिलहाल तो यही कामना करनी चाहिए कि वो चाहे देश के किसी राज्य में हो पर कम-से-कम नेपाल न भागा हो। क्योंकि यदि एक बार वो नेपाल निकल गया तो फिर उसे वापस लाने में तमाम दिक्कतें पेश आ सकती हैं। तब उसे वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सहारा लेना पड़ेगा। देश के किसी कोने में उसे पकड़ना जितना आसान है उतना विदेशी धरती से वापस लाना नहीं। खासकर उन परिस्थितियों में जब नेपाल और उसके वर्तमान प्रधानमंत्री के दिल में हिंदुस्थान के प्रति कूट-कूट कर नफरत भरी हो और वह हर वक्त और हर हाल में हिंदुस्थान से संबंध बिगाड़ने पर उतारू हों।