" /> महाकाल मंदिर में शुभम नाम से दबोचा गया दुबे

महाकाल मंदिर में शुभम नाम से दबोचा गया दुबे

दुर्दांत गैंगस्टर विकास दुबे पूरी नौटंकी के साथ अंततः मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल दर्शन करने के बाद धर लिया गया। विकास दुबे को सबसे पहले मंदिर के पास एक फूल बेचनेवाले सुरेश कहार ने देखा। विकास दुबे के पास जो आईडी मिली उसपर उसका नाम शुभम लिखा हुआ था।
सुरेश ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया कि उसे देखने पर शक हो गया था कि यह विकास दुबे हो सकता है। उसने वहां ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को इसकी जानकारी दी। वहां एक महिला सुरक्षा कर्मी थी जिसने गूगल पर दुबे की फोटो खोजी और उससे विकास दुबे के चेहरे का मिलान किया। सुरेश कहार के अनुसार जब उन्हें यह पक्का विश्वास हो गया कि यह विकास दुबे ही है, तब कहीं जाकर मंदिर के सुरक्षा कर्मियों ने उसे पकड़ा।
मंदिर में तैनात उस वक्त सिक्योरिटी एजेंसी के इंचार्ज प्रेम शंकर दुबे के अनुसार विकास दुबे के पैर में, हाथ में और सिर में चोट थी। जब वह दर्शन करने आया तब सुरेश कहार ने सिक्योरिटी टीम को इसकी सूचना दे दी। उसे लगा कि यह विकास दुबे होना चाहिए। जूते और बैग उसने बाहर ही जमा करवाए। ढाई सौ रुपए की रसीद ली, दर्शन किए। तब तक कंट्रोल रूम से नजर रखी जाती रही। जब विश्वास हो गया कि यह वही है, तब जाकर उसको एग्जिट गेट के पास पकड़ा गया। उसे बैठाया, उससे बात की। पुलिस को भी बुला लिया क्योंकि वह बहुत बड़ा अपराधी था। उसके पास शुभम नाम की आईडी थी। इसके अलावा उसने नवीन पाल नाम की आईडी भी शुरू में मंदिर में दिखाई थी। उसने पहले अपना नाम शुभम बताया। उसका मोबाइल नंबर पूछा। जब उसके बताए मोबाइल नंबर को ट्रूकॉलर पर देखा तो उसमें विकास दुबे आया। तब कंफर्म हो गया। मोबाइल उसके पास नहीं था। पुलिस चौकी से और बल साथ में गया और थाने पर ले जाकर उसे जमा कर दिया। वहां पर बैग भी दे दिया। इस बैग में वह काला शर्ट भी निकला है जिसे फरीदाबाद से भागते समय विकास दुबे ने पहन रखा था। उस जैसे खतरनाक गैंगस्टर को एक फूल बेचनेवाले सुरेश कहार की पैनी नजरों ने बेध डाला और उसकी सूचना पर वहां के सुरक्षाकर्मियों ने दुबे को पकड़ लिया। फिर उज्जैन पुलिस उसे आसानी से अपनी चौकी में ले गई, जहां उसने खुद ही कबूला कि हां, मैं ही विकास दुबे हूं कानपुर वाला।