" /> धरती हो रही है कमजोर, रेडिएशन का खतरा बढ़ा संचार हो सकता है प्रभावित

धरती हो रही है कमजोर, रेडिएशन का खतरा बढ़ा संचार हो सकता है प्रभावित

क्या आप जानते हैं कि हम जिस धरती पर रहते हैं, वह कमजोर हो रही है? इस धरती की जान है इसकी ‘मैग्नेटिक फिल्ड’ यानी ‘चुंबकीय शक्ति’। अपनी चुंबकीय शक्ति के कारण ही धरती अंतरिक्ष में अपनी जगह टिकी हुई है और अंतरिक्ष से आनेवाले खतरनाक रेडिएशन से हमें ये बचाती है। मगर ‘नासा’ ने खुलासा किया है कि धरती की इस चुंबकीय शक्ति में कमी आ रही है, जिससे यह कमजोर हो रही है।
बता दें कि धरती में इस समय कुछ बेहद खतरनाक बदलाव हो रहे हैं। जमीन के एक बड़े हिस्से में धरती की चुंबकीय शक्ति कमजोर हो गई है। इसमें ९ज्ञ् की कमी आ चुकी है। अगर इस इलाके के ऊपर से विमान निकले तो उससे संपर्क स्थापित करने में दिक्कत आएगी। ये हिस्सा करीब १० हजार किलोमीटर में पैâला है। इस इलाके के ३,००० किलोमीटर नीचे धरती के आउटर कोर तक चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति में कमी आई है। अप्रâीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक करीब १० हजार किलोमीटर की दूरी में धरती के अंदर मैग्नेटिक फील्ड की ताकत कम हो चुकी है। सामान्य तौर पर इसे ३२ हजार नैनोटेस्ला होनी चाहिए थी। लेकिन १९७० से २०२० तक यह घटकर २४ हजार से २२ हजार नैनोटेस्ला तक जा पहुंची है। धरती के इस हिस्से पर चुंबकीय क्षेत्र में आई कमजोरी की वजह से धरती के ऊपर तैनात सैटेलाइट्स और उड़नेवाले विमानों के साथ संचार करना मुश्किल हो सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले २०० साल में धरती की इस चुंबकीय शक्ति में ९ फीसदी की कमी आई है। अप्रâीका से दक्षिण अमेरिका तक इस चुंबकीय शक्ति में काफी कमी देखी जा रही है। साइंटिस्ट इसे साउथ अटलांटिक एनोमली कहते हैं। धरती की चुंबकीय शक्ति की वजह से ही हम अंतरिक्ष से आनेवाली रेडिएशन से बचे रहते हैं। इसी शक्ति के सहारे सभी प्रकार की संचार प्रणालियां जैसे सैटेलाइट, मोबाइल, चैनल आदि काम कर रहे हैं। यह चुंबकीय शक्ति धरती के अंदर गर्म लोहे का बहता हुआ समंदर है। यह धरती की सतह से करीब ३,००० किलोमीटर नीचे होता है। यह घूमता रहता है। इसके घूमने से धरती के अंदर से इलेक्ट्रिकल करंट बनता है जो ऊपर आते-आते इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड में बदल जाता है। हाल में कुछ स्टडीज आई थीं कि धरती का मैग्नेटिक नॉर्थ पोल अपनी जगह बदल रहा है। यह पोल कनाडा से साइबेरिया की ओर जा रहा है। यह इसी गर्म पिघले हुए लोहे के घूमने की वजह से हो रहा है। अप्रâीका से दक्षिण अमेरिका तक के इलाके में जो मैग्नेटिक फील्ड की कमी आई है। उससे उस इलाके के ऊपर हमारी चुंबकीय सुरक्षा लेयर कमजोर हो गई है। यानी इस इलाके में अंतरिक्ष से आनेवाली रेडिएशन का असर ज्यादा हो सकता है। जर्मन रिसर्च सेंटर शोधकर्ता जर्गेन मात्ज्का ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में अप्रâीका से दक्षिण अमेरिका तक के इलाके में चुंबकीय शक्ति तेजी से कम हो रही है। जर्गेन ने बताया कि अब सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि हमें यह पता करना होगा कि धरती के केंद्र में हो रहे बदलावों से कितना बड़ा बदलाव आएगा? क्या इससे धरती पर कोई बड़ी आपदा आएगी? आमतौर पर धरती की चुंबकीय शक्ति २.५० लाख साल में बदलती है। लेकिन अभी इसमें काफी साल बाकी है।