" /> सप्तामृत लोह की गोली खाएं…मोतियाबिंद नियंत्रण में लाएं!

सप्तामृत लोह की गोली खाएं…मोतियाबिंद नियंत्रण में लाएं!

 मुझे मोतियाबिंद हुआ है। मैं इसका ऑपरेशन नहीं करवाना चाहता। आयुर्वेदिक औषधि बताएं?
– कल्याण निषाद, खार, मुंबई
मोतियाबिंद होने पर ऑपरेशन करवाना ही बेहतर रहता है। आयुर्वेद में भी मोतियाबिंद के लिए ऑपरेशन करने की सलाह दी गई है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन अब बहुत सरल व सुगम हो गया है। अत: आप चिंता न करके ऑपरेशन करवा लें। मोतियाबिंद की शुरुआत में कुछ दवाइयों का सेवन करके मोतियाबिंद को नियंत्रित किया जा सकता है। सप्तामृत लोह की एक गोली दिन में दो बार लें। त्रिफला चूर्ण एक चम्मच रात को सोते समय लें। आंखों का व्यायाम त्राटक करें। भोजन में हरी सब्जियों व फलों की मात्रा बढ़ाएं। सहिजन की सब्जीr आंखों के लिए बहुत उपयोगी है। भोजन में घी का भी प्रयोग बढ़ाएं।

 दर्द निवारक दवा खाने से शरीर पर काले-नीले धब्बे पड़ गए हैं। इससे निजात दिलाएं?
-जी. लक्ष्मी, मालाड
कुछ व्यक्तियों को दर्द निवारक दवाओं से एलर्जी हो जाती है। शरीर पर काले-नीले धब्बे पड़ जाते हैं। ये दाग एवं धब्बे खत्म नहीं होते, परंतु कुछ हद तक इन्हें फीका किया जा सकता है। सारीवा, हल्दी, संतरा छाल, गुलाब पत्र, यष्टिमधु, मंजिष्ठा प्रत्येक का चूर्ण ५०-५० ग्राम लेकर, इसको मिलाकर मिश्रण बना लें। अब इस दो चम्मच मिश्रण को दो चम्मच बेसन के साथ मिलाकर उसमें हल्का पानी मिलाकर उबटन की भांति बनाकर शरीर पर लगाकर उसे रगड़-रगड़कर साफ करें। इससे काफी हद तक धब्बों के रंग हल्के फीके पड़ जाते हैं। अनंतमूल घनवटी की एक-एक गोली, आरोग्यवर्धिनी वटी एक-एक गोली दिन में दो बार ले। महामंजिष्ठादि क्वाथ ६-६ चम्मच दो बार सम प्रमाण पानी मिलाकर खाना खाने के बाद लें। पानी ज्यादा-से-ज्यादा पीएं। साग-सब्जी व फलों का ज्यादा सेवन करें।

 मुझे कार्पेल टनल सिंड्रोम हुआ है। ऑर्थोपेडिक सर्जन ने पेन किलर तथा फिजियो थेरेपी बताया है। अब मुझे बहुत ज्यादा दर्द नहीं है और मैं पेन किलर नहीं खाना चाहता। मुझे दवा बताएं?
– महानंद मिश्र, दिवा, थाने
कार्पल टनल सिंड्रोम में सामान्यत: हाथ की कलाई में दर्द, जलन, सुन्नता और कमजोरी रहती है। यह बीमारी संधिगत वात की श्रेणी में आती है। योगराज गुग्गुल, रास्नादी गुग्गुल की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार तथा आरोग्यवर्धिनी वटी एक-एक गोली दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें। महारास्नादि क्वाथ ६-६ चम्मच समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद दो बार लें। हाथ की कलाई पर नारायण तेल की मालिश कर, उसे गर्म कपड़े या गर्म पानी से सेंक करें। यह दवा लगातार दो महीने तक लें। वैद्यकीय निरीक्षण में हाथ का व्यायाम करें और ज्यादा भारी सामान न उठाएं।

 २०११ से एचआईवी एवं हेपिटाइटिस बी का इंफेक्शन होने से एआरटी की दवाएं चल रही हैं। साइड इफेक्ट के कारण २०१८ में डॉक्टरों ने मेरी कुछ दवाएं बदलीं। मेरा सीडी४ काउंट ८९० है, दवा बताएं?
– इरफान, ठाणे
आप नियमित दवाई लेते रहें। एआरटी दवा शुरू करने के बाद उसे लाइफ लॉन्ग लेना जरूरी है। दवा को बीच में छोड़ा नहीं जा सकता। हेपेटाइटिस बी के लिए सर्वोत्तम दवा आरोग्यवर्धिनी वटी है। आप उसकी एक-एक गोली नियमित खाते रहें। हेपेटाइटिस बी के कारण भविष्य में लीवर की बीमारी, सिरोसिस ऑफ लीवर एवं वैंâसर होने की संभावना रहती है। आरोग्यवर्धिनी के हेपटोंप्रोटेक्टिव गुण के कारण भविष्य में बीमारी होने की संभावना रुक जाती है। इसके अलावा गिलोय घन अर्थात गुडूची घन की भी एक-एक गोली रोज खाएं। गिलोय शरीर की प्रतिकार शक्ति को बढ़ाता है। आप संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें। संतुलित व पौष्टिक आहार अपने आप में औषधि है। संतुलित व पौष्टिक आहार से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। भागदौड़ तनाव व पर्यावरण दूषित होने से मिलनेवाले खाद्य पदार्थ आदि कई बार रोगों का कारण बन जाते हैं। खाने में नियमित दूध, घी, अंकुरित धान्य, दाल, हरी सब्जियां, फल ज्यादा-से-ज्यादा लें।

एम.डी., पीएच.डी. (आयुर्वेद) प्राध्यापक व वरिष्ठ चिकित्सक, केजी मित्तल पुर्नवसु आयुर्वेद महाविद्यालय व अस्पताल, चर्नी रोड, मुंबई-०२