" /> ‘एम्स’ दहशत फैला रहा है क्या?…विरोधियों, थोड़ा संभलकर!

‘एम्स’ दहशत फैला रहा है क्या?…विरोधियों, थोड़ा संभलकर!

राज्य में कोरोना की दूसरी लहर धावा बोल रही है इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी है। राज्य में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। राज्य में बीते चौबीस घंटों में ७ हजार नए मरीज मिले हैं। मुंबई शहर में ही ये आंकड़ा हजार के आसपास है। नागपुर, अमरावती, अकोला, बुलढाणा, वाशिम, वर्धा जिले में कोरोना तेजी से पैâल रहा है। अंतत: मुख्यमंत्री को सामने आकर सभी को कड़वी दवा का डोज पिलाना पड़ा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि लोग अनुशासन और नियमों का पालन करें। राज्य में ‘लॉकडाउन’ लगाना है या नहीं, इसका निर्णय अगले ८ दिनों में लेंगे। ‘मास्क पहनो, नियमों का पालन करो और लॉकडाउन टालो’ ऐसा आह्वान मुख्यमंत्री ने किया। पाबंदियां शिथिल किए जाने के बाद से कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसी अवस्था में राजनीति करने की बजाय सरकार तथा विरोधियों को जनता के हित का जतन करना चाहिए। एकजुट होकर काम करें, ऐसे संकेत हैं। परंतु मुख्यमंत्री द्वारा ‘लॉकडाउन’ से संबंधित चेतावनी दिए जाते ही विपक्ष के नेता दरेकर ने अलग ही बयान दिया, ‘राज्य में लोगों के बीच दहशत का माहौल तैयार मत करो। जुल्म करनेवाले शासक जैसे कार्य मत करो।’ दरेकर के इस बयान का अर्थ चंद्रकांत पाटील, देवेंद्र फडणवीस, आशीष शेलार आदि विशेषज्ञ लोगों की समझ में आया क्या? कोरोना संक्रमण की वास्तविक स्थिति बयां करना, इसे दहशत पैâलाना कहा जाए क्या? महाराष्ट्र में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन के अधिक घातक होने की जानकारी ‘एम्स’ के संचालक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दी है। इस नए स्ट्रेन के कारण ‘हर्ड इम्युनिटी’ हासिल करना और मुश्किल होने की आशंका डॉ. गुलेरिया ने जताई है। इससे पहले कोरोना के एंटीबॉडीज तैयार हुए व्यक्तियों में भी पुन: कोरोना का संक्रमण होने का खतरा है, ऐसा डॉ. गुलेरिया कहते हैं। कोरोना की वैक्सीन नए स्ट्रेन के खिलाफ अप्रभावी है। यह जो डॉ. गुलेरिया जोर देकर कहते हैं, यह दहशत पैâलाने का प्रयास है क्या? ‘एम्स’ के संचालक देश को गुमराह कर रहे हैं, ऐसा महाराष्ट्र में भाजपा के नेताओं को लगता होगा तो उन्हें दिल्ली में जाकर ‘एम्स’ की चौखट पर जोरदार आंदोलन करना चाहिए। देश के स्वास्थ्य मंत्री ही क्या प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति की चौखट पर निषेध के पत्र दिए जाने चाहिए। परंतु मुख्यमंत्री कहते हैं, लोगों को खतरा समझाकर बता रहे हैं इसलिए आलोचना करना अर्थात महाराष्ट्र की जनता से द्रोह करना अथवा उन्हें कोरोना की खाई में डुबाने जैसा है। मुख्यमंत्री ने कठोर कदम उठाए हैं। उसका स्वागत विरोधियों को क्यों नहीं करना चाहिए? जनता जितनी सत्ताधारी पक्ष की होती है, उतनी ही विपक्ष की भी होती है। लॉकडाउन के कारण छोटे व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, मेहनतकश मजदूरों की कमर टूटेगी इतना तय है। आर्थिक व्यवस्था भी धराशायी होगी ही। इसका रास्ता निकालना होगा व केंद्र को इस कार्य में मदद करने की आवश्यकता है। महाराष्ट्र जैसे राज्य को इस कार्य के लिए केंद्र से कोई विशेष आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए। ऐसा आर्थिक पैकेज मिले इसके लिए महाराष्ट्र के विपक्षी लोग भी मोदी के पास तगादा करें तो हमें आपत्ति नहीं होगी। राज्य का विपक्ष कोई पाकिस्तानी अथवा अफगानी वंश का नहीं है। वो इसी मिट्टी से जुड़ा है। इसलिए चंद्रकांत दादा, देवेंद्र फडणवीस, दरेकर, आशीष शेलार आदि लोगों को दिल्ली में ही डेरा डालकर बैठना चाहिए व राज्य की ओर से एक-दो हजार करोड़ के पैकेज के लिए लड़ते रहना चाहिए। राज्य से देश को जो भारी राजस्व मिलता है, उसका पर्याप्त बदला महाराष्ट्र को मिला तो विपक्ष को सरकार से जो काम करवाना है उसका मार्ग खुल जाएगा। आज लॉकडाउन अथवा कोरोना के कारण आर्थिक कमर टूट गई है। उसी तरह से कमर नोटबंदी के पर्व में भी टूटी ही थी। उस संकट से देश अभी तक खड़ा नहीं हुआ है। कोरोना संकट में लोगों के जीवन की रक्षा करना ही महत्वपूर्ण है इसलिए विरोधी पक्ष क्या कहेगा इसकी चिंता किए बगैर मुख्यमंत्री ने कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। नासिक, पुणे जैसे शहरों में रात्रि की संचारबंदी लागू कर दी गई है। प्रमुख मंदिरों को भी कठोर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन, मोर्चा न निकालें ऐसा निर्देश दिया गया है। लोकल ट्रेनें शुरू हो गई हैं, उसमें मास्क लगाए बिना यात्री चढ़ते हैं। बीच के दौर में समझदार लोगों ने भव्य स्वरूप में विवाह समारोहों का आयोजन किया। वहां भी अनुशासन भंग किया गया। अनुशासन भंग करने में सर्वपक्षीय प्रमुख लोग शामिल थे इसलिए जनता को तो क्या आदेश दिया जाए? कोरोना किसी को छोड़ता नहीं है इसलिए उसने स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे को भी जकड़ लिया है। राज्य के अन्न एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल को भी कोरोना हो गया है। देशभर में पिछले चौबीस घंटों में १४,१९९ तो महाराष्ट्र में ६,९७१ कोरोना के मरीज मिले। यह वृद्धि देश में ३१ फीसदी तो महाराष्ट्र में लगभग ८१ फीसदी इतनी बढ़ी है इसलिए ये चिंता की बात है। ये इसी तरह जारी रहा और कोरोना का कहर पुन: शुरू हो गया तो परिस्थिति नियंत्रण के बाहर हो जाएगी। नहीं, यह अभी जाती हुई नजर आ रही है। ‘एम्स’ जैसे सर्वोच्च चिकित्सा संस्थान ने खतरे की आशंका से अवगत कराया है। ‘एम्स’ मतलब महाविकास आघाड़ी का घटक दल नहीं है। यह महाराष्ट्र के विपक्ष को समझ लेना चाहिए। पुन: लॉकडाउन टालना होगा तो लोगों को जिम्मेदारी से बर्ताव करना होगा। विपक्ष को भी जिम्मेदारी का भान रखना चाहिए। विपक्ष वालों कम-से-कम कोरोना संकट में तो संभलकर बर्ताव करो, बोलो। राजनीति करने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है। परंतु कोरोना ने मौका दिया तो! इसलिए सावधान रहें!!