" /> पांच जवानों का हत्याकांड…बदला लेना ही चाहिए!

पांच जवानों का हत्याकांड…बदला लेना ही चाहिए!

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए सोमवार को हमारे पांच सैनिक शहीद हो गए। यह खबर बेचैन करनेवाली है। कभी सीमा पर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी, तो कभी पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवादियों का हमला अथवा मुठभेड़ में हिंदुस्थानी जवानों की शहादत होती है, तब किसी भी देशभक्त नागरिक का खून खौले बिना नहीं रहता। फिर से सीधे युद्ध की गुंजाइश नहीं होती, छिपकर कायराना हमला होने पर हमारे जवानों को जान गंवानी पड़ती है। यह बेहद ही संतापजनक है। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में प्रशिक्षण लेकर आए आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में सिख और हिंदू धर्म के लोगों को जान से मारने का सत्र ही शुरू कर दिया है। आतंकवादियों की इन कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने के लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की धरपकड़ करने के लिए बड़ी खोज मुहिम शुरू है। हालांकि, इस शोध मुहिम में ही आतंकवादियों ने हमला किया और आतंकवादियों का पीछा करनेवाले अपने पांच सैनिकों को जान गंवानी पड़ी। पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में यह घटना घटी। हिंदुस्थान-पाक नियंत्रण सीमा के पास स्थित जंगल में तीन-चार आतंकवादी छुपे हुए हैं और आतंकवादी हमले की योजना बना रहे हैं, ऐसी सूचना सुरक्षादलों को मिलने के बाद एक क्षण भी विलंब न करते हुए एक अधिकारी के नेतृत्व में जवानों की एक टीम आतंकवादियों की खोज में जंगल की ओर रवाना हुई। आतंकवादियों को खोजते हुए हमारे जवान जैसे ही घने जंगल में पहुंचे बड़े वृक्षों के पीछे छिपे आतंकवादियों ने सैनिकों की टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा दल के जवानों ने भी इसका मुंहतोड़ जवाब देने का प्रयास किया। लेकिन इस मुठभेड़ में दुर्भाग्य से छुपकर वार करनेवाले आतंकवादी हावी हो गए। पेड़ों के पीछे छुपकर अचानक हुई इस फायरिंग ने जवानों के शरीर को छलनी कर दिया। सेना के जेसीओ स्तर के अधिकारी सहित अन्य चार जवान गंभीर जख्मी हो गए। खून से लथपथ जवानों को तत्काल सेना के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, पांच जवान शहीद हो गए। इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा दल ने अतिरिक्त टुकड़ियां भेजकर इस पूरे जंगल क्षेत्र की नाकाबंदी कर दी है। पांच जवानों के हत्याकांड को अंजाम देनेवाले आतंकवादियों को खोजकर उनके चीथड़े उड़ाए बिना हिंदुस्थानी मन शांत नहीं होगा। सुरक्षा दल के जवान अपने सहयोगियों के बलिदान का बदला लिए बिना नहीं रहेंगे। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में बार-बार ली जानेवाली जवानों की बलि और कितने वर्ष हमें सहन करनी पड़ेगी? कश्मीर में हाल ही में हिंसाचार की घटना को देखते हुए नब्बे के दशक में आतंकवादियों ने जो दहशत निर्माण की थी, उसी दिशा में फिर कहीं कश्मीर तो नहीं बढ़ रहा, ऐसी शंका निर्माण हो रही है। उन दिनों हुए राक्षसी अत्याचार के कारण हजारों कश्मीरी पंडित बाल-बच्चों के साथ कश्मीर की अपनी पूरी संपत्ति छोड़कर चले गए। पिछले पच्चीस वर्षों से वे अस्थाई राहत वैंâपों में नरक यातना भोग रहे हैं। कश्मीरी पंडितों के निर्वासन को समाप्त करने के लिए धारा-३७० रद्द की गई। जम्मू-कश्मीर के तमाम विशेषाधिकार छीन लिए जाने के बाद कश्मीर में पाकिस्तान के बगलबच्चे कुछ ज्यादा ही उछल रहे हैं। अन्य धर्म के लोग कश्मीर में कदम ही न रखें, ऐसी विकृत मानसिकता से पाकिस्तान के इशारे पर नाचनेवाले आतंकवादी कश्मीर में फिर से आतंक का वातावरण निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं। चार दिन पहले ही कश्मीरी पंडित शिक्षक और सिख धर्म की महिला प्रधानाचार्य की हत्या करने के बाद बेलगाम हुए आतंकियों ने अब सेना के पांच जवानों की बलि लेने का दुस्साहस दिखाया है। सुरनकोट की मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों का खून सूखने से पहले इस घटना का ‘पांच के पच्चीस’ ऐसा जबरदस्त बदला लेना ही चाहिए।