" /> चीन-पाक का नंगा नाच!…हिंदुस्थान क्या करेगा?

चीन-पाक का नंगा नाच!…हिंदुस्थान क्या करेगा?

हिंदुस्थान की सीमा पर अशांति है। एक तरफ चीन तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की सीनाजोरी और धक्का देना जारी है। लेकिन सरकार मस्त या सुस्त है। सीमा पर तनाव और खून-खराबा बढ़ गया है। कश्मीर घाटी में बेगुनाह लोगों को घर, स्कूल, खुली सड़कों पर गोली मारकर मार दिया जा रहा है। उसी घाटी के पुंछ में आतंकवादियों से लड़ते हुए पांच जवानों के शहीद हो जाने की खबर चिंता बढ़ानेवाली है। आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू है, यह स्वीकार है लेकिन उसमें हमारे सैनिकों की जनहानि बड़े पैमाने पर हो रही है। बांदीपोरा, अनंतनाग क्षेत्र में कुछ आतंकवादियों को मार गिराया ठीक है। लेकिन उसके बदले में हमारे पांच जवानों की बलि गई। इन आतंकवादियों का समर्थक दूसरा-तीसरा नहीं, बल्कि पाकिस्तान है। इतनी जानें जा रही हैं, ऐसे में हमने पाकिस्तान का क्या बिगाड़ लिया? यह सवाल ही है। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद पाकिस्तान की सीनाजोरी ज्यादा ही बढ़ गई है और उसके कारण कश्मीर घाटी में हिंसा बढ़ गई है। मोदी सरकार के होते हुए कश्मीर से हिंदुओं का पलायन नए सिरे से शुरू होना, ये बात भाजपा जैसी हिंदुत्ववादी झुनझुना बजानेवाली पार्टी को शोभा नहीं देती। आतंकवादियों के डर से लोग कश्मीर में रुकने के लिए तैयार नहीं हैं। अपने घर-बार, जमीन छोड़कर लोग भाग रहे हैं। इन लोगों की व्यथा को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व रक्षामंत्री को समझना चाहिए। एक ही समय पर पांच जवानों को मारा जाता है। बेकसूर हिंदू पंडितों, कर्तव्य का निर्वाह करनेवाले मुस्लिम अधिकारियों को मार दिया जाता है। उसका बदला नहीं लिया गया तो ऐसा न हो कि हमारी भूमि पर गिरा रक्त और अश्रु व्यर्थ चला जाए। अन्य देशों में ऐसी घटना होती तो वह देश अपने सैनिकों की हत्या का बदला तुरंत ले लेता। फिलहाल चुनावी मौसम न होने के कारण सर्जिकल स्ट्राइक का साहसी खेल भी नहीं खेल सकते। पाकिस्तान से घुसपैठ शुरू है और कश्मीर घाटी की स्थिति तपते पानी की तरह खदबदा रही है। ये सच है कि कश्मीर घाटी से धारा-३७० हटा दी गई है लेकिन स्थिति अभी भी ऐसी नहीं बनी है कि सेना को हटाया जा सके। देश में किसान भी सुरक्षित नहीं और जवान भी बलिदान दे रहे हैं। जो स्थिति कश्मीर में है, वही स्थिति चीन की सीमा पर भी है। पूर्वी लद्दाख में घुसे अपने सैनिकों को चीन पीछे लेने को तैयार नहीं। दोनों देशों की चर्चा की १३ बैठकें असफल साबित हुई हैं और कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दोनों देशों की सेना आमने-सामने ताल ठोंककर खड़ी हैं। उत्तराखंड के बाराहोती क्षेत्र और अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीन ने सीधे-सीधे घुसपैठ की है। यांगत्जे क्षेत्र में दोनों देशों के जवान पिछले सप्ताह आमने-सामने आ गए और गलवान वैली की तरह फिर रक्तपात की पुनरावृत्ति होती है क्या, ऐसी स्थिति निर्माण हो गई थी। ये घटनाएं बढ़ गई हैं और चीन कोई भी अनुबंध को मानने को तैयार नहीं है। चीन के अधिकारी चर्चा के लिए बैठते हैं। चर्चा में विलंब करते हैं, आखिर में उन्हें जो चाहिए वही करते हैं। कोई भी रचनात्मक सुधार को स्वीकार करने के लिए चीन तैयार नहीं। पूर्वी लद्दाख पर चीन अपना हक जताता है और चीन ने बरजोरी से एकतरफा घुसपैठ की है। चीन एक नंबर का साम्राज्यवादी है। साम्राज्यवादी होने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन सभ्यता, सुसंस्कृत चीन का दावा करनेवाले साम्राज्यवादी विचारों को गली गुंडागर्दी का घमंड है। चीन अपने विस्तार के लिए पड़ोसी देशों में आतंकवाद को समर्थन देता है। चीन नशीली दवाइयों का समर्थन करता है। चीन पड़ोसी देशों की आंतरिक कलह में अपनी नाक घुसेड़कर माओवाद विस्तार के नाम पर हथियार व वित्तीय मदद करता है। चीन ने पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान जैसे देशों का निवाला निगलकर हिंदुस्थान की जमीन पर पैर रखने की तैयारी शुरू की है व घुसपैठ कर रहा है और हम चर्चाओं के दौर गिनते बैठे हैं। पाकिस्तान कश्मीर में जो-जो खेल, खेल रहा है उसके पीछे चीन की प्रेरणा है। अफगानिस्तान में तालिबानियों ने जिस प्रकार ‘अलोकतांत्रिक’ सत्ता लाई है, उसके पीछे असली बल चीन का है। हिंदुस्थान ने इसके आगे कठोर कदम नहीं उठाए तो चीन और पाकिस्तान एक साथ आकर हमारे अस्तित्व को चुनौती देंगे। देश की राजनीतिक ईस्ट इंडिया कंपनी को इसे समझना चाहिए।