" /> ‘मिशन ब्रेक द चेन’

‘मिशन ब्रेक द चेन’

रविवार के दिन देशभर में ९३,२४९ कोरोना के मरीज पाए गए। उसमें महाराष्ट्र का आंकड़ा ५७,०७४ था। अकेले मुंबई में ११,१६३ मरीज दर्ज हुए। यह स्थिति भयंकर है। महाराष्ट्र में तो कोरोना की लहर बेकाबू हो गई है इसलिए राज्य में मुख्यमंत्री ने ‘वीकेंड लॉकडाउन’ की घोषणा की है। ३० अप्रैल तक राज्य में सख्त प्रतिबंध और शुक्रवार की रात ८ बजे से सोमवार सुबह ७ बजे तक पूर्ण लॉकडाउन किया जाएगा। लोगों के जिम्मेदारी से बर्ताव नहीं करने के कारण सरकार को ये कदम उठाने पड़े हैं। ‘मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी’, ‘मिशन बिगिन अगेन’ इन घोष वाक्यों को सरकार ने बीते कुछ दिनों में महत्व दिया। लेकिन अंतत: अब कोरोना की दूसरी लहर का कहर दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है इसलिए सरकार को एक बार फिर ‘ब्रेक द चेन’ नामक पहले वाली स्थिति में आना पड़ा। कोरोना की दूसरी लहर तेजी से पैâली है। इस लहर का प्रहार इतना जोरदार है कि गत वर्ष की न्यूनतम मरीजों की संख्या (८ हजार ३९२) से सर्वोच्च मरीजों की संख्या तक पहुंचने में सिर्फ १०८ दिन लगे। अब दूसरी लहर में २१ फरवरी के न्यूनतम आंकड़े ८ हजार ५७९ से एक लाख का आंकड़ा सिर्फ ६२ दिनों में पहुंच गया। इससे कोरोना की दूसरी लहर की तेजी कितनी भयंकर है इसका अनुमान मिल जाता है। इतना ही नहीं, बल्कि अगले १५ दिनों में इस लहर का कहर वास्तविक अर्थों में दिखेगा। ऐसे खतरे के संकेत विशेषज्ञ दे रहे हैं। इन तमाम खतरनाक संभावनाओं के बारे में सोचकर कोरोना से लड़ने के लिए नागरिकों को सज्ज होना पड़ेगा। ‘मेरा प्राण मेरी जिम्मेदारी’ इस भूमिका को अपनाना पड़ेगा। स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता भार चिंताजनक है। किसी युद्ध के मौके पर अंतत: जनता को ही सैनिक बनकर शत्रु से लड़ना होता है। वैसा ही यह युद्ध शुरू हो गया है। राज्य में मिनी लॉकडाउन घोषित करने से पहले मुख्यमंत्री ठाकरे ने राज्य के सभी विरोधी पार्टियों से चर्चा की। विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस, मनसे प्रमुख राज ठाकरे से सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। श्री फडणवीस व राज ठाकरे ने कोरोना से सामना करने के संदर्भ में सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन देने के बाद ही मुख्यमंत्री ने सख्त पाबंदियों की घोषणा की है। राज्य में निषेधाज्ञा व जमावबंदी का आदेश भी लागू किया गया है। लोग कितने लापरवाह अथवा गैर अनुशासित हैं इसका निदान बीते रविवार को महाराष्ट्र में कई जगहों पर हुआ। एक तरफ कोरोना भयानक रूप से बढ़ रहा है। उसी समय रविवार की शाम जुहू चौपाटी पर कितनी प्रचंड भीड़ उफान मारती है, इसकी तस्वीरें मुंबई के कुछ अखबारों में प्रकाशित हुर्इं। पुणे की मंडियां और बाजारों में तो पांव रखने को जगह नहीं है। पंढरपुर के उपचुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी सामने मास्क रहित अति उत्साही भीड़ देखकर अपने मुंह व नाक पर से पट्टी निकालकर भाषण देने का मोह छोड़ नहीं पाए। सामने एकत्रित भीड़ में कोरोना कुचलकर मर गया होगा, ऐसा ही ज्यादातर नेताओं को लगने लगा है। वहां पश्चिम बंगाल में भी चुनाव प्रचार की धूम देखते हुए कोरोना उसमें कुचला गया है क्या, ऐसी शंका होती है। प्रधानमंत्री मोदी ‘आप ईश्वर के अवतार हैं क्या? कौन हो आप?’ ऐसा सवाल ममता बनर्जी ने क्रोध में पूछा, जो कि सही ही है। मोदी निश्चित तौर पर ईश्वर के अवतार नहीं हैं, ऐसा होता तो उन्होंने भी जादू की छड़ी से छूमंतर करके कोरोना को परास्त कर दिया होता। परंतु हम सत्ता में बैठे हुए सामान्य मनुष्य ही हैं। इसका भान रखते हुए मोदी ने भी कोरोना की दूसरी लहर से लड़ने के लिए पांच सूत्रीय कार्यक्रम घोषित कर दिया। ६ से १४ अप्रैल तक मुहिम चलाए जाने की उन्होंने घोषणा की है। देशभर में कोरोना के बढ़ते प्रादुर्भाव तथा इस महामारी को रोकने के लिए व्यवस्था और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों का सहभाग और जनजागृति जारी रखने पर प्रधानमंत्री ने जोर दिया है। कोरोना का प्रसार रोकने के लिए उन्होंने टेस्टिंग (परीक्षण), ट्रेसिंग (नजर रखना), ट्रीटमेंट (इलाज) कोविड प्रतिबंधक सतर्कता और वैक्सीनीकरण ये पांच सूत्रों को अपनाने पर जोर दिया है। महाराष्ट्र में यह उपक्रम शुरू ही है। कोरोना के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की आवश्यकता है। महाराष्ट्र में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं। इस बारे में जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर राजनैतिक चिंता होती है, उन्हें महाराष्ट्र द्वारा वैक्सीनेशन के मामले में बनाए गए कीर्तिमान पर ध्यान नहीं देना चाहिए क्या? शनिवार को एक ही दिन में ४ लाख ६२ हजार ७३५ नागरिकों को वैक्सीन लगाकर महाराष्ट्र ने राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया। इस बारे में महाराष्ट्र की पीठ दिल्लीश्वरों को थपथपानी ही पड़ेगी। कोरोना का कहर सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि देशभर में है। महाराष्ट्र की तरह अन्य राज्यों को भी टेस्टिंग और ट्रेसिंग का पालन किया तो कई राज्यों में कोरोना के आंकड़ों की पराकाष्ठा हो जाएगी। परंतु जहां चुनाव है वहां मतों की गणना पूरी होने तक कोरोना का नाम नहीं निकालना है, ऐसा मानो आदेश ही सरकारी तंत्र को मिला है, ऐसा प्रतीत होता है। मुंबई, पुणे जैसे शहरों ने समय पर पाबंदियों को स्वीकार किया होता तो निश्चित तौर पर आंकड़ों में गिरावट नजर आई होती। यहां सरकार कमी पड़ गई, ऐसा नहीं है, बल्कि कोरोनाग्रस्तों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर मुंबई सहित राज्यभर में जंबो स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी की जा रही है। इस महामारी को रोकने के लिए ही सरकार सबकुछ कर रही है। राज्य में अब लागू की गई सख्त पाबंदियां और सप्ताह के आखिरी दिन लॉकडाउन इसी महत्व का भाग है। इस मिनी लॉकडाउन के कारण धार्मिक स्थल, सिनेमाघर, नाट्यगृह, सैलून, पार्लर, दुकान, मॉल, बाजार बंद रहेंगे। ट्रैफिक की व्यवस्था पर भी ५० फीसदी पाबंदी लाई गई है। स्कूल, महाविद्यालय बंद रहेंगे। वर्क प्रâॉम होम पर जोर देना होगा। मंत्रालय, सरकारी कार्यालयों में ५० फीसदी क्षमता से काम करेंगे। परंतु ‘मिशन ब्रेक अगेन चेन’ को सफल बनाना नागरिकों के हाथ में ही है। अंतत: यह संघर्ष जीने के लिए है, तो हर किसी को लड़ना है!