" /> महंगाई की भी जुमलेबाजी

महंगाई की भी जुमलेबाजी

केंद्र सरकार ने अब ऐसी घोषणा की है कि अगस्त महीने की तुलना में सितंबर महीने में थोक महंगाई की दर कम हो गई है। अगस्त में यह दर ५.३ फीसदी थी, तो अब ४.४५ फीसदी पर आ गई है। ये आंकड़े सरकार के ‘नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस’ द्वारा जारी किए गए हैं। अप्रैल, २०२१ के बाद यह सबसे कम दर है, ऐसा भी कहा गया है। इसके अलावा खाने-पीने की वस्तुएं सस्ती हुई हैं, ऐसा भी सरकार का दावा है। इसलिए खाद्य महंगाई ३.११ फीसदी से ०.६८ फीसदी तक गिर गई है, ऐसा भी सरकार का कहना है। अब सरकार ही कह रही है मतलब कागजी तौर पर महंगाई कम हो गई है, ऐसा ही कहना होगा। सरकारी कागजों में आंकड़ों की ऐसी बाजीगरी हमेशा ही चलती रहती है। परंतु सरकारी जानकारी और वास्तविकता में कई बार जमीन-आसमान का अंतर होता है। फिर वह आर्थिक विकास दर हो अथवा मुद्रास्फीति या महंगाई की दर। राष्ट्रीय आय हो या प्रति व्यक्ति की आय। रोजगार निर्मिति का आंकड़ा हो या गरीबी रेखा। ऐसे तमाम मामलों में सरकारी आंकड़ों की जुमलेबाजी चलती रहती है। फिर ये आंकड़े सरकार की सहूलियत के अनुसार बदलते रहते हैं। मतलब सरकारी जरूरत के अनुसार आंकड़ों के गुब्बारे में हवा भरी है अथवा निकाली है। इसका वास्तविकता से तालमेल होना ही चाहिए, ऐसा जरूरी नहीं होने से कई बार इन सरकारी आंकड़ों के बारे में सुनकर आम आदमी को ‘अकड़ी’ आने लगती है। अभी भी आम आदमी महंगाई और रोज की र्इंधन दर वृद्धि के दावानल में झुलस रहा है। इस दौरान केंद्र सरकार महंगाई दर में गिरावट आई है, खाद्य महंगाई कम हुई है, ऐसा दावा कर रही है। सब मजाक ही चल रहा है। पेट्रोल और डीजल की दर वृद्धि रोज नए कीर्तिमान बना रही है। रसोई गैस भी दर वृद्धि की रेस में पीछे नहीं है। पेट्रोल के पीछे-पीछे डीजल भी अब प्रति लीटर शतक के पार पहुंच गया है। घरेलू गैस की कीमतें एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए एक हजार रुपए की सीमा तक पहुंच गई हैं। सीएनजी और पीएनजी गैस की कीमतों में भी अब बुधवार से वृद्धि हुई है। बीते दस दिनों में यह दूसरी और आठ महीने में पांचवीं दर वृद्धि है। मतलब पेट्रोल-डीजल की तरह सीएनजी-पीएनजी गैस की दर वृद्धि का दौर भी जारी ही है। उस पर र्इंधन दर वृद्धि का सबसे ज्यादा असर कीमतों में बढ़ोत्तरी पर होता रहता है यह सामान्य गणित है इसलिए बाजार में सभी वस्तुओं की कीमतें कुछ महीनों से बढ़ ही रही हैं। खाद्य तेल ने तो बीच में दर वृद्धि का उच्चांक हासिल कर लिया था और गृहिणियों का बजट डांवांडोल कर दिया था। अन्य किराना व अनाज की कीमतों में भी वृद्धि हुई ही थी। साग-सब्जी, फल-फूल आदि भी सस्ते होने को तैयार नहीं हैं। उस पर पिछले महीने हुई बादल फटने, अति वृष्टि, बाढ़ आदि घटनाओं के कारण तैयार हो चुकी खरीफ की फसल नष्ट हो गई है। सोयाबीन, कपास, दाल, अनाज बर्बाद हो गए। केला, अंगूर, गन्ना आदि अन्य फलों के बाग भी नष्ट हो गए। साग-सब्जियां चौपट हो गर्इं, ऐसे हालात के कारण बाजार में सब्जी-फलों की कीमतें बढ़ गई हैं। दो महीने पहले कौड़ी बराबर मोल के कारण जिन टमाटरों को फेंकने की नौबत किसानों पर आई थी, वही टमाटर अब प्रति किलो ५० रुपए तक महंगा हो गया है। साग-सब्जी, अनाज, खाद्य तेल, फलों की दर वृद्धि उच्चांक पर पहुंच गई है। आम इंसान की इससे कमर टूट रही है और सरकार कहती है कि महंगाई की दर घट गई है। खाद्य महंगाई लगभग ०.६८ फीसदी पर आ गई है। यदि ऐसा होगा तो फिर बाजार में जो दर वृद्धि और महंगाई नजर आ रही है, वो क्या है? वर्तमान इंटरनेट के मायाजाल की भाषा में यह महंगाई का दावानल आभासी है और लोग, विपक्ष बेवजह इसका हौवा खड़ा कर रहा है, ऐसा केंद्र की सरकार का कहना है क्या? रोज का दिन वैâसे गुजारा जाए, पेट की आग को वैâसे शांत किया जाए, पहले ही ‘कोरोना की मार’ उस पर यह दर वृद्धि की समस्या से वैâसे पार पाएं इस उलझन से आम इंसान जूझ रहा है। सरकार सिर्फ कागजों पर कम हुई महंगाई का ‘गाजर’ खुश होकर खा रही है। आंकड़ों की लकीरें खींचकर कर ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं, का उद्घोष दे रही है। उस पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने भी इस साल हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था ९.५ फीसदी की दर से बढ़ेगी, २०२२ में हिंदुस्थान विकास दर के मामले में दुनिया को पीछे छोड़ देगा, ऐसा एक और ‘गाजर’ दिखाया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा मंगलवार को प्रकाशित किए गए नए अनुमान के तहत ऐसी भविष्यवाणी की गई है। यह भी एक तरह की आंकड़ेबाजी ही है। उस पर आंकड़ेबाजी और जुमलेबाजी यह तो केंद्र सरकार का हमेशा का ही खेल है। यह उनकी समस्या है, परंतु कम-से-कम महंगाई की जुमलेबाजी तो मत करो। सरकारी दस्तावेजों में महंगाई की दर घट गई होगी भी, परंतु असल में दर वृद्धि का आंकड़ा रोज ही बढ़ता जा रहा है उसका क्या? कागजों पर आंकड़ों का गोलमाल यह सरकार के लिए हमेशा का खेल होगा, फिर भी इस खेल में आम आदमी की जान जाएगी, ऐसा नहीं होना चाहिए। २०२२ में हिंदुस्थान की विकास दर दुनिया में सर्वाधिक होगी तो इस पर सभी को आनंद होगा, परंतु आज सामान्य इंसान को जिस प्रचंड महंगाई का चटका लग रहा है उसका क्या?