" /> राज्य में उथल-पुथल…विरोधियों को कितनी धूल उड़ानी चाहिए?

राज्य में उथल-पुथल…विरोधियों को कितनी धूल उड़ानी चाहिए?

मुंबई से हटाए गए पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने गृहमंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार और वसूली का आरोप लगाया। परमबीर सिंह ने निराधार आरोप लगाए व उच्च न्यायालय ने उन्हें उठाया है। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने देशमुख की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया। इस पर गृहमंत्री देशमुख के समक्ष नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने के अलावा और कोई रास्ता शेष नहीं बचा। देशमुख ने इस्तीफा दिया व उनकी जगह दिलीप वलसे पाटील को गृहमंत्री पद की महत्वपूर्ण जवाबदारी मिली है। वन्य विभाग के मंत्री संजय राठौड़ ने डेढ़ महीने पहले इस्तीफा दिया था। उसके पीछे-पीछे गृहमंत्री देशमुख को भी जाना पड़ा। देशमुख पर लगे आरोप गंभीर थे। इसे स्वीकार कर लें तब भी आरोपों की सत्यता क्या है? सच-झूठ सिद्ध होना है। परमबीर सिंह को उनके पद पर बरकरार रखा होता तो उन्होंने ये वसूली के आरोप नहीं लगाए होते। उनका पद ‘वाझे गेट’ प्रकरण में जाने के बाद उन्होंने यह पत्र का खेल खेला। परमबीर ने पत्र में लिखा व खलबली मचा दी। परंतु उस पत्र के सफर को देखें तो उनसे कहलाने और करवानेवाला मालिक कोई और ही है, यह अब सही लगने लगा है। शासकों को भ्रष्टाचार को उखाड़कर फेंकना ही चाहिए। इस स्वच्छता अभियान का कार्य न्यायालय ने हाथ में लिया होगा तो आनंद की ही बात है। परंतु अनिल देशमुख पर आरोपों के हवाई फायर होने के दौरान उच्च न्यायालय ने उनकी सीबीआई जांच का आदेश दिया। उसी समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा पर लगे भ्रष्टाचार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के मामलों में स्थगनादेश दे दिया है। मतलब देशमुख को अलग न्याय व येदियुरप्पा को अलग न्याय। इसे वैâसा उदाहरण माना जाए? भ्रष्टाचार आखिर भ्रष्टाचार ही होता है। राफेल सौदे में एक बिचौलिये को कुछ करोड़ की दलाली मिलने का धमाका प्रâांस के एक न्यूज वेबसाइट ने किया है। मतलब राफेल प्रकरण में कुछ तो घोटाला हुआ है। राहुल गांधी का ऐसा कहना सही है। राफेल करार पर २०१६ में हस्ताक्षर होने के बाद दसॉ नामक विमान निर्माता कंपनी द्वारा ‘डेफसीस सॉल्यूसंस’ नामक हिंदुस्थानी बिचौलिया कंपनी को ११ लाख यूरो जितनी रकम ‘नजराने’ के तौर पर दी गई। ऐसा प्रâांस के भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी द्वारा की गई जांच में मिलने की खबर ‘मीडिया पार्ट’ ने दी है। राफेल सौदे में कोई भी भ्रष्टाचार अथवा दलाली प्रकरण नहीं हुआ, ऐसा निर्णय सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले दिया था, तो किसके कहने पर? राहुल गांधी को ही भाजपा ने तब आरोपियों के कटघरे में खड़ा कर दिया। अब प्रâांस के ही अखबारों ने राफेल घोटाले का पर्दाफाश किया है इसलिए नैतिकता के मुद्दे पर इस्तीफा किसे देना चाहिए? या नैतिकता के मुद्दे पर इस्तीफा देने की जिम्मेदारी सिर्फ शिवसेना अथवा राष्ट्रवादी के मंत्रियों पर ही है? अनिल देशमुख ने इस्तीफा दिया ही है और वे अपनी न्यायालयीन लड़ाई लड़ेंगे, परंतु देशमुख प्रकरण में जिस तत्परता से सीबीआई जांच का आदेश दिया गया वो पूरा मामला अनआकलनीय है। खुद परमबीर सिंह द्वारा दायर की गई याचिका पर न्यायालय ने पूर्व पुलिस आयुक्त को कड़ी फटकार लगाई, परंतु उसी समय जयश्री पाटील की याचिका में लगाए गए उन्हीं गंभीर आरोपों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया। हमारे देश में कानून से कोई भी बड़ा नहीं है। महाराष्ट्र में तानाशाही वगैरह बिल्कुल नहीं है। परंतु कानून और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग राजनैतिक विरोधियों को मुश्किल में डालने के लिए लगातार किया जाता है, ये अब निश्चित हो गया है। महाराष्ट्र की सरकार को इस तरह से कमजोर करने के इन दांव-पेंचों में ये संवैधानिक संस्थाएं सक्रिय होती हैं, ये चिंताजनक है। महाराष्ट्र में विपक्ष रोज उठकर ‘आज इस मंत्री को डुबाएंगे, कल उस मंत्री की ‘विकेट’ गिराएंगे’, ऐसा बयान देता है। केंद्रीय जांच एजेंसियां हाथ में नहीं होतीं तो उनकी ऐसी बेसिर-पैर की बातें करने की हिम्मत ही नहीं हुई होती। राज्य को बदनाम करने का यह षड्यंत्र है। इससे पहले महाराष्ट्र में विपक्ष ने सत्ताधारियों पर आरोप लगाकर धूल उड़ाई है। कई बार मंत्री और मुख्यमंत्रियों को जाना पड़ा है, परंतु उनमें आज के विपक्ष जैसा द्वेष और जहर भरा नहीं था। विपक्ष के हाथ में सचमुच कुछ प्रमाण था इसलिए हंगामा किया। आज साबुन के बुलबुले उड़ाकर ‘बम-बम’ ऐसी दहशत निर्माण की जा रही है। महाराष्ट्र में कहीं कुछ सरसराहट हुई तो भी सीबीआई, ईडी, राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को घुसाने का मौका ढूंढना यह राज्य के विपक्ष का प्रमुख कर्तव्य ही बन गया है। राज्य की सत्ता उनको चाहिए और उसके लिए फिलहाल जो वक्त चल रहा है उसे बदलना है। इसके लिए किसी भी स्तर पर जाने के लिए विरोधी तैयार होंगे भी लेकिन सफल होंगे ऐसा लगता नहीं!