" /> अभिनेत्री को सुरक्षा; तिरंगा असुरक्षित!!…कश्मीर की हार

अभिनेत्री को सुरक्षा; तिरंगा असुरक्षित!!…कश्मीर की हार

कश्मीर में क्या चल रहा है, इस संदर्भ में शंका-कुशंकाओं को बल मिलनेवाली घटनाएं और घटनाक्रम रोज होते दिख रहे हैं। देशवासियों के मन में कश्मीर को लेकर तीव्र भावना है। कांग्रेस के काल में कश्मीर हाथ से निकल ही चुका था, उसे भाजपा ही वापस लाई है, जो ऐसा कहा जाता है यह सच होगा तो श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा लहराने का विरोध क्यों किया गया? इसका उत्तर देश को मिलना ही चाहिए। (Nation want to know!)। कश्मीर हिंदुस्थान का ही अविभाज्य अंग है, इसे साबित करने के लिए ही मोदी सरकार ने अनुच्छेद-३७० हटाकर कश्मीर के पैरों से गुलामी की बेड़ियां तोड़कर फेंक दीं। इसके लिए सभी ने उन पर शुभकामनाओं की वर्षा की। अनुच्छेद-३७० हटाकर भारत माता को खुली सांस लेने के लिए मुक्त किया। यह सब मोदी और शाह के दिल्ली में राज होने के कारण हुआ। लेकिन अनुच्छेद-३७० हटाने पर भी भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा लगभग चार दिन पहले श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहराया जा सका। लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए गए भाजपा के कार्यकर्ताओं को कश्मीर की पुलिस ने रोका और उन्हें बंदी बना लिया। यह तस्वीर क्या कह रही है? मतलब कश्मीर की स्थिति अब भी सुधरी नहीं है। जो ठीक-ठाक दिख रहा है, वह सिर्फ ऊपरा-ऊपरी मेकअप ही है। अब कश्मीर की तीन प्रमुख पार्टियां एक हो गई हैं और उन्होंने अनुच्छेद-३७० फिर से लाने के लिए लड़ाई करने की ठानी है। डॉक्टर फारूक अब्दुल्ला नामक मेंढक ने तो ‘टर्र-टर्र’ करते हुए घोषित किया कि अनुच्छेद-३७० फिर से लाने के लिए हम चीन की मदद लेंगे। यह सीधे-सीधे राष्ट्रद्रोह ही है। दूसरी है मेंढकी महबूबा मुफ्ती। उसने तो कश्मीर में तिरंगा वैâसे लहराता है, यह देखेंगे? ऐसी चुनौती दी है। इन दोनों नेताओं की भाषा अलगाव और बिखराव की है। तिरंगे का अपमान हिंदुस्थान कभी सहन नहीं करेगा। यह देश की भावना है। ५ अगस्त को संविधान की धारा अनुच्छेद-३७० को हटाकर फेंक दिया गया। तब तक जम्मू-कश्मीर में अलग निशान और अलग संविधान था तथा यह बात भारत माता के कलेजे में छुरे घोंपने जैसी वेदना दे रही थी। इन दोनों प्रावधानों के कारण जम्मू-कश्मीर हिंदुस्थान के नक्शे में होने के बावजूद हिंदुस्थान के आजाद राष्ट्र के रूप में दहाड़ रहा था। मोदी-शाह ने स्वतंत्र राष्ट्र बर्खास्त कर दिया, यह सही है। लेकिन आज भी कश्मीर में तिरंगा फहराने के लिए संघर्ष करना पड़े तो वैâसे चलेगा? अनुच्छेद-३७० हटाने के बाद भी स्थिति ‘जैसे थे’ वाली ही है और लोगों पर कई प्रकार की बंदिशें हैं। सेना का बंदोबस्त बढ़ा दिया गया है। आतंकवादी हमलों का डर बढ़ गया है। अनुच्छेद-३७० हटाते ही कश्मीरी पंडितों की घर वापसी होगी और पंडितों को उनकी जमीन-जायदाद वापस मिलेगी, ऐसा माहौल भाजपा ने तैयार किया। प्रत्यक्ष रूप में कितने पंडितों की घर वापसी हुई, इसको लेकर गड़बड़ ही है। भारतीय जनता पार्टी का काम करनेवालों की हत्या इसी काल में हुई, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अनुच्छेद-३७० के समय बाहर के लोग वहां जाकर एक भी इंच जमीन नहीं खरीद सकते थे। बाहर के लोग वहां जाकर उद्योग-व्यापार नहीं कर सकते थे। इसलिए अनुच्छेद-३७० हटाकर वहां व्यापार उद्योग बढ़ेगा, ऐसी तस्वीर पेश की गई। कुछ बड़े उद्योगपतियों ने देशभक्ति से प्रेरित होकर कश्मीर में बड़े निवेश की घोषणा भी की। लेकिन साल बीत चुका, फिर भी एक रुपए का भी निवेश नहीं हो पाया है। बेरोजगारी से त्रस्त युवा फिर से पुराने अर्थात आतंक के रास्ते की ओर निकल पड़े हैं और ‘३७०’ के प्रेमी नेता इन युवकों को भड़का रहे हैं। कश्मीर से लेह-लद्दाख को अलग कर दिया। उस लद्दाख काउंसिल का चुनाव भाजपा ने जीता और उसका विजयोत्सव भी मनाया। लेकिन मुख्य कश्मीर में तिरंगा न फहरा पाना, एक प्रकार की हार है। तिरंगा फहराने गए युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया। यह पुलिस पाकिस्तान की नहीं थी। इसी मिट्टी की थी। कश्मीर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन है अर्थात वहां दिल्ली का हुक्म चलता है। लेकिन लाल चौक पर तिरंगा फहराना अपराध साबित हो गया। फिर अनुच्छेद-३७० हटाने के बाद बदला क्या? मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर कहनेवाली डुप्लीकेट मर्दानी रानी को दिल्ली की सरकार केंद्रीय सुरक्षा का कवच देती है। उस कवच कुंडल में वह महारानी मुंबा माता का अपमान करती है। लेकिन कश्मीर में भारत माता के सम्मान में तिरंगा फहराने वाले युवकों को खींचकर ले जाया जाता है। उन लड़कों को कोई सुरक्षा नहीं और तिरंगे को भी कोई सुरक्षा नहीं। यह विचित्र है। हिंदुत्व का संबंध राष्ट्रीयत्व से है। एकाध भूमि पर तिरंगा फहराने की मनाही है। इसका सीधा अर्थ ऐसा है कि हम उस भूमि के स्वामी नहीं हैं! उस भूमि पर किसी दूसरे का हुक्म चल रहा है। वे हुक्मबाज या तो आतंकवादी हैं या बाहरी हैं। मुंबई में आज भी तिरंगा लहरा रहा है अर्थात यह भाग पाकियों का नहीं। जहां पाकियों की मर्जी चलती है, वहां तिरंगे का अपमान होता है। वह अभिनेत्री लाल चौक पर न फहराए जा सके तिरंगे के लिए संताप की चिंगारी उड़ाए। असली मर्दानगी और मर्दानी वहीं पर है!