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कहते हैं भगवा उतारेंगे!…प्रयास करके तो देखो!

मुंबई जीतने का निश्चय भारतीय जनता पार्टी ने किया है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा तय किया है कि इस बार मुंबई महानगरपालिका पर शुद्ध भगवा लहराएंगे। अब यह शुद्ध भगवा मतलब निश्चित तौर पर क्या मामला है? अचेत अवस्था में दिया गया यह बयान है। बिहार का चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने जीत लिया है, लेकिन उसे जीतने में उनका वैâसा दम निकला यह देश ने देखा है। बिहार चुनाव के प्रभारी हमारे देवेंद्र फडणवीस थे। इसलिए जीत का श्रेय मोदी जितना ही फडणवीस को भी जाता है। सवाल इतना ही है कि बिहार की जीत से भाजपा का निश्चित तौर पर कौन-सा झंडा पटना पर लहरा रहा है? विचारों का झंडा एक ही होता है। उसमें मिलावट होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। बिहार पर भगवा लहराएंगे अथवा भगवा फहरा दिया। ऐसा बयान भाजपा के नेताओं ने दिया था, ऐसा याद नहीं आता है। क्योंकि भगवा से उनका वैसे कोई संबंध नहीं है। शिवसेना से युति होने के बाद उनका भगवा से संबंध जुड़ा। भाजपा, शिवसेना के साथ नहीं थी तब से मुंबई पर भगवा लहरा रहा है। यह भगवा शुद्ध तेजस्वी और प्रभावी है। इससे अलग भगवा अस्तित्व में है, ऐसा महाराष्ट्र को नहीं लगता है। यह भगवा छत्रपति शिवराय का ही है। अब भाजपा में कोई शिवाजी की बराबरी में तैयार हो गया होगा और उन्होंने उनका अलग भगवान तैयार किया होगा तो यह उनकी समस्या है। शिवराय के सातारा व कोल्हापुर की गद्दी के वंशज भाजपा में शामिल कर लिए हैं लेकिन भगवा का स्वामित्व मराठी शिवराय की प्रजा के पास मतलब महाराष्ट्र भूमिपुत्रों के पास ही है। यही भगवा मुंबई पर पचास वर्षों से लहरा रहा है। यह भगवा उतारकर अलग झंडा लहराना महाराष्ट्र से और छत्रपति शिवराय से छल होगा। मुंबई महानगरपालिका पर भगवा उतारने की बात करना मतलब मुंबई पर से महाराष्ट्र का अधिकार नकारने जैसा ही है। मुंबई महानगरपालिका पर लगे भगवे को निशाना बनाएंगे, ऐसा कहना मतलब भूमिपुत्रों से मुंबई का नाता तोड़ने जैसा ही है। भगवा उतारना, मतलब मुंबई को पुन: पूंजीपतियों का निवाला बनाकर भूमिपुत्रों, श्रमिक, मजदूरों को गुलाम बनाने जैसा ही है। मुंबई पर से भगवा उतारने की बात करना मतलब १०५ मराठी शहीदों से सीधे-सीधे बेईमानी है। छत्रपति शिवराय के त्याग, उनके हजारों-लाखों मावलों, महाराष्ट्र निर्माण के काम आए मर्द भूमिपुत्रों के खून से यह भगवा सिंचा हुआ है। दिल्ली के अजगरी जबड़े से मुंबई को मुक्त कराने के लिए भूमिपुत्र गोलियों, लाठियों की परवाह न करते हुए सड़क पर उतरे। उनके रक्त के तेज से ही यह भगवा सूर्य तेज को आह्वान देता रहता है। इस मराठी अस्मिता के, हिंदू तेज के असली भगवा को उतारने की कपट-साजिश जो कर रहे हैं, वे देश के प्रखर हिंदुत्व का अपमान कर रहे हैं। उन्हें मुंबई महानगरपालिका पर से भगवा राजनीतिक स्वार्थ के लिए उतारना है। लानत है ऐसी ओछी सोचवालों पर! महाराष्ट्र की मिट्टी से ऐसे कोयलों का उपजना और भगवे को कलंक लगे, इस जैसा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है? भगवा यह दुनिया भर में एक ही है, वह, मतलब शिवराय के महाराष्ट्र की अस्मिता का ही! जब बेलगांव की महानगरपालिका पर से भाजपा के ही लोगों ने भगवा उतार दिया था, उस समय वो सभी किस बिल में छिप गए थे, जिन्हें मुंबई महानगरपालिका पर के भगवा की चिंता सता रही है। बेलगांव महापालिका पर का भगवा शुद्ध और स्वाभिमानी नहीं था क्या? बेलगांव में मराठी लोगों को रास्ते पर रौंदा जाता है उनके कंधे पर का भगवा कानड़ी सरकार पैरों तले रौंदती, कुचलती है, तब क्रंदन करनेवाले उस भगवा के लिए इनका मन क्यों नहीं गरजता है? बेलगांव के मराठी लोगों के हाथ में जो भगवा है, वही भगवा मुंबई महानगरपालिका पर महाराष्ट्र के स्वाभिमान के प्रतीक के तौर पर लहरा रहा है। यह भगवा किसी को उतारना है क्या? मुंबई महानगरपालिका भूमिपुत्रों के अभिमान, स्वाभिमान की प्रतीक है। जब तक मनपा पर भगवा है, तब तक महाराष्ट्र दुश्मनों के पाशवी हाथ मुंबई की गर्दन तक नहीं पहुंच सकते हैं। मुंबई को पूंजीपतियों की बुटीक बनने से रोकने का काम इसी तेजस्वी भगवे ने किया है। मुंबई पर से भगवा उतारने का सपना जिन्होंने देखा, वे राजनीति और सार्वजनिक जीवन से हमेशा के लिए नेस्तनाबूत हो गए। बाला नातू और चिंटू पटवर्धन इन पेशवाओं ने लालमहल पर से भगवा उतारकर अंग्रेजों का यूनियन जैक लहराया था। भगवा को नीचे उतारते समय टोली के चेहरे पर एक प्रकार का आसुरी आनंद दिख रहा था। भगवा उतरते देखकर, समस्त पुणेकर, देश दुख से गर्दन झुकाकर तड़प रहा था लेकिन कुछ लोग अति आनंद से मदहोश हो गए थे। इस मदहोश टोली के वारिसों को मुंबई महानगरपालिका पर से भगवा उतारने की कुबुद्धि सूझी होगी तो उस कुबुद्धि का मकबरा बनाकर मुंबई की जनता उस पर भी भगवा लहरा देगी। मुंबई महानगरपालिका पर का भगवा महाराष्ट्र की अस्मिता का तेज है। भूगर्भ में प्रचंड उथल-पुथल उत्पन्न करके पृथ्वी के तप्त अंत:करण से लावा बाहर निकला और शांत हो गया। उसी से सहयाद्रि का जन्म हुआ। उसी उथल-पुथल से मुंबई का जन्म हुआ। मुंबई मतलब सदैव खौलनेवाली अग्नि है। इस अग्नि का रंग भगवा है। भगवा शुद्ध ही है।भगवा को हाथ लगाओगे तो जलकर खाक हो जाओगे। इतिहास के पन्ने-पन्ने में यह दर्ज है। मुंबई महानगरपालिका पर नई ईस्ट इंडिया कंपनी का ‘यूनियन जैक’ फहराने की बात करनेवालों को यह भूलना नहीं चाहिए।