एलिफेंटा का एरियल कॉरिडोर-शिवड़ी से बनेगा रोपवे

मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया से कुछ किलोमीटर दूर समुद्र पार नजर आनेवाला एलिफेंटा पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। वर्तमान में वहां पहुंचने के लिए गेटवे से बोट में जाना पड़ता है लेकिन सब कुछ ठीक रहा तो आनेवाले कुछ सालों में लोग एलिफेंटा जाने के लिए एरियल कॉरिडोर का लुत्फ उठा सकेंगे। यह एरियल कॉरिडोर रोपवे होगा जो समुद्र के ऊपर से गुजरेगा। इस रोपवे का निर्माण शिवड़ी से एलिफेंटा के बीच किया जाएगा। उक्त कॉरिडोर को बनाने के लिए कई कंपनियों ने इच्छा जाहिर की लेकिन काम के निरीक्षण के लिए हेलिपैड न होने के कारण मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीपीटी) का यह ड्रीम प्रोजेक्ट अटका पड़ा था। आखिरकार सरकार ने बंदरगाह पर हेलिपैड बनाने के लिए हामी भर दी है। ऐसे में अब जल्द ही देशी पर्यटक ५०० और विदेशी पर्यटक १००० रुपए देकर इस रोपवे का आनंद ले पाएंगे।
बता दें कि एलिफेंटा द्वीप मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया से १० कि। मी। की दूरी पर स्थित है। वहां मौजूद गुफाओं में भगवान शिव की प्राचीन मूर्तियां बनी हुई हैं। इसी के साथ प्राचीन काल के शिल्पकारों की सुंदर शिल्प कलाएं भी देश, विदेश से आनेवाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। वर्तमान में वहां जाने के लिए गेटवे से नाव के माध्यम से जान होता है लेकिन जल्द ही लोग जल मार्ग की बजाय हवाई कॉरिडोर से आवागमन कर पाएंगे। एमबीपीटी को रोपवे बनाने के लिए अब तक १५० से भी अधिक सवाल इच्छुक कंपनियों ने पूछे हैं। इसमें से अधिकतर प्रश्न यह पूछे गए कि यदि निर्माण कार्य शुरू होता है तो क्या हेलिकॉप्टर से काम का जायजा लिया जा सकता है? इस प्रश्न को सुलझाते हुए सरकार ने ‘हे बंदर’ पर हेलिपैड बनाने की बात कही है जो कि रोपवे बनानेवाली कंपनी के लिए मुफ्त रहेगी। एमबीपीटी के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह रोपवे ८ किलोमीटर लंबा होगा। रोपवे से सफर लगभग १५ से २० मिनट का होगा। यदि कोई और अड़चन नहीं आई तो जल्द ही मुंबई को पहला रोपवे मिल सकता है।
रोजाना २० हजार करेंगे सफर
अधिकारियों की मानें तो रोपवे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। रोजाना लगभग २० हजार पर्यटकों के इससे सफर करने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। प्रोजेक्ट रिपोर्ट की मानें तो इस एरियल कॉरिडोर की लागत रु। ७०० करोड़ रुपए आंकी जा रही है और सालाना इससे ३७८ करोड़ रुपए की कमाई किए जाने की बात भी कही गई है।