" /> पुराने पन्नों से…  मुठभेड़ बनाम मर्डर!, ३५ साल बाद आई  फैसले की घड़ी

पुराने पन्नों से…  मुठभेड़ बनाम मर्डर!, ३५ साल बाद आई  फैसले की घड़ी

जब कोई अपराधी पुलिस के लिए सिरदर्द बन जाता है तो उसे रोकने के लिए पुलिस कई हथकंडे अपनाती है। एनकाउंटर, इन हथकंडों में अतिम उपाय होता है लेकिन अपराधियों के मुठभेड़ में मारे जाने पर हमेशा सवाल उठाया जाता है। कानपुर का बिकरू कांड और पुलिस हिरासत में बिकरू कांड के आरोपी विकास दुबे की एनकाउंटर में मौत का मामला इन दिनों देश में सुखिर्‍यों में है। तमाम संगीन अपराधों में संलिप्तता के बावजूद विकास दुबे का जमानत पर रिहा होना, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को भी हैरान कर गया। इन तमाम घटनाओं के वाबजूद पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किया जानेवाला हर एनकाउंटर सही ही होता है, ऐसा नहीं है। भरतपुर के बहुचर्चित राजा मान सिंह एनकाउंटर केस में कोर्ट द्वारा कल दिया गया पैâसला इसका प्रमाण है। एनकाउंटर के नाम पर भरतपुर के राजा मान सिंह हत्या मामले में अदालत ने १८ में से ११ आरोपियों पर दोष सिद्ध पाया है। आज अदालत इस मामले में दोषियों को सजा सुना सकती है।
यह २१ फरवरी १९८५ की घटना है। उस वक्त राजस्थान में चुनावी माहौल था। उस समय शिवचरण माथुर, राजस्थान के मुख्यमंत्री थे। एनकाउंटर से एक दिन पहले २० फरवरी १९८५ को डीग विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय उम्मीदवार राजा मान सिंह पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के हेलीकॉप्टर तथा मंच को अपने जोगा गाड़ी से तोड़ने का आरोप लगा था। इसके लिए राजा मान सिंह के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे भी कायम हुए थे। घटनावाले दिन राजा मान सिंह अपनी जोगा जीप लेकर चुनाव प्रचार के लिए लाल कुंडा के चुनाव कार्यालय से डीग थाने के सामने से निकले थे। पुलिस ने उन्हें घेर लिया था। ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी थी। घटना में राजा मान सिंह और उनके साथ जीप में मौजूद सुमेर सिंह और हरी सिंह की मौत हो गई थी। तीनों के शव जोगा जीप में मिले थे।
२३ फरवरी को राजा मान सिंह के दामाद विजय सिंह सिरोही ने डीग थाने में राजा मान सिंह और दो अन्य की हत्या का मामला दर्ज कराया। इसमें सीओ कान सिंह भाटी, एसएचओ वीरेंद्र सिंह समेत कई पुलिसकर्मी आरोपी थे। जनाक्रोश बढ़ा तो तीन-चार दिन में यह मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया। हत्या का मामला जयपुर की सीबीआई की विशेष अदालत में चला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुकदमा वर्ष १९९० में मथुरा न्यायालय स्थानांतरित हो गया। राजा मान सिंह हत्याकांड में सीबीआई द्वारा कुल १८ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दी गई है। इनमें से तीन अभियुक्त एएसआई नेकीराम, कांस्टेबल कुलदीप और सीताराम की मौत हो चुकी है, जबकि कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र सिंह को जिला जज की अदालत ने बरी कर दिया है। अब जो अभियुक्त रह गए हैं उनमें सीओ कान सिंह भाटी, एसएचओ वीरेन्द्र सिंह, कांस्टेबल सुखराम, कांस्टेबल आरएसी जीवन राम, भावर सिंह, हरी सिंह, शेर सिंह, छत्तर सिंह, पदम राम, जग मोहन, एएसआई डीग पुलिस रवि शेखर, जीडी लेखक हरि किशन, जांचकर्ता कान सिंह सिरवी, गोविंद सिंह सहायक जांचकर्ता शामिल हैं। अधिकतर अभियुक्तों की उम्र लगभग ८० के पार पहुंच गई है, जिससे उन्हें अब तारीखों पर भी आने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है जबकि सभी अभियुक्त सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। पूरे केस में ६१ गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से तथा १७ गवाह बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए, जिनमें से बहुत से गवाह चश्मदीद भी थे। तारीख पर तारीख पड़ने के बाद पैâसले की तारीख मुकर्रर हो सकी।