" /> विधायक से मुख्यमंत्री तक सभी दुखी हैं!…. नितिन गडकरी का कटाक्ष

विधायक से मुख्यमंत्री तक सभी दुखी हैं!…. नितिन गडकरी का कटाक्ष

समस्या सबके साथ है, सब दुखी हैं। मंत्री नहीं बनने से विधायक दुखी हैं। अगर आप मंत्री बनते हैं तो आप दुखी हैं क्योंकि आपको अच्छा विभाग नहीं मिला। जिन मंत्रियों के मन मुताबिक विभाग मिला है, उन्हें इस बात का दुख है कि वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और मुख्यमंत्री दुखी हैं क्योंकि उन्हें नहीं पता कि वह कब तक पद पर रहेंगे, ऐसा कटाक्ष भाजपा नेता ने नितिन गडकरी ने अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्रियों के बदले जाने पर किया। जिस तरह से भाजपा ने पिछले दिनों गुजरात और उससे पहले उत्तराखंड, कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले, उससे पार्टी शासित प्रदेशों की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्रियों में एक संदेश तो जरूर गया है कि उनकी कुर्सी कभी भी ली जा सकती है। इस बीच गडकरी ने उक्त संदेश देते हुए बड़ी बात कही है। उन्होंने आगे कहा कि मुझसे एक पत्रकार ने पूछा कि तुम इतना मजा वैâसे कर सकते हो?
मैंने कहा कि मैं भविष्य को लेकर चिंतित नहीं हूं। जो भविष्य की चिंता नहीं करता वह सुखी रहता है। वनडे क्रिकेट की तरह खेलते रहो। जब मैंने सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर से लंबे छक्के मारने का राज पूछा तो उन्होंने कहा कि यह उनके कौशल का हिस्सा है। उसी प्रकार से राजनीति कौशल है। मुख्यमंत्री भी दुखी हैं… शरद जोशी के शब्दों में सियासत की पूरी कहानी नितिन गडकरी बयां कर गए।
बता दें कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। हंसते-मुस्कुराते वह अपनी बात कह जाते हैं। यही वजह है कि पार्टी ही नहीं, विपक्ष में भी उन्हें पसंद किया जाता है। ऐसे समय में जब गुजरात ही नहीं, हाल के महीनों में कई राज्यों में भाजपा ने अचानक मुख्यमंत्री बदले हैं, गडकरी का एक वीडियो काफी चर्चा बटोर रहा है। जी हां, मंच था राजस्थान विधानसभा का और ‘संसदीय प्रणाली एवं जन अपेक्षाएं’ विषय पर चर्चा हो रही थी। गडकरी की बारी आई, वे खड़े हुए और जाने-माने व्यंग्य लेखक शरद जोशी के शब्दों में गुदगुदाते हुए नेताओं को राजनीति, अनिश्चितता और स्किल का ऐसा पाठ पढ़ा गए जो सियासतदारों के लिए बड़ा संदेश है।
यह संदेश हर उस नेता या शख्स को सुकून दे सकता है, जो अपनी स्थिति को लेकर नाराज या असंतुष्ट हैं। गडकरी ने भाजपा ही नहीं, सभी दलों के नेताओं को यह संदेश दिया कि राजनीति में जिसे जो पद, काम या मुकाम मिले वह उसमें खुश रहने की कोशिश करे।