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सब उपकार तुम्हारा है

लक्ष्यों को पाने की जिद में
जब इत उत हम भटक रहे थे
राहों ने रोड़े अटकाए
कदम हमारे अटक रहे थे
ऐसे नाजुक क्षण में हमने
हरक्षण तुम्हे पुकारा है
ताल-तलैया, नदियां-झरने
सब उपकार तुम्हारा है।
कभी हार जाने के कारण
जब भी मन में संशय उपजा
राम नाम की रट न लगी तब
और न कोई साथी दूजा
राम नाम में ही सब कुछ है
हमने यही विचारा है
ताल-तलैया, नदियां-झरने
सब उपकार तुम्हारा है।
कष्ट सभी झेलेंगे लेकिन
श्रम को कभी नहीं छोड़ेंगे
कर्मवान बनने का हम तब
सपना तेरा क्यों तोड़ेंगे
उठा-पटक में भी जीवन को
हमने खूब संवारा है
ताल-तलैया, नदियां-झरने
सब उपकार तुम्हारा है।
प्रभु ने दिया सभी कुछ लेकिन
पहले ले ली अग्निपरीक्षा
लोहे सा मजबूत बनाना
आखिर तेरी ही थी इच्छा
जब भी नाव भंवर में फंसती
तुझसे मिला सहारा है
ताल-तलैया, नदियां-झरने
सब उपकार तुम्हारा है।
-संपदा मिश्रा,
प्रयागराज