" /> बिसात पर धमाका, शतरंज ओलंपियाड पहली बार जीता हिंदुस्थान

बिसात पर धमाका, शतरंज ओलंपियाड पहली बार जीता हिंदुस्थान

हमारे देश में ऐसा कम ही हुआ है कि आधुनिक युग में हमें विश्व स्तर पर किसी खेल की टीम चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल मिला हो। ऐसे में `ऑनलाइन चेस ओलंपियाड’ में हिंदुस्थान का गोल्ड मेडल जीतना निश्चित ही अब तक की सबसे बड़ी जीत मानी जानी चाहिए। जिस देश में पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद हों और जिस खेल का जनक तक भी वही हो उसमें आज तक केवल एक बार ही कांस्य पदक जीतना, ऐसा लगता था जैसे सामने पकवान रखे हों लेकिन हम खा नहीं पा रहें हैं। इस बार चेस की अंतरराष्ट्रीय संस्था फिडे ने ओलंपियाड को कोरोना काल में आन लाइन करवाने और नए नियमों और पूर्णत: आधुनिक प्रारूप में आयोजित करवाने का एक साहसिक कदम उठाया, जिसे पूरे विश्व में सराहा गया और १६८ देशों ने इसमें भाग लिया।
हर टीम को तीन भागों में बांटा गया। पुरूष, महिला और जूनियर। इसमें भी जूनियर वर्ग में बालक बालिकाओं को अलग अलग किया गया। पुरूष और महिलाएं के दो दो मैच और एक एक मैच जूनियर बालक बालिका के लिए। ऐसे कुल छ: मैच रखे गए, जिसे दो बार खेलना था। इसमें जो टीम दोनों बार या एक बार जीतकर दूसरी बार ड्रा खेल लेगी उसे विजेता माना जाएगा। यदि दोनों टीमें एक एक बार छ: मैचों की सीरीज जीत लेगी या दोनों बार ३-३ से ड्रा हो जाएगा तो `आरमेगाडान पद्धति’ से एक ट्राइ बेकर मैच होगा जिससे विजेता टीम घोषित होगी।
हिंदुस्थान की टीम में पुरुष वर्ग के सर्वकालिक महान विश्वनाथन आनंद, पी हरिकृष्णा, कप्तान विदित गुजराती, अरविंद चिदंबरम, महिला वर्ग में विश्व रेपिड चैंपियन कोनेरू हम्पी, डी हरिका, भक्ति कुलकर्णी, वैशाली, तो वहीं जूनियर बालक में निहाल सरीन, प्रागल्भा रमेश बाबू, बालिका में दिव्या देशमुख और वंतिका अग्रवाल के रूप में बहुत मजबूत खिलाड़ियों का समावेश था। शुरू से ही हमें खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। लेकिन चेस एक ऐसा खेल है जिसमें एक गलती आपकी हार के लिए काफी होती है और वहीं टीम चैम्पियनशिप का अतिरिक्त तनाव तो था ही। यहां हिन्दुस्थान के उपकप्तान एन श्रीनाथ और कप्तान विदित ने इतनी छोटी उम्र में जिस तरह से आंनद के मार्गदर्शन में टीम के मनोबल को बढ़ाते हुए सभी खिलाड़ियों को तनावमुक्त रहते हुए अपने अपने घरों से ही मैचों को खेलते हुए प्रभावशाली प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया, वो काबिले तारीफ है।
इसमें एक नियम बहुत ही कठोर और प्रभावी था कि यदि मैच के दौरान खिलाड़ी के इंटरनेट में कोई प्राब्लम आती हैं और उसकी समय की हानि होती है तो फेडरेशन उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा और खिलाड़ी एवं टीम को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हमारे ग्रुप मैच में हमें मंगोलिया की कमजोर टीम से इसी कारण दो मैच में से एक मैच हारना पड़ा था। लेकिन हमने अपने गु्रप में सबसे मजबूत टीम चायना को हराकर अपने गु्रप में प्रथम रहते हुए सीधे अंतिम आठ में जगह बनाई थी।
यहां हमारा मुकाबला तीन बार की ओलंपिक चैंपियन अर्मेनिया से था, जिसका राष्ट्रीय खेल भी चेस ही है। हमने पहला मैच जीता परंतु अर्मेनिया ने इंटरनेट समस्या को बताते हुए हैं एक मैच के खिलाफ अपील की। जिसे अर्मेनिया की ही गलती सिद्ध होने पर निरस्त कर दिया गया। तब अर्मेनिया टीम ने अगले मैच से वाक आउट कर दिया जो कि निश्चित ही खेल भावना के विपरित था। इससे हिंदुस्थान को विजयी घोषित किया गया। सेमीफाइनल में हिन्दुस्थान को पोलैंड की शक्तिशाली टीम से भिड़ना था। पहला मैच हिंदुस्थान ४/२ से हार गया और एक बार तो यह लगने लगा कि इस बार भी हम खाली हाथ ही रह जाएंगे। लेकिन भविष्य वही लिखते हैं जो बहादुर होते हैं वाली बात को दूसरे मैच में सही साबित करते हुए हिंदुस्थान ने ४.५/१.५ की धमाकेदार जीत दर्ज की। इस जीत में लिजेंड आनंद ने अब तक के अपराजित पोलैंड खिलाड़ी ग्रैंड मास्टर डूडा को हराया। और अब पैâसला आरमेगडान पद्धति पर आकर टिक गया। इसमें सफ़ेद मोहरे वाले के पास पांच मिनट और काले मोहरे वाले के पास चार मिनट होते हैं और इसमें सफेद को जीतना आवश्यक होता है। ड्रा होने पर काले मोहरे वाले को जीता हुआ माना जाता है। हिंदुस्थान की ओर से कोनेरू हम्पी ने ऐसे तनाव वाली स्थिति में और सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में अपने जीवन की सबसे बड़ी जीत हासिल की और हिंदुस्थान को फाइनल में पहुंचा दिया। दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों ने हम्पी की इस जीत को सराहा और कहा कि ऐसे समय इतना परफेक्ट खेलना किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत ही मुश्किल काम है। लेकिन हम्पी ने तिरंगे की शान को ध्यान में रखते हुए दुनिया को बता दिया कि क्यों वे विश्व रैपिड चैंपियन हैं।
अब बचा था फाइनल और वो भी रूस की टीम से। रशिया सर्वकालिक महानतम टीम है आज तक कुछ ही सालों को छोड़कर हर बार रशिया ही ओलंपिक चैंपियन रही है। ऐसे समय चेस के वैâप्टन कूल विदित गुजराती और उपकप्तान श्रीनाथ ने सफल रणनीति बनाई और पहले मैच में आंनद की जगह विश्व नंबर तीन नैपोमिची के विरुद्ध हरिकृष्णा को खिलाया। स्कोर ३/३ से बराबर रहा अर्थात सारे मैच ड्रा हुए। हालांकि हम्पी के हाथ से जीत फिसल गई थी। अब बारी थी अगले मैच की इसमें आनंद ने काले मोहरों से खेलते हुए नेपोमिची को, विदित ने डेनियल डूबोव और हरिका ने कोस्तेनिक अलेक्जेंड्रा को बराबरी पर रोक दिया था।इस समय विश्व भर के जानकार यह मान रहे थे कि हम्पी विरूद्ध गोरियाचकिना अलेक्सेंडरा और निहाल सरीन विरूद्ध एंड्री इसिपेंको के मैच भी बराबरी पर ही छूटेंगे। परंतु दिव्या देशमुख विश्व जूनियर चैंपियन पोलिना शुवोपोवा को हराकर हिन्दुस्थान को गोल्ड मेडल जीता ही देंगी, क्योंकि दिव्या की पोजीशन निश्चित ही जीतने वाली स्थिति में थी। सारे हिंदुस्थानी शतरंज प्रेमियों की दिल की धड़कनें बढ़ चुकी थी और हर कोई इस क्षण का गवाह बनने के लिए तैयार बैठा था। परंतु तभी ग्लोबल इंटरनेट फेल हो गया और हिंदुस्थानी खिलाडियों का समय समाप्त हो गया और ४.५/१.५ से हिंदुस्थान को हारा हुआ मान लिया गया। इस अचानक हुई समस्या से सारे देशवासियों के चेहरे मुरझा गए और सब हतप्रभ हो गए कि जीती हुई बाजी वैâसे हम हारी हुई मान लें। हालांकि हम्पी का नेट थोड़ी देर बाद शुरू हो गया लेकिन तब तक वो समयाभाव के प्रेशर में आ चुकीं थीं और इसी कारण वे गलती कर बैंठी और हार गई। लेकिन निहाल सरीन और दिव्या के मैच में नेट की समस्या बनी रही और उनका पूरा समय समाप्त हो गया।
तब तुरंत हिंदुस्थान के उपकप्तान श्रीनाथ ने अपील कमिटी को इस समस्या से अवगत कराया। फिडे की टीम और अपील कमिटी ने करीब दो घंटे तक ग्लोबल इंटरनेट समस्या को जांचा परखा और हमारी टीम की अपील को सही माना और एक ऐतिहासिक पैâसला लिया कि इस पूरे मैच को निरस्त कर दिया जाए। साथ ही साथ दोनों टीमों को गोल्ड मेडल का संयुक्त विजेता घोषित किया। यह निणर्‍य सारे पहलुओं को यदि ध्यान में रखा जाए तो सर्वोचित और सर्वमान्य निणर्‍य था। इसीलिए दोनों टीमों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया। पूरे टूर्नामेंट को भी देखा जाए तो दोनों टीमें गोल्ड मेडल की हर दृष्टिकोण से हकदार थीं। ऐसी टीमों को ही ड्रीम टीम कहा जाता है। जहां हर खिलाड़ी परफेक्ट और लाजवाब हो। यह दरअसल खेल की जीत है, शतरंज की जीत है, खेल भावना की जीत है। ऐसा निर्णय लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय चेस फेडरेशन को सलाम है ।
और इस तरह हिन्दुस्थान ने वो जीत हासिल कर ली जिसका इंतजार हमें सालों से था। विशी आनंद के जीवन में भी यही एक सपना रह गया था, जिसे उनके बाद की इस पीढ़ी ने पूरा करके हिंदुस्थान के शतरंज इतिहास में सबसे बड़ी सफलता का अध्याय लिख दिया। पूरी टीम की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। केवल एक खिलाड़ी नही बल्कि देश की यह पूरी टीम अर्जुन अवार्ड की असली हकदार है। सारे खिलाड़ियों का हार्दिक अभिनन्दन और उनके सुनहरे भविष्य की शुभकामनाओं सहित सबको एक बार फिर अथाह बधाई और बधाई और बधाई….!