" /> ‘चेस द वायरस’ का यश -आदित्य ठाकरे

‘चेस द वायरस’ का यश -आदित्य ठाकरे

इन बस्तियों में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। स्थानीय धारावीकरों, मनपा प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और राज्य सरकार ने इन सभी के एकीकृत प्रयासों को मजबूत करने का काम किया। ऐसा मुंबई उपनगर के पालक मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा। आदित्य ठाकरे ने कहा कि यहां की ८० प्रतिशत आबादी ४५० सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करती है। अधिकांश आबादी बाहर के भोजन पर निर्भर है। १० बाई १० के घर में आठ से दस लोग यहां रहते हैं। इस स्थिति में शारीरिक दूरी का ध्यान रखना, रोगी को होम आइसोलेशन में रखना संभव नहीं था। ऐसे समय में ट्रेसिंग, ट्रैकिंग, परीक्षण और उपचार की अवधारणा को ‘चेस द वायरस’ पहल के माध्यम से चार स्तरों पर लागू किया गया था। ऐसा आदित्य ठाकरे ने बताया। कल्याण-डोंबिवली में कोरोना के प्रभाव की वर्तमान स्थिति की जानकारी के लिए आदित्य ठाकरे कल शनिवार को कल्याण भी आए थे। वहां उन्होंने कहा कि लोगों को स्वस्थ और फिट करना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र में कोरोना को काबू में लाने के लिए कैसे प्रयत्न किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी के लिए वे यहां उपस्थित हुए हैं, साथ ही भिवंडी, नई मुंबई, उल्हासनगर की स्थिति की जानकारी भी उन्होंने ली। उन्होंने कहा कि एमएमआर रीजन में मेडिकल इमरजेंसी व प्रशासकीय प्रतिसाद ये दो महत्वपूर्ण घटक हैं। यहां पर जंबो बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आदि आवश्यक मेडिकल जरूरत के सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
३.५ लाख लोगों की स्क्रीनिंग
इस मुहिम में ४७ हजार ५०० डॉक्टरों व नर्सों की टीम और निजी दवाखानों के माध्यम से जांच के लिए आए ३.६ लाख लोगों की स्कैनिंग की गई। प्रोटेक्टिव स्क्रीनिंग, फीवर कैंप, अर्ली डिटेक्शन, योग्य समय पर आइसोलेशन, सुसज्ज स्वास्थ्य सुविधा और क्वॉरंटाइन सेंटर्स से संक्रमण को नियंत्रण किया गया। १४ हजार ९७० लोगों का मोबाइल वैन द्वारा स्कैन किया गया। ८,२४६ वरिष्ठ नागरिकों की जांच करके सर्वे किया गया। १४ हजार लोगों को संस्थात्मक क्वॉरंटाइन किया गया।
निजी डॉक्टरों का अमूल्य सहयोग
निजी-सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करके निजी चिकित्सकों के सहयोग से मिशन के रूप में काम किया गया। मनपा स्वास्थ उपचार केंद्र के अलावा २४ निजी डॉक्टर इसके लिए आगे आए। उन्हें मनपा ने सभी व्यक्तिगत सुरक्षा के साधन उपलब्ध करा कर दिए। टेस्ट किट्स, थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर, मास्क, ग्लव्स दिए गए थे। उन्होंने घर-घर जाकर जांच की। साई अस्पताल, प्रभात नर्सिंग होम, फॅमिली केअर जैसे अस्पतालों को अधीन लिया गया। इस क्षेत्र में जगह की कमी के कारण, घरेलू आइसोलेशन पर विचार न करते हुए संस्थागत आइसोलेशन पर जोर दिया गया था। इसके लिए, स्कूलों, मंगल कार्यालयों, खेल परिसरों का उपयोग किया गया था। सामुदायिक रसोई की संकल्पना की गई। उसमें नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने की व्यवस्था की गई थी। २४/७ पद्धति से नर्सों, डॉक्टरों और चिकित्सा जनशक्ति को उपलब्ध कराकर दिया गया। मल्टीविटामिन और दवा की आपूर्ति को बनाए रखा गया था। १४ दिनों की अल्प अवधि में, २०० बेड्स का ऑक्सीजन की आपूर्ति करनेवाला एक सुसज्जित अस्पताल स्थापित किया गया था। केवल गंभीर रोगियों को धारावी से बाहर निकाला गया, जबकि ९० प्रतिशत रोगियों का इलाज धारावी के चिकित्सा उपचार केंद्र में किया गया। हाई रिस्क जोन का चयन किया गया। कोरोना योद्धा के रूप में सामाजिक नेतृत्व को इस क्षेत्र में नियुक्त किया गया था।
अनाज और भोजन के पैकेट
आइसोलेशन जोन के लोग बाहर न जाएं इसलिए मनपा ने २५,००० किराना किट और २१,००० खाद्य पैकेटों को आइसोलेशन जोन में लोगों को वितरित किया। इसके अलावा सांसद, विधायक, नगरसेवकों ने इस भाग में मुफ्त अनाज का वितरण किया।