" /> यादों के झरोखों से : आनंद! क्लासिक फिल्म, क्लासिक बातें

यादों के झरोखों से : आनंद! क्लासिक फिल्म, क्लासिक बातें

जिन लोगों ने फिल्म ‘आनंद’ देखी है उन्हें ये जानकर आश्चर्य होगा कि जब निर्माता एन.सी. सिप्पी और निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म बनाने का प्लान किया तो राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन नहीं थे बल्कि उनकी जगह किशोर कुमार और महमूद को लेकर हल्की-फुल्की फिल्म बनाने की थी। बाबू मोशाय की भूमिका महमूद को और महमूद ने ही निर्माता-निर्देशक को केंद्रीय भूमिका के लिए किशोर कुमार का नाम सुझाया था। जब ऋषिकेश मुखर्जी किशोर से मिलने उनके बंगले ‘गौरीकुंज’ पहुंचे तो चौकीदार ने उनका नाम पूछा। जब चौकीदार को पता चला कि वे बंगाली हैं और किशोर कुमार से मिलना चाहते हैं तो चौकीदार ने सख्ती से उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस हरकत से ऋषि दा ने खुद को अपमानित महसूस किया और मन ही मन निश्चय कर लिया कि ‘आनंद’ में किसी भी कीमत पर वे किशोर को नहीं लेंगे और भविष्य में कभी किशोर कुमार के साथ काम नहीं करेंगे। वास्तव में इस घटना के पीछे एक बड़ी गलतफहमी जुड़ी थी। हुआ यूं कि कुछ दिनों पहले किशोर ने एक बंगाली आयोजक के लिए स्टेज शो किया था और पूरे पैसे न मिलने के कारण बंगाली आयोजक और किशोर कुमार के बीच झगड़ा हो गया था। बड़ी मुश्किल से बीच के लोगों ने मामला सुलझाने के लिए किशोर कुमार से समय लेकर आयोजक को किशोर के बंगले पर भेजा था। लेकिन किशोर इस बंगाली आयोजक के व्यवहार से इतने नाराज हो गए थे कि वे उससे कोई बात नहीं करना चाहते थे। यही कारण था कि किशोर कुमार ने अपने चौकीदार को सख्त हिदायत दी थी कि उस बंगाली आदमी को गेट के अंदर न घुसने दे। तभी संयोगवश बंगाली आयोजक की जगह ऋषिकेश मुखर्जी पहुंचे गए और उक्त घटना घट गई और उन दोनों के बीच संबंध हमेशा के लिए खराब हो गए।
किशोर के साथ ही महमूद को भी ‘आनंद’ से बाहर कर दिया गया और राजेश खन्ना व संजीव कुमार को लेकर फिल्म बनाने की योजना तैयार की गई। राजेश खन्ना को अनुबंधित करने के बाद जब उन्हें बताया गया कि बाबू मोशाय की भूमिका के लिए संजीव कुमार के नाम पर विचार किया जा रहा है तो राजेश खन्ना ने तुरंत आपत्ति जता दी और साफ-साफ कह दिया कि संजीव कुमार ‘आनंद’ में काम करेंगे तो वे ‘आनंद’ छोड़ देंगे। वास्तविकता ये है कि संजीव कुमार एक ऐसे सशक्त अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके थे और उनके साथ बड़े-बड़े दिग्गज अभिनेता भी काम करने से डरने लगे थे। ‘आपकी कसम’ में राजेश खन्ना संजीव के साथ काम करके अभिनय के मैदान में मार खा चुके थे। राजेश खन्ना नहीं चाहते थे कि ‘आनंद’ का सारा शो संजीव कुमार लूट ले जाएं इसीलिए उन्होंने संजीव के साथ काम करने से इंकार कर दिया।
संजीव कुमार के बाद कई अभिनेताओं से ‘बाबू मोशाय’ के किरदार के बारे में बात की गई। किंतु अंत में बात अमिताभ बच्चन के साथ बनी। अमिताभ को उन दिनों फिल्मों की जरूरत थी और उन्होंने ‘आनंद’ में काम करने के लिए हामी भर दी और अनुबंध-पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया। फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद जब अमिताभ और राजेश फिल्म के प्रमोशन के लिए जिस किसी भी मंच पर जाते अमिताभ के नाम पर खूब तालियां बजतीं। जिस बात से डरकर राजेश खन्ना ने संजीव कुमार को ‘आनंद’ में काम नहीं करने दिया, वही अमिताभ बच्चन ने कर दिखाया। फिल्म की रिलीज के बाद फिल्म सुपरहिट हो गई। राजेश खन्ना की माताजी ये फिल्म देखना चाहती थीं लेकिन राजेश खन्ना ने अपने स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि ये फिल्म माताजी को न दिखाई जाए क्योंकि फिल्म ‘सफर’ के ट्रायल शो में अपने बेटे की नकली मौत भी माताजी सहन नहीं कर पार्इं और उन्हें ट्रायल के दौरान सीधे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि भविष्य में वे कभी माताजी को इस तरह की फिल्म न दिखाएं। तब राजेश खन्ना ने कसम खा ली कि मैं माताजी को अपनी मौतवाली फिल्में या सीन कभी नहीं देखने दूंगा। इस प्रकार ‘आनंद’ को सारी दुनिया ने देखा लेकिन बेटे राजेश खन्ना के प्रतिबंध के कारण उनकी माताजी फिल्म ‘आनंद’ कभी देख न सकीं।

– नरेंद्र उपाध्याय