" /> पहले पाकिस्तान, अब नेपाल, सीमा पर गोलीबारी

पहले पाकिस्तान, अब नेपाल, सीमा पर गोलीबारी

फिलहाल हिंदुस्थान-चीन सीमा पर तनावपूर्ण शांति भले ही हो लेकिन पाकिस्तान और नेपाल सीमा, उस पार से होनेवाली गोलीबारी के कारण अशांत है। पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए गोलीबारी करना आम बात है, लेकिन अब नेपाल की ओर से भी गोलीबारी की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह अधिक चिंताजनक है। पिछले महीने नेपाल के सशस्त्र बलों ने बिहार के सीतामढ़ी के एक सीमावर्ती गांव में गोलीबारी की थी। इस गोलीबारी में खेत में काम कर रहे एक हिंदुस्थानी नागरिक की मौत हो गई थी। यह घटना नारायणपुर और लालबंदी सीमा पर हुई थी। अब नेपाली पुलिस ने फिर से वैसी ही घटना को अंजाम दिया है। बिहार के किशनगंज इलाके में नेपाल सीमा पर यह घटना हुई। इस गोलीबारी में एक हिंदुस्थानी नागरिक घायल हो गया। नेपाल की ओर से एक महीने में दूसरी बार हिंदुस्थानी इलाके में अंधाधुंध गोलीबारी की गई है। इससे पहले नेपाल ने हिंदुस्थान के कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा किया था। उसने नया नक्शा बनाकर कहा कि अब इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने इसके लिए संविधान में संशोधन भी किया। फिर नेपाली सत्ताधीशों ने हिंदुस्थान विरोधी बयानों का जहर उगलना शुरू किया। यह दूसरी बार है जब हिंदुस्थानी सीमा पर गोलीबारी करके नेपाल ने साबित कर दिया है कि वो चीन और पाकिस्तान की उंगली पकड़कर ही चलेगा। एक हाथ चीनियों के हाथ में और दूसरा हाथ पाकिस्तानियों के हाथ में। फिलहाल लद्दाख सीमा पर चीन भले ही शांत हो, लेकिन नेपाल और पाकिस्तान से सीमा पर गोलीबारी करवाकर हिंदुस्थान की सीमा को अशांत बनाए रखना उसकी साजिश का हिस्सा है। नेपाल सीमा पर नेपाल द्वारा की जा रही गोलीबारी और जम्मू-कश्मीर सीमा पर पाकिस्तान की ओर की जा रही गोलीबारी इसी साजिश का हिस्सा है। १७ जुलाई को पाकिस्तानियों ने फिर से संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर सीमा पर कृष्णा घाटी सेक्टर में गोलीबारी की। इस गोलीबारी में एक बच्चे सहित तीन निर्दोष हिंदुस्थानी नागरिक मारे गए। तीनों एक ही परिवार के थे। ऐसा सालों से चल रहा है। जम्मू-कश्मीर के रिहायशी इलाकों में अंधाधुंध गोलीबारी करने और तोपें दागते रहने से पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा। हमारे सैनिक हर हमले का माकूल जवाब देते हैं। कभी वे सर्जिकल स्ट्राइक करके जबरदस्त बदला लेते हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों का खात्मा करते हैं, ये सब ठीक है, लेकिन ये सवाल तब भी बना हुआ है कि पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन करना कब रोकेगा और सीमा पार से गोलीबारी कब रुकेगी? इसे रोकने में हमारे शासक कब सफल होंगे। इस महीने की शुरुआत में कश्मीर के सोपोर जिले में एक आतंकवादी हमले में एक सीआरपीएफ जवान शहीद हो गया और अहमद खान नामक एक वृद्ध की भी मौत हो गई थी। उनके पोते आयद, जो उनके साथ थे, को हमारे जवानों ने बचा लिया था। हालांकि, अहमद खान के सीने पर बैठी आयद की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और धारा ३७० को हटाने के बाद भी कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई। यानी कश्मीर भी अशांत है और कश्मीर की सीमा भी अशांत है। वर्ष २०२० में पाकिस्तान ने अब तक २७०० से अधिक बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करके गोलीबारी की है। इसमें २१ निर्दोष हिंदुस्थानी नागरिक मारे गए और ९४ घायल हुए हैं। अब नेपाल की ओर से भी गोलीबारी होने लगी है। मतलब पहले सिर्फ पाकिस्तान ही सीमा पार से गोलीबारी करता था, अब नेपाली बंदूकों ने भी निर्दोष हिंदुस्थानियों की जान लेनी शुरू कर दी है। हम जैसे पाकिस्तान की बंदूकों को नहीं रोक पाए, वैसा नेपाल के मामले में न होने पाए। नेपाली बंदूकों की नलियों को अभी ही तोड़ देना चाहिए। अन्यथा पाकिस्तान के साथ-साथ नेपाल सीमा पर भी गोलीबारी हमेशा का सिरदर्द बन जाएगी।