लैब हुआ लफड़ेबाज!

 ७० फीसदी हैं अवैध
 पैथालॉजिस्ट के बगैर चला रहे धंधा
 सरकार ने माना लैब में फर्जीवाड़ा
 टेक्निशियन दे रहे रिपोर्ट
शहर में ७० फीसदी पैथालॉजिस्ट लैब लफड़ेबाज पाए गए हैं। इस संदर्भ में राज्य सरकार ने भी स्वीकार किया है कि पैथालॉजिस्ट अपर्याप्त हैं ऐसे में लैब टेव्नâीशियन ही लोगों की जांच करके रिपोर्ट दे रहे हैं। राज्य में १२ करोड़ लोगों के लिए केवल ३ हजार पैथालॉजिस्ट उपलब्ध हैं। वहीं महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ प्रैक्टिसिंग पैथालॉजिस्ट एंड मिक्रोबियोलॉजिस्ट (एमएपीपीएम) की मानें तो राज्य में लगभग ७० फीसदी लैब बोगस हैं। डॉक्टरों की मानें तो बोगस लैब की रिपोर्ट पर भरोसा करना यानी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करना है। इनमें बिना एमडी डिग्री के टेक्निशियन के बल पर यह अवैध कारोबार चलाया जा रहा है।
बता दें कि मुंबई, ठाणे, नई मुंबई जैसे शहर में लगभग एक हजार अवैध पैथ लैब होने की बात एसोसिएशन ने मानी है। इन लैब में लोगों के रक्त, मूत्र आदि की जांच पैथालॉजिस्ट की बजाय टेक्नीशियन द्वारा प्रमाणित कर रिपोर्ट दी जाती है। एमएपीपीएम के कार्यकारी सदस्य डॉ. प्रसाद कुलकर्णी ने बताया कि राज्य में ७ से ८ हजार बोगस लैब हैं। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट रूप से कहा था कि एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त कर पैथालॉजी और माइक्रोबायोलॉजी में एमडी डिग्री हासिल करनेवाला ही लैब चला सकता है। इसके बजाय लफड़ेबाज लैब में टेक्नीशियन या तो खुद हस्ताक्षर करते है या फिर किसी डॉक्टर को पैसे देकर उसकी डिजिटल हस्ताक्षर रिपोर्ट पर करते हैं। बोगस लैब में रिपोर्ट गलत आने का खतरा अधिक रहता है क्योंकि टेक्नीशियन के पास उतना अनुभव नहीं होता। उदाहरण के तौर पर यदि कोई मरीज एचआईवी टेस्ट के लिए बोगस लैब में जाता है। गलती से रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो उस मरीज पर क्या बीतेगी? वहीं मरीज पॉजिटिव है और रिपोर्ट नेगेटिव आई तो मरीज तो बीमारी से अनजान रह जाएगा। हाल ही में ५ डॉक्टरों को बोगस लैब से सम्मिलित पाए जाने पर कार्रवाई की गई है। विधानसभा में बोगस लैब के प्रश्न पर वैद्यकीय शिक्षण मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि बोगस लैब पर कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है व राज्य में पैथालॉजिस्ट की कमी को देखते हुए केंद्र से सीट बढ़ाने की मांग भी गई है।