" /> पुराने पन्नों से…. हताश!, जीवन से निराश हुई नलिनी

पुराने पन्नों से…. हताश!, जीवन से निराश हुई नलिनी

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का २८ साल पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे सात दोषियों में से एक नलिनी श्रीहरन द्वारा जेल में खुदकुशी की कोशिश। नलिनी पिछले लगभग २९ वर्षों से वेल्लोर जेल में बंद है। यहीं उसने गत सोमवार को कथित तौर पर आत्महत्या करने की कोशिश की। इसकी जानकारी उसके वकील पुगलेंती ने दी। बताया जा रहा है कि जेल की सेल में नलिनी का कथित तौर पर एक साथी वैâदी से झगड़ा हुआ था, जिस साथी वैâदी के साथ नलिनी का झगड़ा हुआ था वो भी उम्रकैद की सजा के लिए जेल में बंद है। उस वैâदी का सेल बदलने की बात पर जेलर से नलिनी की बहस हो गई थी, जिसके बाद नलिनी ने आत्महत्या करने की कोशिश की।

२१ मई, १९९१ को आतंकियों द्वारा अंजाम दिए गए एक आत्मघाती बम धमाके में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में लिट्टे के आतंकियों ने इस जघन्य हमले को अंजाम दिया था। इसमें नलिनी ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। घटना से करीब एक साल पहले यानी वर्ष १९९० के नवंबर महीने में श्रीलंका के जाफना इलाके में इस आत्मघाती हमले की साजिश रची गई थी। एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरन ने अपने गुप्त ठिकाने पर अपने खास सहयोगी बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरुगन और शिवरासन के साथ मिलकर इस हमले की योजना बनाई थी।

प्रभाकरन से राजीव की हत्या का फरमान लेने के बाद बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा १९९१ की शुरुआत में चेन्नई पहुंचे। बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा चेन्नई ने ईलम समर्थक शुभा सुब्रह्मण्यम के प्रिंटिंग प्रेस में काम करनेवाले भाग्यनाथन को जाल में फंसाया। राजीव हत्याकांड में सजा भुगत रही नलिनी इसी भाग्यनाथन की बहन है, जो उस वक्त एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करती थी। मुश्किल हालात में घिरे भाग्यनाथन और नलिनी को आतंकी बेबी ने अपना मोहरा बना लिया। बेबी और मुथुराजा ने अपने साथ चार लोग तो जोड़ लिए लेकिन चेन्नई में नलिनी, मुरुगन, भाग्यनाथन और शिवरासन मानव बम बनने के लिए किसी को तैयार नहीं कर पाए। अंततः प्रभाकरन ने शिवरासन को उसकी (शिवरासन) चचेरी बहनों धनू और शुभा के साथ हिंदुस्थान भेजा। शिवरासन अप्रैल की शुरुआत में धनू और शुभा को लेकर चेन्नई पहुंचा। शिवरासन ने टारगेट का खुलासा किए बिना बम एक्सपर्ट अरिवू से एक ऐसा बम बनाने को कहा जो महिला की कमर में बांधा जा सके। शिवरासन के कहने पर अरिवू ने एक ऐसी बेल्ट डिजाइन की जिसमें छह आरडीएक्स भरे ग्रेनेड जमाए गए थे। अब शिवरासन के हाथ में बम भी था और बम को अंजाम तक पहुंचानेवाली मानव बम धनू भी।
धमाके को अंजाम देने से पहले शिवरासन ने अपने टारगेट राजीव गांधी के पास लगभग ३० फीट की दूरी तक पहुंचकर रिहर्सल भी की थी। इससे संबंधित वर्ष १९९१ चेन्नई के मरीना बीच में हुई रैली का उसका वीडियो उन दिनों मीडिया में वायरल भी हुआ था। १२ मई, १९९१ को शिवरासन-धनू ने पूर्व पीएम वीपी सिंह और डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि की रैली में फाइनल रेकी की। तिरुवल्लूर के अरकोनम में हुई इस रैली में धनू, वीपी सिंह के बेहद पास तक पहुंची, उसने उनके पैर भी छुए। बस बम का बटन नहीं दबाया। इससे शिवरासन के हौसले बुलंद हो गए।
लोकसभा चुनाव का दौर था। २१ मई को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की चुनावी जनसभा थी। नलिनी के घर २० मई की रात शुभा ने धनू को बेल्ट पहनाकर प्रैक्टिस करवाई। अगले दिन श्रीपेरंबदूर में रैली में धनु अपने टारगेट के बेहद करीब थी। एक महिला सब इंस्पेक्टर ने उसे दूर रहने को कहा पर राजीव गांधी ने उसे रोकते हुए कहा कि सबको पास आने का मौका मिलना चाहिए। उन्हें नहीं पता था कि वो जनता को नहीं मौत को पास बुला रहे हैं। धनु ने माला पहनाई, पैर छूने के लिए झुकी और धमाका हो गया। यह लिट्टे का हिंदुस्थान पर सबसे बड़ा हमला था। धमाके के १८ शवों का परीक्षण किया, जिसमें एक शव राजीव गांधी का भी था।
सन् १९९८ में २६ दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के निचली अदालत के निणर्‍य से लेकर २०१६ में सात दोषियों- मुरुगन, सांथन, एजी पेरारिवलन, नलिनी, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और जयकुमार को ताउम्र जेल में रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक राजीव गांधी हत्याकांड में कई मोड़ आए। अंतत: २०१६ में यह तय हो गया कि इस मामले में किसी भी व्यक्ति को न तो फांसी की सजा दी जाएगी और न उम्रकैद की सजा काट रहे सात लोगों को ही छोड़ा जाएगा। फिलहाल नलिनी का पति मुरुगन भी राजीव गांधी हत्याकांड में जेल के अंदर बंद है। उसने अनुरोध किया है कि उसकी पत्नी को वेल्लोर जेल से पुझल जेल में शिफ्ट कर दिया जाए। वकील पुगलेंती ने कहा है कि अदालत में मुरुगन की मांग उठाई जाएगी।