" /> घाव…दोहरा आघात!…. विधवा बनी फेसबुकिया फरेबी का शिकार

घाव…दोहरा आघात!…. विधवा बनी फेसबुकिया फरेबी का शिकार

♦ तलाश रही थी भावनात्मक सहारा
♦ दोस्त बनकर आर्थिक आधार भी छीना

कहते हैं जिंदगी महज चार दिन की ही होती है, हंसी-खुशी जी लो, समय कब गुजर जाए पता भी नहीं चलता। लेकिन ये बात सिर्फ कहने भर के लिए ही होती है। ये चार दिन की जिंदगी उस समय पहाड़ जैसी भारी लगने लगती है, जब जिम्मेदारियों का बोझ किसी अकेली महिला के कंधे पर आ जाता है। उसके लिए ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि वह खुद को संभाले या परिवार को? उसे भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। कुछ घाघ, धूर्त और ठग लोग ऐसे ही मौके की तलाश में होते हैं। वे पहले से ही आहत महिला के जिस्म से तो खेलते ही हैं, उन्हें आर्थिक चपत भी लगा देते हैं। तलाक शुदा या विधवा महिलाएं खासकर ऐसे फरेबियों के निशाने पर रहती हैं। नई मुंबई में रहनेवाली एक महिला की कहानी कुछ ऐसी ही है।
सोशल मीडिया में साथी की तलाश
नई मुंबई के नेरूल में रहनेवाली शबनम (काल्पनिक नाम) के पति की मौत हो चुकी है। बच्चे और परिवार की जिम्मेदारी अकेले निभाने के दौरान वैसे तो शबनम ने खुद को कभी कमजोर दिखने नहीं दिया लेकिन हकीकत में वह खुद को बेहद तन्हा महसूस करती थी। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उसे किसी साथी की जरूरत थी। लेकिन इसी के साथ ये चिंता भी थी कि लोग क्या कहेंगे? ऐसे में ५० वर्षीया शबनम सोशल मीडिया में किसी साथी की तलाश करने लगी। इसी दौरान फेसबुक पर शबनम की दोस्ती ३५ वर्षीय डॉ. मार्को से हुई।
जन्मदिन पर ठगी का जाल
डॉ. मार्को फेसबुक पर शबनम की पोस्टों को लाइक करने लगा और उन पर अच्छे-खासे कमेंट करने लगा। दोनों ने एक-दूसरे को अपने मोबाइल नंबर भी दे दिए। फिर व्हॉट्सऐप पर दोनों के बीच सामान्य मैसेजों का आदान-प्रदान शुरू हो गया। डॉ. मार्को सुबह-शाम के अभिवादन के साथ ही छोटी-छोटी बात पर शबनम को बधाई और मुबारकबाद देने लगा। शबनम उसे एक अच्छा दोस्त मानने लगी थी। डॉ. मार्को पर विश्वास करके शबनम उसे अपनी निजी बातें भी बताने लगी।
मुफ्त के तोहफे का लालच
डॉ. मार्को ने शबनम के इसी विश्वास का लाभ उठाकर उसे लाखों रुपए का चूना लगा दिया। हुआ ऐसा कि हाल ही में शबनम का जन्मदिन था। उससे करीब ४ दिन पहले शबनम को डॉ. मार्को का मैसेज आया। डॉ. मार्को ने शबनम को मैसेज में जन्मदिन का खास तोहफा भेजने की जानकारी दी। पार्सल में स्वर्ण आभूषण, महंगी घड़ी, लेदर चप्पल, शूज, बैग और ३७ लाख रुपए होने की बात डॉ. मार्को ने मैसेज में दी। गिफ्ट स्वरूप भेजे गए पार्सल में रखे गए सामान और नकदी की फोटो, वीडियो के साथ डॉ. मार्को ने कुरियर की जानकारी भी शबनम को दी। इसके अलावा डॉ. मार्को ने शबनम से कहा कि ये पार्सल कस्टम से छुड़ाने के लिए उन्हें कुछ पैसे भरने होंगे।
फेसबुकिया फ्रेंड ने लगाया चूना
मुफ्त में लाखों रुपए का तोहफा मिलने की खुशी में शबनम मन-ही-मन हसीन सपने बुनने लगी थी। उसका विश्वास एक फोन कॉल से और पक्का हो गया। फोन करनेवाले ने अपना नाम ऋषि झा बताया और खुद को कुरियर कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने पार्सल छुड़ाने के लिए शबनम से एक खाते में २९ हजार रुपए जमा कराने को कहा। खाते में २९ हजार रुपए जमा कराने के बाद जय शाह और सुमित मिश्रा आदि अलग-अलग नामों से एजेंट शबनम को फोन करने लगे। उन एजेंटों ने अमेरिकी डॉलर में मौजूद ३७ लाख रुपए को हिंदुस्थानी मुद्रा में परिवर्तित करने के लिए शुल्क के रूप में पहले डेढ़ लाख तथा बाद में साढ़े ६ लाख रुपए अलग-अलग खातों में भरवाए। पार्सल में स्वर्ण आभूषण और ३७ लाख रुपयों की लालच में शबनम कथित खातों में पैसे जमा कराती रही। शबनम ने अपने गहने गिरवी रख दिए। उसके पास की जमापूंजी खत्म हो गई। करीब १३ लाख २९ हजार रुपए देने के बाद शबनम ने और पैसे देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद कथित डॉ. मार्को, ऋषि झा, जय शहा और सुमित मिश्रा आदि सभी का मोबाइल नंबर भी बंद हो गया।
पुलिस कर रही है जांच
खुद के ठगे जाने का एहसास होने पर शबनम ने नेरूल पुलिस थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। सोशल मीडिया में सच्चे साथी की तलाश में शबनम ठगों का शिकार बन गई। अपना सब कुछ गंवा चुकी शबनम को अब पुलिस से ही उम्मीद है।