" /> गुड न्यूज! कोरोना हार रहा है!!, मुंबईकरों में हर्ड इम्युनिटी!

गुड न्यूज! कोरोना हार रहा है!!, मुंबईकरों में हर्ड इम्युनिटी!

दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी कोरोना का घातक असर कम होता नजर आ रहा है। मुंबई में किए गए सीरो सर्वे के अनुसार स्लम एरिया में रहनेवाले ५७ प्रतिशत लोगों के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो गए हैं। यानी इन्हें कोरोना हुआ था और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। कोरोना से जूझते मुंबई के लिए यह एक राहत वाली खबर है। इससे पहले दिल्ली में कोरोना के मामलों में कमी देख ‘हर्ड इम्युनिटी’ विकसित होने की बात कही गई थी। हालांकि इसकी जांच के लिए वहां फिर से सीरो सर्वे होगा।

गौरतलब है कि हर्ड इम्युनिटी एक शारीरिक प्रक्रिया है। इसमें लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। वह चाहे वायरस के संपर्क में आने से हो या फिर वैक्सीन से। अगर कुल जनसंख्या के ७५ प्रतिशत लोगों में यह प्रतिरक्षक क्षमता विकसित हो जाती है तो इसे मेडिकल भाषा में ‘हर्ड इम्युनिटी’ कहा जाता है। फिर चार में से तीन लोग यदि संक्रमित शख्स से मिलेंगे तो उन्हें न ये बीमारी लगेगी और न वे इसे पैâलाएंगे। एक्सपर्ट मानते हैं कि कोविड-१९ के केस में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने के लिए ६० प्रतिशत लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता होनी चाहिए।
मुंबई में हुए सीरो सर्वे में कहा गया कि यहां तीन निकाय वार्डों के स्लम एरिया में रहनेवाली ५७ प्रतिशत आबादी और झुग्गी इलाकों से इतर रहनेवाले १६ प्रतिशत लोगों के शरीर में एंटीबॉडी बन गई है। इससे संकेत मिलते हैं कि कोरोना वायरस के आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक लोग पहले ही इससे संक्रमित हो चुके हैं। मुंबई में जुलाई महीने के पहले १५ दिन में तीन वार्ड आर नॉर्थ, एम-वेस्ट, एफ-नॉर्थ के झुग्गी बस्ती में रहनेवालों और दूसरे इलाकों में रहने वालों के ६,९३६ नमूने लिए गए। इसमें पता चला कि शहर में बिना लक्षण वाले संक्रमण से पीड़ित लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। मनपा ने बताया कि स्टडी में खुलासा हुआ है कि स्लम में रहनेवाली ५७ प्रतिशत आबादी और गैर झुग्गी क्षेत्रों की १६ फीसदी हर्ड इम्युनिटी विकसित हुई या नहीं, इसकी दोबारा जांच होगी।
मनपा के अनुसार यह परिणाम ‘हर्ड इम्युनिटी’ के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने में महत्वपूर्ण है। मनपा ने कहा कि इस संबंध में दूसरा सर्वे होगा जो कि वायरस के प्रसार और ‘हर्ड इम्युनिटी’ विकसित हुई या नहीं, इस पर जांच करेगा। यह सीरो सर्वे नीति आयोग, बीएमसी और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ने संयुक्त रूप से किया है।

मृत्यु दर ०.५ से ०.१० प्रतिशत
मनपा अधिकारियों का दावा है कि सीरो सर्वे का यह परिणाम इस ओर इशारा करता है कि बिना लक्षण वाले संक्रमण की दर अन्य सभी प्रकार के संक्रमण से अनुपात में ज्यादा है। मनपा के अनुसार हालांकि जनसंख्या में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में संक्रमण दर आंशिक रूप से ज्यादा है। ज्यादा संक्रमण के पीछे यहां जनसंख्या घनत्व अधिक होना एक वजह हो सकती है क्योंकि लोगों को टॉयलेट शेयर करने पड़ते हैं। सीरो सर्वे में पता चलता है कि संक्रमण से होने वाली मृत्यु दर काफी कम है और ०.५ से ०.१० फीसदी की रेंज में है।