" /> गुलाल दबा रखा है..

गुलाल दबा रखा है..

निकाल फेंको जो मन में मलाल दबा रखा है,
मुंतजिर हूं कब से हाथों में गुलाल दबा रखा है।
है उबल रहा इक ख्वाब बरसों से चूल्हे पे कहीं,
क्या हकीकत चूल्हे की क्यूं उबाल दबा रखा है।
तमन्ना है आंखों के आईने में वैâद कर लूं तुम्हें
ये कहने को अच्छा है पर खयाल दबा रखा है।
बस सवाल ही तो हैं मेरे पास तुम्हारे सवालों के,
हर सवाल पर तेरे बस इक सवाल दबा रखा है।
क्यूं निशानी मोहब्बत की घर मेरे छोड़ आई तुम,
आज भी तकिए के नीचे वो रूमाल दबा रखा है।
-प्रशांत सिंह, मुंबई