पब्जी से कष्ट है तो केंद्र सरकार कसे नकेल -हाई कोर्ट

पब्जी गेम से परेशान अभिभावकों ने आखिरकार मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वाकई में पब्जी में कोई आपत्तिजनक कंटेंट है या इससे किसी भी प्रकार का कष्ट है तो केंद्र सरकार को इस पर नकेल कसनी चाहिए।
बता दें कि पब्जी गेम के चलते बच्चे न तो पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं, न ही समय से सोते है और न ही खाते हैं। इससे अभिभावक बच्चों को लेकर चिंतित हैं। इसे देखते हुए एक ११ वर्षीय लड़के ने अपने अभिभावक के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्कूलों में पब्जी गेम पर बैन लगाने की मांग की। मुंबई हाई कोर्ट ने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए अभिभावकों को भी जिम्मेदारी का एहसास दिलाया। मुख्य जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस नितिन जमादार की खंडपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायधीश ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को महंगे मोबाइल फोन क्यों देते हैं? जिसकी वजह से वे ऐसे गेम खेलते हैं। अभिभावकों अपने मोबाइल फोन में पासवर्ड डालना चाहिए, ताकि वे गेम नहीं खेल सकें। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी स्कूल में पब्जी और मोबाइल गेम खेलने की अनुमति नहीं है। बच्चे क्या करें और उन्हें क्या करना चाहिए? यह देखने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है। इसके बाद खंडपीठ ने केंद्र सरकार को पूरे मामले का पता लगाकर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया और याचिका पर सुनवाई जुलाई तक स्थगित कर दी।