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सिर की चोट बनी काल!, दबोचा गया दुबे

उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए सबसे बड़ा वांछित अपराधी बन चुका विकास दुबे आखिरकार कानून के शिकंजे में आ चुका है। ८ पुलिसकमिर्‍यों की हत्या के मुख्य आरोपी विकास की गिरफ्तारी गुरुवार को नाटकीय अंदाज में मध्य प्रदेश के उज्जैन से हुई। महाकाल मंदिर में उसने खुद अपनी पहचान बताई कि मैं हूं विकास दुबे, कानपुरवाला। महाकाल मंदिर की सुरक्षा अधिकारी रूबी यादव ने कई अहम खुलासे किए हैं। लेडी सिंघम ने बताया कि सुबह ७.१५ बजे के करीब उनकी टीम राउंड पर थी तभी उन्हें जानकारी मिली कि एक फूलवाले ने विकास दुबे जैसे संदिग्ध को देखा है। फूलवाले ने ही हमारी टीम को कॉल किया था। फिर मैंने अपनी टीम से कहा कि जब तक हम कन्फर्म नहीं हो जाते तब तक उसको पकड़ना नहीं है। विकास दुबे बाहर घूम रहा था और कुछ भी कर सकता था। फिर हमारी टीम उसके पीछे लग गई उसने २५० रुपए का टिकट लिया और शंख द्वार से एंट्री की, तब तक हमारी टीम ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया था। जब सिर पर लगे चोट के निशान से कन्फर्म हुआ कि दुर्दांत आरोपी विकास दुबे ही है तो पुलिस को सूचना दी। इसके बाद विकास दुबे को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
लेडी सिंघम ने बताया कि फूल वाले की सूचना के बाद मैंने अपने सिक्योरिटी गार्ड से फोटो भेजने के लिए कहा, जो फोटो मेरे पास आई, उसमें उसका हुलिया बदला हुआ था। उसने बाल छोटे करा रखे थे, चश्मा और मास्क लगा रखा था और वो दुबला लग रहा था। हुलिया देखकर उसकी पहचान कर पाना मुश्किल लग रहा था। मैंने अपनी टीम को वॉच करने को कहा। जितनी देर में उसने दर्शन किए, उतनी देर में मैंने गूगल कर उसकी तस्वीर खंगाल ली। गूगल सर्च में वांटेड फोटो में उसके सिर पर चोट का निशान था। मेरे गार्ड ने जो फोटो भेजा था, उसे फिर मैंने जूम करके देखा तो उसके माथे पर चोट के निशान थे। इसके बाद मैं कन्फर्म हो गई कि ये विकास दुबे है लेकिन मैंने ये बात अपनी टीम से शेयर नहीं की, ताकि कोई पैनिक ना हो। इसके बाद मैंने एसपी साहब को फोनकर जानकारी दी। फिर मैंने अपने सुरक्षा गार्डों से कहा कि उसे आप लड्डू काउंटर पर बैठाइए और उसे शक नहीं होना चाहिए कि हम उसे वॉच कर रहे हैं। मैंने सुरक्षा गार्डों से कहा कि आप उससे आईडी कार्ड के बारे में पूछें और दूसरी बात कीजिए। जब उससे नाम पूछा गया तो उसने अपना नाम शुभम बताया और जेब से आईकार्ड निकालकर दिया। इस आईकार्ड पर उसका नाम नवीन पाल था। वो फर्जी आई कार्ड के जरिए दबंगई के साथ घूम रहा था।
रुबी यादव ने बताया कि उसने मंदिर में ही कबूल लिया था कि वो विकास दुबे है। इस दौरान उसने हमारे एक गार्ड से हाथपाई भी की। उसने एक गार्ड का नेम प्लेट निकाल लिया और उसकी घड़ी तोड़ दी, उसके अंदर कोई डर नहीं था। हालांकि थोड़ी देर में एसपी और एरिया की पुलिस मौक पर आ गई और उसे हिरासत में ले लिया।
बता दें कि जिस अपराधी को पुलिस दिल्ली, हरियाणा, यूपी के बीहड़ से पड़ोसी देश नेपाल तक में तलाशती रही वह ऐसे स्थान पर मिला, जहां शक की सुई नहीं गई थी। अभी कई सवाल बरकरार हैं, जिनका पुलिस को जवाब देना है। आखिर वह किस तरह एक सप्ताह तक कानून के हाथ से बचता रहा और फरीदाबाद से होटल से बचकर निकलने के बाद करीब ८०० किलोमीटर दूर उज्जैन तक वैâसे पहुंचा? दुबे को दबोचे जाने के लिए मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा तक ने पुलिस की पीठ थपथपाई है। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हमारी पुलिस किसी को नहीं छोड़ती। हमारे पुलिसवालों ने उसे धर दबोचा। हालांकि मीडिया के कैमरों में कैद फुटेज में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी जब उसका कॉलर पकड़कर ले जा रहे हैं तो वह चिल्लाते हुए अपनी पहचान बताता है कि मैं विकास दुबे हूं, कानपुरवाला।
माना जा रहा है कि विकास दुबे को एनकाउंटर के डर से सरेंडर के लिए एक सेफ जगह की तलाश थी। पहले बुधवार शाम को खबर आई कि वह नोएडा के फिल्म सिटी में एक टीवी स्टूडियो में खुद को सरेंडर करेगा। इसके बाद फिल्म सिटी में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई थी। यूपी पुलिस के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि यह पूरी तरह से सोच-समझकर किया गया सरेंडर है। यदि वह अब भी पुलिस से छिप रहा था तो मंदिर परिसर में बिना मास्क पहने क्यों जाता? वह जानता था कि यदि इसी तरह भागता रहा और पुलिस से अब कहीं भिड़ने की कोशिश की तो जिस तरह उसके साथी मारे गए उसी तरह वह भी कहीं ढेर हो जाएगा इसलिए उसने मंदिर जैसे स्थान को चुना। बता दें कि पुलिसकर्मियों की हत्या सहित दुबे के खिलाफ ६० केस दर्ज हैं। वह कानपुर के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद ३ जुलाई से फरार था। योगी सरकार ने दुबे के सिर पर ५ लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।

घायल दारोगा ने जताई खुशी
गोरखपुर। कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मियों के शहीद होने के जिम्मेदार कुख्यात अपराधी विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया है। विकास को पकड़ने के लिए कई राज्यों में अलर्ट जारी किया गया था, वहीं इस मुठभेड़ में गोरखपुर के रहनेवाले दारोगा सुधाकर पांडेय घायल हो गए थे। उन्होंने विकास दुबे की गिरफ्तारी पर खुशी जताई है। सुधाकर पांडेय ने कहा कि अब जाकर दिल को सुकून मिला है। अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

फूल बेचनेवाले ने विकास को पहचाना
उज्जैन। यूपी पुलिस प्रदेश के सबसे इनामी को पकड़ने में नाकाम साबित हुई। यूपी पुलिस की अलग-अलग टीमें सात दिन में सात प्रदेशों की विकास को खोजने में लगी थी, इसके बाद भी वह शिकंजे में नहीं आया। गुरुवार सुबह विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया। वह गिरफ्तार हुआ या उसने सरेंडर किया है? यह अभी सस्पेंस में है। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस का दावा है कि उसे गिरफ्तार किया गया है। कहा जा रहा है कि पुजारी ने उसे पहचाना तो कभी बताया जा रहा है कि सुरक्षाकर्मी ने उसकी पहचान की। मंदिर से जुड़े लोग भी इस विषय पर ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं। दूसरी ओर उज्जैन के डीएम आशीष सिंह का कहना है कि गुरुवार सुबह ७.३० और ८ बजे के बीच एक संदिग्ध शख्स को महाकाल मंदिर परिसर में देखा गया। उसने मंदिर के दर्शन को लेकर एक दुकानदार सुरेश से जानकारी ली थी और पूजा का सामान खरीदा। सामान खरीदते समय जैसे ही विकास ने मास्क उतारा दुकानदार को कुछ शक हुआ। इसके बाद दुकानदार ने गार्ड को बताया। प्राइवेट सिक्योरिटी के गार्ड एक पुलिस जवान के साथ महाकाल मंदिर वैंâपस में गया। वैंâपस के अंदर विकास दुबे को पकड़ा गया। विकास दुबे से पूछताछ की तो वह जवाब नहीं दे पाया, इसके बाद विकास दुबे को महाकाल स्थित चौकी पर लाया गया। पुलिस का शिकंजा कसता देख विकास दुबे ने खुद का परिचय दिया।

कांग्रेस ने एमपी के गृहमंत्री से जोड़ा दुबे का कनेक्शन!
भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन से हुई कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद से ही विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने विकास दुबे का भाजपा से कनेक्शन जोड़कर निशाना साधना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने ट्वीट कर बताया कि नरोत्तम मिश्रा अभी उज्जैन के प्रभारी हैं और यूपी चुनाव के समय कानपुर के प्रभारी थे। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट किया कि एमपी के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा यूपी चुनाव में कानपुर के प्रभारी थे और अभी उज्जैन के प्रभारी हैं। आगे आप खुद समझदार हैं। हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब कानपुर कांड में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भाजपा पर निशाना साधा हो। इससे पहले विपक्ष विकास दुबे को भाजपा का करीबी बताता रहा है।

हिरासत में लिए गए दो वकील
उज्जैन। उज्जैन के महाकाल मंदिर से कुख्यात अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ के दो वकीलों को भी उज्जैन से पुलिस हिरासत में लिया गया है। ये दोनों वकील निजी गाड़ी से उज्जैन गए थे। पुलिस उनसे विकास दुबे से कनेक्शन की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि कहीं इन्होंने ही तो विकास दुबे की मदद नहीं की क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देते हुए विकास मध्य प्रदेश कैसे पहुंच गया? ये बड़ा सवाल है। पुलिस उसके गुर्गों का सफाया करने में लगी रही और विकास दुबे उज्जैन पहुंच गया। अब सवाल उठ रहा है आखिर वहां तक पहुंचने में विकास की मदद कौन कर रहा था? कहा तो यह जा रहा था कि उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे सभी राज्यों की पुलिस विकास दुबे को लेकर हाई अलर्ट पर थी, बावजूद इसके वह कानपुर से दिल्ली होते हुए हरियाणा के फरीदाबाद शहर जा पहुंचा था। इसके बाद हरियाणा से मध्यप्रदेश तक आ गया। यहां पुलिस की चुस्ती और मुस्तैदी पर सवाल उठना लाजिमी भी है।