हेलन- डांसिंग डॉल

१९५० के दशक में हेलन जब अपने परिवार के साथ बर्मा से भारत आई थीं तो माता-पिता के साथ तीन भाई-बहन भी थे। यह एक शरणार्थी परिवार था जो मुंबई के फुटपाथ पर रहता था और उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं था। दो वक्त का भोजन जुटाना भी कठिन था। हेलन की उम्र १३ वर्ष थी और वे फिल्म संसार में एक जूनियर बाल कलाकार के रूप में भीड़ का हिस्सा होती थीं। हेलन को न तो हिंदी बोलना आता था और न ही वह अंग्रेजी जानती थीं। कई फिल्मों में जूनियर कलाकार के रूप में काम करते हुए हेलन ने डांस की शिक्षा प्राप्त की और कोरस डांसर के रूप में वे काम करने लगीं।
‘हूर-ए-अरब’ हेलन की पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें उन्होंने एक कोरस डांसर के रूप में डांस किया था। तब शायद हेलन ने खुद भी यह नहीं सोचा था कि एक दिन वे समूह नर्तकियों की भीड़ से निकलकर भारतीय सिनेमा के पर्दे की सबसे बेजोड़ नर्तकी बनेंगी। निर्माता-निर्देशक पी.एन. अरोड़ा ने एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हेलन को जब नाचते हुए देखा तो महसूस किया कि इस लड़की में प्रतिभा है और पैरों में नाच का जादू है। तब हेलन १५ वर्ष की एक किशोरी के व्यक्तित्व में ढलने लगी थीं। पी.एन. अरोड़ा ने हेलन को अपनी कंपनी में एक डांसर के रूप में अनुबंधित कर लिया और ‘अलिफ लैला’ में एक स्वतंत्र नर्तकी के रूप में पहला अवसर प्रदान किया। निर्माता पी.एन. अरोड़ा ने हेलन के परिवार को अपने घर के गैराज में रहने को आश्रय ही नहीं दिया, बल्कि उनके लिए हिंदी और उर्दू के टीचर भी रखे और बाद में उन्हें अंग्रेजी भी सिखाई।
‘अलिफ लैला’ में हेलन के डांस ने जो जलवा दिखाया उसे देखकर दर्शक ही नहीं निर्माता भी उनसे प्रभावित हो गए थे। ‘निलोफर’, ‘कैदी’, ‘यहूदी की लड़की’, ‘बरखा’ जैसी दर्जनों फिल्मों में डांस करते हुए हेलन एक नामचीन डांसर बन चुकी थीं। ५० के दशक से ७० के दशक तक हेलन एक ऐसी डांसिंग डॉल बन चुकी थीं जिनका एक ही डांस फिल्म की सफलता की गारंटी बन चुका था। किंतु हेलन को पता भी नहीं चला और वे डांसिंग डॉल के साथ-साथ निर्माता पी.एन. अरोड़ा के जाल में फंसकर सोने की ऐसी चिड़िया भी बन गई थीं जो निर्माता अरोड़ा के अनुबंध नामक पिंजरे में कैद थी। सिनेमा के पर्दे पर एक आजाद तितली की तरह नाचनेवाली डांसर लड़की हेलन अपनी निजी जिंदगी में एक ऐसी गुलाम बन चुकी थी जो केवल अरोड़ा की उंगलियों के इशारे पर नाच रही थी। पी.एन. अरोड़ा ने हेलन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। उन्हें शूटिंग पर साथी सितारों से बातचीत करने और संबंध बनाने की मनाही थी। तीन बच्चों के पिता पी.एन. अरोड़ा ने हेलन को अपनी दूसरी पत्नी की तरह बिना विवाह के ही एक अलग घर में रख लिया था और वे अपने परिवार के सदस्यों से भी नहीं मिल सकती थीं।
हेलन पर्दे के पीछे किस प्रकार एक यातनामय जीवन जी रही थीं यह १७ वर्षों के बाद ही पता चला जब एक दिन खबर मिली कि सोने की चिड़िया अरोड़ा का पिंजरा तोड़कर उड़ गई है। पहले तो लोगों को इस खबर पर विश्वास ही नहीं किया कि हेलन जैसी सौम्य और शांत प्रकृति की अभिनेत्री ऐसा कदम भी उठा सकती है। किंतु जब हेलन और अरोड़ा ने प्रेस में एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना आरंभ किया तो विश्वास करना ही पड़ा। यह पत्रकार जब हेलन से उनका पक्ष जानने के लिए उनसे मिला तो वह अपनी एक अंतरंग सहेली नूरजहां के घर में शरण लिए हुए थीं। पर्दे पर हमेशा हंसती-मुस्कुराती डांसिंग डॉल की आंखों से आंसू बह रहे थे और वे अपनी १७ वर्ष लंबी शोषण और यातनाओं की दास्तान बता रही थीं। पी.एन. अरोड़ा ने हेलन का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण ही नहीं किया बल्कि उसका जीवन नारकीय बना दिया था। हेलन १७ वर्षों में कई बार गर्भवती हुर्इं और मां बनना चाहती थीं किंतु अरोड़ा ने हर बार विदेश ले जाकर हेलन का गर्भपात करवा दिया। हर बार अरोड़ा तर्क देते थे कि अगर वे मां बनी तो उनका फीगर खराब हो जाएगा और सालों की मेहनत से बना उनका करियर खराब हो जाएगा। एक हजार नृत्यों और चार सौ फिल्मों का रिकॉर्ड बनानेवाली हेलन को कोई नहीं पूछेगा। पांच दशकों तक पर्दे पर एक कुशल और लोकप्रिय डांसर के रूप में छाई रहनेवाली हेलन बर्बाद हो जाएंगी। इस डर से हेलन पी.एन. अरोड़ा की हर बात मानती रहीं। हर यातना और अत्याचार सहती रहीं। हेलन ने प्रेस को इंटरव्यूज देते हुए अरोड़ा को ‘ड्रैकूला’ तक कहा था। ऐसा राक्षस जो १७ सालों तक उनका खून चूसता रहा।
जब हेलन अरोड़ा की कैद से निकलीं तो उनके पास केवल एक अंगूठी और छोटी-सी सफेद फिएट के सिवा कुछ भी न था। १७ वर्षों तक कठोर परिश्रम करने और लाखों-करोड़ों रुपए कमानेवाली नंबर वन डांसर के पास इसके अलावा कुछ भी न था। जिस फ्लैट ‘समरसेट प्लेस’ में वे रहती थीं उसका मालिकाना हक पाने के लिए भी हेलन को कानून की शरण लेनी पड़ी थी। हेलन की सहेली नूरजहां वास्तव में शूटिंग के लिए लाइट्स किराए पर देने का व्यवसाय करती थी। अरोड़ा की शूटिंग के लिए भी नूरजहां लाइट सप्लाई करती थी। इसी सिलसिले में वो अरोड़ा और हेलन के संपर्क में आई थी और शीघ्र ही इन लोगों से नूरजहां के घनिष्ट पारिवारिक संबंध बन गए थे। बाद में वो हेलन की अंतरंग और विश्वासपात्र सहेली बन गई थीं। तब हेलन ने उसे अपनी नारकीय जिंदगी का वह काला सच बताया जिसे कोई नहीं जानता था। इस कहानी में वास्तव में एक और पात्र भी था जो मानवीय रूप से इन दोनों सहेलियों की मदद पर्दे के पीछे से कर रहा था। वह पात्र सलमान खान के लेखक पिता सलीम खान थे। नूरजहां के संबंध सलीम खान परिवार से भी थे और नूरजहां के माध्यम से ही हेलन सलीम खान के संपर्क में आई थीं। इस बीच हेलन और अरोड़ा के बीच झगड़े बढ़ गए थे और हेलन अरोड़ा की कैद से छूटने के लिए छटपटाने लगी थीं। अरोड़ा को भी हेलन पर संदेह हो गया था और वे हेलन के साथ मारपीट करने लगे थे। जब हेलन ने अपनी असहनीय स्थिति की दर्दनाक दास्तान सलीम खान और नूरजहां को सुनाई तो तीनों ने एक योजना बनाई। इस योजना के अनुसार नूरजहां को किसी बहाने से हेलन को पिंजरे से उड़ाकर कुछ दिनों के लिए अस्थाई रूप से अपने घर में रखना था और बाद में स्थाई रूप से सलीम खान के घर में शरण लेनी थी।
योजना के अनुसार हेलन जब नूरजहां के साथ निकलीं तो उन्होंने फोन पर अरोड़ा को साफ-साफ बता दिया कि वे उनकी जिंदगी से बाहर जा चुकी हैं और अब कभी भी वापस नहीं आएंगी। अगले ही दिन ये खबर प्रेस में लीक हो चुकी थी कि हेलन ने अरोड़ा का घर छोड़ दिया है और अब वे आजाद हैं। इस खबर के बाद प्रेस के लोग दोनों पक्षों से मिल रहे थे। एक ओर हेलन प्रेस को अपनी यातनापूर्ण दास्तान सुनातीं और अरोड़ा का ‘ड्रैकूला’ बताती थीं तो दूसरी ओर अरोड़ा हेलन पर शर्मनाक आरोप और लांछन लगा रहे थे।
अंतत: हेलन ने अदालत में लड़कर अपने फ्लैट का मालिकाना हक पा लिया और कुछ दिनों तक नूरजहां के घर में रहने के बाद सलीम खान के घर में रहने लगीं। आज भी हेलन सलीम खान के घर में रहती हैं और अपने सुनहरे अतीत की यादों के साथ जीवन की इस दर्दनाक घटना को भुला चुकी हैं।