मुर्गा और अंडा बीमारी का फंडा! एंटीबायोटिक के ओवरडोज से आदमी भी होगा शिकार

अच्छे स्वास्थ्य के लिए अंडे का सेवन करने की सलाह दी जाती है। चिकन और अंडे के सेवन से शरीर को हाई प्रोटीन मिलता है। लेकिन मुंबई में चिकन के लीवर और अंडे पर किए गए एक शोध को मानें तो चिकन और अंडा बीमारी के फंडे को इंसानी शरीर से दूर रखने में नाकामयाब साबित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं की मानें तो मुर्गियों को बीमारी से बचाने के लिए एंटीबायोटिक का ओवर डोज दिया जा रहा है। ऐसे में जब मुर्गी के लीवर और अंडे की जांच की गई तो उनमें दवा प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस) पाई गई। यानी उन मुर्गियों पर कई एंटीबायोटिक दवाइयां बेअसर साबित हुर्इं। ऐसे में यदि कोई शख्स उक्त चिकन और अंडे का सेवन करता है तो उसका शरीर भी एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस का शिकार हो सकता है।
मुर्गी तो खाएगी आपको भी फंसाएगी
कुक्कुट पालन व्यवसाय में लगे लोग मुर्गियों को एंटीबायोटिक दवाएं पानी, ग्रैन्यूल्स और इंजेक्शन के जरिए देते हैं। ऐसी स्थिति में ये दवाएं मुर्गी खाकर आपको फंसा सकती है। इसकी जांच के लिए मुंबई के १२ अलग-अलग जगहों से चिकन का लीवर और अंडे का नमूना जांच के लिए भेजा गया था। इन नमूनों पर १२ एंटीबायोटिक दवाइयों का इस्तेमाल यह जानने के लिए किया गया कि कौन-कौन-सी दवाइयां इन पर बेअसर साबित होती हैं। शोधकर्ताओं ने जहरखुरानी के लिए जिम्मेदार माने जानेवाले साल्मोनेला बैक्टीरियम को नमूने से अलग किया और बीमार इंसान को ठीक करने के लिए इस्तेमाल होनेवाले अमोक्सीलिन, अजीथ्रोमायसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन, सेफ्ट्रिएक्सोन, क्लोरैमफेनिकोल, इरिथ्रोमाइसिन, जेंटामाइसिन, लिवोफ्लॉक्सासिन, नाइट्रोफ्यूरन्टाइन और टेट्रासाइक्लिन जैसे १२ एंटीबायोटिक का इस्तेमाल इन नमूनों पर करके जांच की गई। इस जांच में लगभग सभी नमूने अजीथ्रोमायसिन, इरिथ्रोमाइसिन और नाइट्रोफ्यूरन्टाइन एंटीबायोटिक बेअसर रहीं। ६० प्रतिशत नमूने में अमोक्सीसिलिन, जेंटामाइसिन, टेट्रासाइक्लिन दवा को लेकर रेसिस्टेंस पाया गया। यह अध्ययन नेशनल पैâसिलिटी फॉर बायोफार्मास्युटिकल्स, सेंट जॉन्स कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड साइंसेज और वीईएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी के शोधकर्ताओं ने किया है जिसे
‘एक्ट साइंटिफिक माइक्रोबायोलॉजी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने कहा है कि मुर्गियों को बीमारियों से बचने के लिए एंटीबायोटिक का बेतहाशा इस्तेमाल उनमें दवा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में इंसान यदि इनका सेवन करता है तो उसके शरीर में भी दवा प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाएगी। परेल स्थित प्राणी अस्पताल के प्रमुख डॉ.जेसी खन्ना ने बताया कि इंसान हो या प्राणी ज्यादा मात्रा में एंटीबायोटिक का डोज सब के लिए खतरा है। मुर्गी और अंडों में एंटीबायोटिक का ज्यादा इस्तेमाल उनके लिए घातक है ही लेकिन उक्त चीजों का सेवन करनेवालों के लिए भी घातक है क्योंकि ऐसी स्थिति में सेवनकर्ता के शरीर में दवा प्रतिरोधक क्षमता निर्मित हो जाती है। ऐसे में जब सेवनकर्ता बीमार पड़ेगा तो उस पर शायद ही एंटीबायोटिक दवाएं काम करें।