ब्रेक ने किया स्वप्न क्रैक  

ब्रेक बड़ा खतरनाक हो जाता है। हालांकि ये भी सच है कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है। या तो पढ़ाई कर नंबर प्राप्त कर लें या अपनी दौड़ का अभ्यास कर किसी बड़ी स्पर्धा के लिए चयनित हो जाएं। पढ़ाई के चक्कर में हिमा दास ने अपने स्वप्न को क्रेक किया है। फिलहाल ऐसा ही लग रहा है। ये सनद रहे कि पिछले महीने में पांच गोल्ड मेडल जीत चुकी हिमा दास अभी भी वर्ल्ड चैंपियनशिप का क्वॉलिफाइंग मार्क हासिल नहीं कर पाई हैं। सितंबर में कतर के दोहा में होनेवाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में ४०० मीटर के लिए हिमा अभी तक क्वॉलिफाई नहीं कर पाई है। ४०० मीटर में हिमा दास का सीजन बेस्ट प्रदर्शन ५२.०९ सेकंड है जो उन्होंने चैक गणराज्य में हुई चैंपियनशिप में हासिल किया था और गोल्ड जीता था। हालांकि वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाइंग मार्क ५१.८० सेकंड है, हिमा इससे फिलहाल काफी पीछे हैं। डिप्टी चीफ कोच राधाकृष्ण नायर ने हिमा के टायमिंग में आई कमी का कारण इस साल जनवरी और फरवरी महीने में लिए ब्रेक को बताया। हिमा दास ने १२वीं के बोर्ड एग्जाम देने के लिए फरवरी और मार्च में ट्रेनिंग से ४५ दिन का ब्रेक लिया था। कोच राधाकृष्ण नायर ने कहा कि वह ४५ दिन के ब्रेक पर थी और उस दौरान उन्होंने किसी भी तरह की ट्रेनिंग नहीं की। कमर दर्द कोई बड़ी परेशानी नहीं थी। अपने एग्जाम के चलते वह ट्रेनिंग नहीं कर सकी। अगर ऐसा नहीं होता तो वह फिलहाल उसी स्तर पर होती जहां वह पिछले साल थी। नायर ने कहा कि हिमा के पास अभी भी कुछ मौके हैं लेकिन उसके लिए उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हिमा अभी कुछ और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगी। उनके पास सितंबर छह से पहले क्वॉलिफाइंग मार्क हासिल करने का मौका है। हमें नहीं पता इन प्रतियोगिताओं का स्तर क्या है? अगर वह यह क्वॉलिफाइंग मार्क हासिल नहीं भी कर पाती तो भी वह रिले टीम का हिस्सा रहेंगी तो वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वॉलिफाई कर चुकी है। इससे पहले मार्च में ४०० मीटर के कोच बुर्खारिना ने भी हिमा दास के ब्रेक पर कहा था कि हिमा ने इस ब्रेक के साथ काफी अहम समय लुटा दिया है और उन्हें अब वापसी करने में मुश्किल होगी।