" /> धर्म न माननेवाला हो सकता है नास्तिक… राम के बिना हिंदुस्थान है अधूरा!

धर्म न माननेवाला हो सकता है नास्तिक… राम के बिना हिंदुस्थान है अधूरा!

♦ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम की अश्लील टिप्पणी को बताया पूरे देश का अपमान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है, कुछ प्रतिबंध भी हैं। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है। भगवान राम और कृष्ण के खिलाफ सोशल मीडिया में अश्लील टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने कहा कि राम के बिना हिंदुस्थान अधूरा है। जिस देश में रह रहे हैं, उस देश के महापुरुषों व संस्कृति का सम्मान करना जरूरी है। कोई ईश्वर को माने या न माने, उसे किसी की आस्था पर चोट पहुंचाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने भगवान राम-कृष्ण के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने वाले आकाश जाटव उर्फ सूर्य प्रकाश को दोबारा ऐसे अपराध न करने की चेतावनी देते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि याची पिछले १० माह से जेल में बंद हैं। विचार शीघ्र पूरा होने की संभावना नहीं है।
याची ने कोर्ट में खुद को बताया निर्दोष
याची का कहना था कि किसी ने उसकी फर्जी आईडी तैयार कर अश्लील पोस्ट डाली वह निर्दोष है। यह भी तर्क दिया कि संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी है, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। सरकारी वकील ने कहा कि याची अहमदाबाद अपने मामा के घर गया था। जहां अपना सिम कार्ड मामा के लड़के के मोबाइल फोन में लगाकर अश्लील पोस्ट डाली है और एफआईआर दर्ज होते ही मोबाइल फोन व सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिया है।
संविधान में दिए गए हैं मूल अधिकार
कोर्ट ने कहा कि संविधान में मूल अधिकार दिए गए हैं। उसी में से अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार भी है। संविधान बहुत उदार है। धर्म न मानने वाला नास्तिक हो सकता है। इससे किसी को दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि मानव खोपड़ी हाथ में लेकर नृत्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह अपराध है। कोर्ट ने कहा हमारे ऋषि मुनियों ने इंसान को भगवान बनने के रास्ते दिखाएं हैं। टैगोर जी ने कहा कि रामायण महाभारत में भारत की आत्मा के दर्शन होते हैं। महात्मा गांधी के जीवन में भी राम का महत्व रहा है। सामाजिक समरसता रामायण से इतर कहीं नहीं दिखती। सबरी के जूठे बेर खाने से लेकर निषादराज को गले लगाने तक सामाजिक समरसता का ही संदेश दिया गया है।
वसुधैव कुटुंबकम् के भाव अन्य किसी भी देश में नहीं
भगवत गीता में कर्म फल सिद्धांत का वर्णन है।आत्मा अमर है। वह कपड़े की तरह शरीर वैसे बदलती है, जैसे बछड़ा झुंड में अपनी मां को ढूंढ़ लेता है। मन शरीर का हिस्सा है। सुख-दुख का अहसास शरीर को ही होता है। भगवान कृष्ण ने कहा कर्म पर ध्यान दो, फल मुझ पर छोड़ो। वसुधैव कुटुंबकम् के भाव अन्य किसी भी देश में नहीं है।
धर्म की हानि होने पर भगवान लेते हैं अवतार
धर्म रक्षार्थ भगवान आते हैं। धर्म की हानि होने पर भगवान अवतार लेते हैं। भारतीय संविधान में भी भगवान राम सीता के चित्र अंकित है। ऐसे में राम कृष्ण के खिलाफ अश्लील टिप्पणी माफी योग्य नहीं है। हिंदुओं में ही नहीं मुसलमानों में भी कृष्ण भक्त रहे हैं। रसखान, अमीर खुसरो, आलम शेख, वाजिद अली शाह नजीर अकबराबादी, राम-कृष्ण भक्त रहे हैं। राम कृष्ण का अपमान पूरे देश का अपमान है।