" /> चीनी राखी को मात देती हिंदुस्थानी मिट्टी

चीनी राखी को मात देती हिंदुस्थानी मिट्टी

राजन पारकर / मुंबई
देश में चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम जोर पकड़ रही है। कैट की अगुवाई में चलाए जा रहे इस अभियान को जोरदार समर्थन मिल रहा है। कैट का दावा है कि इस बार व्यापारी और उपभोक्ता चीन को सबक सिखाने को तैयार हैं और इसकी पहली बानगी रक्षाबंधन पर दिख रही है। इस बार चीनी राखी को बाजार में हिंदुस्थानी ‘मिट्टी’ राखी मात देती नजर आ रही है। कैट का दावा है कि बाजारों में इस बार हिंदुस्थानी सामान से बनी राखियों की मांग बढ़ गई है। खरीदार चीनी राखियों की बजाय हिंदुस्थानी सामान से बनी राखियों के लिए अधिक कीमत भी देने को तैयार हैं।
पिछले कुछ वर्षों में चीन निर्मित राखी ने हिंदुस्थान के राखी बाजार पर कब्जा कर लिया है। एक अनुमान के अनुसार राखी के त्यौहार पर देशभर में लगभग ५० करोड़ से ज्यादा राखियां खरीदी जाती हैं। प्रतिवर्ष चीन लगभग ४ हजार करोड़ रुपए की राखी अथवा राखी का सामान हिंदुस्थान को निर्यात करता आया है और इस बार कैट के हिंदुस्थानी राखी की घोषणा के बाद चीन को ४ हजार करोड़ रुपए के व्यापार का झटका लगना तय है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि चीनी उत्पादों के बहिष्कार के अभियान ने हिंदुस्थानी उत्पाद, बाजार व कारीगरों को एक नया अवसर प्रदान किया है।
अनाज, मिट्टी, बीज से  बनी विशेष राखियां
भरतिया और खंडेलवाल ने बताया कि पारंपरिक राखी बनाने के अलावा महिलाओं ने नए-नए प्रयोग करते हुए कई अन्य प्रकार की राखियां भी विकसित की हैं, जिनमें विशेष रूप से तैयार मोदी राखी, बीज राखी भी शामिल है। ये बीज राखी के बाद पौधे लगाने के काम में आ सकते हैं। इसी प्रकार से पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी राखियां, दाल से बनी राखियां, चावल, गेहूं और अनाज के अन्य सामानों से बनी राखियां, मधुबनी पेंटिंग से बनी राखियां, हस्तकला की वस्तुओं से बनी राखियां, आदिवासी वस्तुओं से बनी राखियां आदि भी बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न राज्यों में बनाई जा रही हैं।
दिखेगी हिंदुस्थानी प्रतिभा
गाय के गोबर से बनी सजावटी वस्तुएं भी प्रचुर मात्रा में बन रही हैं। ये कलाकृतियां बेहद सस्ती हैं, जो हाथ से बनती हैं तथा इनको बनाने में कोई मशीन या तकनीक की आवश्यकता नहीं है। इस वर्ष हिंदुस्थानी महिलाओं की वास्तविक प्रतिभा और कला कौशल को विभिन्न प्रकार की राखियों में देखा जा सकता है।