बेघर थे, चुनाव में बेकार हो गए! २८ हजार मतदाता रहेंगे मतदान से वंचित

मोफीद खान / मुंबई
मायानगरी मुंबई के फुटपाथ हजारों बेघरों का आशियाना हैं। इन बेघरों के लिए शेल्टर होम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद फुटपाथों पर बेघरों का आशियाना बदस्तूर जारी है। ऐसे में पहले से ही बेघर रहे लोग अब इस चुनाव में और बेकार हो गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ है कि इनके पास मतदान करने का अधिकार नहीं है क्योंकि इनके नाम मतदाता सूची में ही नहीं हैं। २०११ में हुई जनगणना में ५७,४१६ नागरिक शहर और उपनगरों में बेघर पाए गए थे, जिनमें से २८ हजार नागरिक मतदान करने की उम्र के हैं। स्थायी निवास का कोई भी दस्तावेज न होने से इनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए, जिसके चलते वे इस मतदान से वंचित रहेंगे।
बता दें कि महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारत आदि राज्यों से रोजगार के उद्देश्य से कई लोग मायानगरी मुंबई आते हैं। इनमें फासेपारधी, रामोशी, बंजारा, काटेवाड़ी, कचरा चुननेवाले, मुस्लिम, आदिवासी, वडार आदि पिछड़े समाज के लोगों का समावेश है। रे रोड, डोंगरी, अग्रीपाड़ा, कांदिवली, मालाड, आरे कॉलोनी, गोरेगांव, दहिसर, अंधेरी, बोरिवली, चेंबूर और मानखुर्द इलाके के फुटपाथ, पुल और रेलवे स्टेशनों के इर्द-गिर्द बेघर लोग आसानी से देखे जा सकते हैं। अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ये कोई भी काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। दिनभर मेहनत करके शाम को वे फुटपाथ पर ही अपना बसेरा करते हैं। रहने के लिए स्थायी जगह न होने के चलते इनके पास कोई पुख्ता दस्तावेज भी नहीं है। बेघरों के अधिकारों के लिए लड़नेवाली संस्था ‘महाराष्ट्र राज्य बेघर अधिकार’ के संयोजक ब्रिजेश आर्या ने बताया कि वोट बैंक न होने के कारण इन बेघरों पर राजनीतिक पार्टियां ध्यान नहीं देतीं। इन्हें भी मतदान का अधिकार मिले, इसके लिए हम प्रयासरत हैं। आर्या ने बताया कि चुनाव आयोग ने फॉर्म नंबर ६ में स्पष्ट रूप से बेघरों को भी मतदान देने के अधिकार का उल्लेख किया है लेकिन बूथ लेवल के अधिकारी मतदाता सूची में इन बेघरों का नाम समाहित करने के लिए तरह-तरह के दस्तावेजों की मांग करते हैं। दस्तावेज न होने का बहाना बताकर अधिकारी न ही इनका नाम मतदाता सूची में समाहित करते हैं और न ही इन्हें मतदाता पहचान पत्र जारी करते हैं। आर्या ने बताया कि काफी प्रयासों के बाद महज पांच हजार बेघरों का ही नाम मतदाता सूची में समाहित हो पाया है, शेष २८ हजार बेघर इस बार भी चुनाव से वंचित रह जाएंगे।