" /> भूखा भस्मासुर!

भूखा भस्मासुर!

अमेरिका जैसे वैश्विक महासत्ता को पछाड़कर चीन को एक निरंकुश महासत्ता बनाने का दिवास्वप्न चीन के नेता देख रहे हैं। उसके लिए किसी भी स्तर पर जाने की तैयारी चीन ने की हुई है। चीन के नेताओं ने हर कीमत पर चीन का भौगोलिक विस्तार करने की नीति बनाई है। उसके पीछे का एकमात्र कारण है महासत्ता बनने की जल्दबाजी। लगातार सामने आनेवाले घटनाक्रमों को देखते हुए यह प्रतीत हो रहा है कि चीन को दूसरे देशों के भूभाग को हड़पने की राक्षसी भूख लगी हुई है। हिंदुस्थान में लद्दाख से सटी गलवान घाटी में जबरन घुसपैठ के बाद चीन ने अब अपना मोर्चा मध्य एशिया स्थित ताजिकिस्तान के खिलाफ खोल दिया है। हालांकि, चीन ने हमारी सीमा पर जिस प्रकार सेना का जमावड़ा किया, वैसा फिलहाल ताजिकिस्तान में नहीं किया है। लेकिन ताजिकिस्तान के पूरे पामीर पहाड़ क्षेत्र पर चीन ने अपना दावा ठोंक दिया है। चीन ने मांग की है कि ‘पामीर’ के पहाड़ चीन का भूभाग हैं। उसे ताजिकिस्तान वापस करे। चीन की तुलना में ताजिकिस्तान बहुत गरीब देश है। आक्रामक चीन की मांग से ताजिकिस्तान में चिंता का माहौल है। दुनिया भर में सोने की कुल खदानों में अकेले ताजिकिस्तान में ही लगभग १४५ खाने हैं। इन खानों का विकास करने और खानों को खोजने का कांट्रेक्ट चीनी कंपनियों के पास है। इसीलिए १२८ साल पहले चीन से अलग हुए ‘पामीर’ के भूभाग पर चीन के नेताओं की वक्रदृष्टि होगी। चीन की तमाम सरकारी नीतियां और अंतरराष्ट्रीय मामलों में चीन का दृष्टिकोण जिस सरकारी मीडिया के द्वारा जारी किया जाता है, उसमें चीन ने ‘पामीर’ के पर्वतों पर अपना अधिकार जताया है। इस मामले में चीन की सरकारी मीडिया द्वारा एक इतिहासकार के लेख को प्रकाशित करके पूरे पामीर क्षेत्र पर चीन का अधिकार बताया गया है और कहा गया है कि इस भू-प्रदेश पर चीन को हर हाल में अपना कब्जा जमाना चाहिए। इस दावे की पुष्टि के लिए चीन में पुराने संदर्भों और अभिलेखों का उल्लेख किया गया है। सच कहें तो ‘पामीर’ पर कई सालों से चीन की नजर है। १० साल पहले पामीर के पहाड़ों को लेकर चीन और ताजिकिस्तान में एक अनुबंध हुआ। उसके अंतर्गत इच्छा नहीं होते हुए भी ताजिकिस्तान ने पामीर क्षेत्र का १,१५८ किलोमीटर का क्षेत्र दबाव के अंतर्गत चीन को दे दिया। अब तो राक्षसी ड्रैगन ने पूरे पामीर पर अपना हक जताया है, जिससे ताजिकिस्तान में टेंशन बढ़ गया है। रणनीतिक दृष्टि से रशिया भी मध्य एशिया के देशों पर अपना दावा ठोंकता रहता है। चीन के पामीर पर नए विवादित दावे के कारण रशिया भी अब चीन को संदेह की नजरों से देखेगा। दुनिया के किसी भी देश को कुछ भी न मानते हुए चीन का विस्तारवादी राक्षस अपनी सीमा से सटे देशों की कमर तोड़ने निकला हुआ है। एक तरफ साम्यवाद का जप करना और दूसरी ओर सीमाओं का विस्तार करते हुए साम्राज्यवादी नाखूनों को बाहर निकालना, यह चीन का दोहरा चरित्र है। घुसपैठ करके पड़ोसी देशों की जमीन हड़पने की चीनी विकृति बढ़ती जा रही है। चीन की सीमा लगभग १४ देशों से सटी हुई है और जमीन तथा समुद्री सीमा को लेकर सिर्फ हिंदुस्थान ही नहीं, बल्कि २७ देशों से चीन का विवाद शुरू है। इससे यह साबित होता है कि चीन की इच्छाएं कितनी राक्षसी हैं। अब ताजिकिस्तान के पामीर भू-प्रदेश पर चीन ने अपना दावा ठोंका है। चीन की यह भस्मासुरी भूख भविष्य में दुनिया के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है। दुनिया भर के तमाम देशों को एक साथ आकर चीन को रास्ते पर लाना ही इसका उपाय है। कोरोना के बाद से चीन पहले ही अलग-थलग पड़ चुका है, जिससे वो वैश्विक एकता के समक्ष नहीं टिक पाएगा। चीन लगभग डेढ़ सौ करोड़ की जनसंख्या और बड़े क्षेत्रफल के भू-प्रदेश के दम पर वैश्विक महासत्ता बनने का सपना देख रहा है। विश्व समुदाय को समय रहते सावधान होकर एक साथ आकर कदम उठाना चाहिए और चीन के सपनों को चकनाचूर करना चाहिए।