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`मुझे खुद का नाम पसंद नहीं!’-कोंकोना सेन शर्मा

मशहूर फिल्म निर्देशिका अपर्णा सेन शर्मा की सुपुत्री कोंकोना सेन शर्मा ने बॉलीवुड में अपना एक खास मकाम बनाया है। सिर्फ मनोरंजन करनेवाली फिल्मों से कोंकोना दूर रही हैं और हमेशा से विचार करने के लिए मजबूर कर देनेवाली फिल्मों में नजर आई हैं। कॉन्टेम्पररी फिल्म्स की मुख्य अभिनेत्री के रूप में अपनी असीम छाप छोड़नेवाली कोंकोना निर्देशित फिल्म ‘ए डेथ इन द गूंज’ (२०१७) बेहद सराही गई। कई बांग्ला फिल्मों में अपना योगदान देनेवाली यह प्रतिभाशाली अभिनेत्री इन दिनों वेब सीरीज ‘मुंबई डायरीज’ को लेकर खास सुर्खियों में है। पेश है, कोंकोना सेन शर्मा से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

♦ फिल्में सिलेक्ट करने के मामले में आप बेहद चूजी रही हैं, आपने वेब शो ‘मुंबई डायरीज’ को वैâसे सिलेक्ट किया?
‘मुंबई डायरीज’ डॉक्यूमेंट्रीr नहीं है। यह वेब शो मुंबई पर हुई आतंकवादी सच्ची घटना पर आधारित है। ऐसे शो को भला मैं वैâसे मना कर सकती हूं? मेरा किरदार डॉ. चित्रा दास का है, एक डॉक्टर का रोल निभाना मेरे लिए चैलेंजिंग था। दरअसल, मैंने फिल्मों में सशक्त नारी के ही किरदार निभाएं हैं, लेकिन पहली बार एक रियलिस्टिक डॉक्टर का किरदार मैंने निभाया।

♦ सुना है आप ऑडिशन देने में बिलीव नहीं करतीं?
४ साल की उम्र से ही मैं अपनी मां अपर्णा सेन के साथ बाल कलाकार के रूप में काम कर रही हूं। ३० वर्षों से अधिक समय हो चुका मैंने कभी ऑडिशन नहीं दिया। यह तो निर्देशक का कन्विक्शन हुआ करता था कि कौन-सा कलाकार कौन-से रोल में सक्षम है। चंद वर्षों पहले फिल्मों में किरदार ढूंढ़ने के लिए ऑडिशन का सिलसिला शुरू हुआ। विदेश में मैंने सुपर नैचुरल और फंतासी किरदारों के लिए और यहां विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओमकारा’ के लिए ऑडिशन दिया था।

♦ आपके लिए मुश्किल किरदारों से बाहर निकलना कितना आसान और मुश्किल होता है?
अमूमन कलाकारों को आदत पड़ जाती है मुश्किल किरदारों से इन और आउट करने की। ऐसे कई कलाकार हैं, जिन्होंने ५०० से अधिक फिल्में अपने करियर में की हैं, उनके लिए किरदार से जितना जल्दी बाहर निकलें उतना बेहतर होता है, वरना हर किरदार दिमाग में रहे तो ये बड़ी प्रॉब्लम वाली बात होगी।

♦ आपका नाम बड़ा अन्यूजवल है, इस पर क्या कहना चाहेंगी?
मेरा नाम कोंकोना है, जो मुझे कभी पसंद नहीं आया। मेरी बहन का नाम कमलिनी है। कोंकोना यह रवींद्रनाथ टैगोर की एक कविता का नाम है। इसका दूसरा मतलब कंगन भी है। सच कहूं तो मुझे खुद का नाम कभी पसंद नहीं आया। मेरी बहन का नाम कमलिनी, मुझे बहुत अच्छा लगता है। कोंकोना यह एक नदी का भी नाम है। मेरे नाम के पीछे यही कुछ छोटी-मोटी बातें हैं।

♦ सुना है फिल्म ‘ओमकारा’ के बाद विशाल भारद्वाज के साथ आप एक लंबे गैप के बाद जुड़ी हैं?
विशाल भारद्वाज और उनके परिवार से मेरे व्यक्तिगत ताल्लुकात बेहद अच्छे हैं। मुझे पता चला कि विशाल भारद्वाज का बेटा आसमान भी बतौर निर्देशक अपना करियर फिल्म ‘कुत्ते’ से आरंभ कर रहा है। जब आसमान ने मुझे इस फिल्म में एक किरदार ऑफर किया तो मैंने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। मैं इस फिल्म के जरिए आसमान को सपोर्ट कर रही हूं।

♦ वेब शो में भारती नामक दलित महिला का किरदार निभाना कितना अलग था?
मैं हमेशा से मानती हूं कि एक भारतीय महिला होने के साथ ही मैं एक मां और एक अभिनेत्री भी हूं। इस दलित महिला का रोल मैंने बड़ी शिद्दत के साथ निभाया। लेकिन मुझे लग रहा है कि उस किरदार को नजरअंदाज कर दिया गया।