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खपत हुई कम तो आइसक्रीम बनी ‘बम’!

ऊपर का शीर्षक देखकर आप चौंक जाएंगे कि भला ठंडा-ठंडा, कूल-कूल सा आइसक्रीम बम वैâसे बन सकती है? बम से यहां तात्पर्य ‘आग के गोले’ से है। जी हां, बात बिल्कुल सच है और कोई एक-दो नहीं बल्कि पूरे २६ टन आइसक्रीम आग के गोले में बदल गई। दरअसल, मार्च महीने में कोरोना महामारी के कारण वैसे ही लोग ठंडी खाने की चीजों से दूर होने लगे थे। ऊपर से लॉकडाउन के कारण एक कंपनी की पैâक्ट्री में तैयार आइसक्रीम बेकार हो गई। कंपनी ने सोचा कि मुफ्त में लोगों को बांट दें पर वह भी संभव नहीं हुआ। आखिर में यह आइसक्रीम ‘बम’ यानी आग के गोले में बदल गई।
मिली जानकारी के अनुसार लॉकडाउन के बीच मुंबई की एक कंपनी को २६ टन आइसक्रीम फेंकनी पड़ी। कंपनी ने मनपा, पुलिस से इसे मुफ्त बांटने की इजाजत मांगी थी, लेकिन कोरोना व लॉकडाउन की वजह से यह संभव नहीं हो पाया। इसके बाद कंपनी ने आइसक्रीम को ठिकाने लगाने के लिए एक दूसरे फर्म से संपर्क किया। कंपनी का कहना है कि यह उसका बेहतरीन किस्म का आइसक्रीम उत्पाद था। मीडिया में आई खबर के अनुसार मुंबई के नेचुरल्स आइसक्रीम की पैâक्ट्री में ४५,००० छोटे बॉक्स में पैक २६ टन आइसक्रीम दुकानों पर जाने को तैयार थी। लेकिन तभी राज्य में लॉकडाउन लग गया। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से पहले से ही आइसक्रीम की खपत काफी कम हो गई थी। नेचुरल्स आइसक्रीम के वाइस प्रेसिडेंट हेमंत नाईक ने मीडिया को बताया, ‘हमने तो ऐसी कोई नीति ही नहीं बनाई थी कि अपने उत्पादों का एक्सपायर होने के बाद क्या इस्तेमाल हो सकता है। डेयरी उत्पाद होने के नाते हम इसका कुछ नहीं कर सकते थे। इसे फेंकना ही था। हमें इसके आसार भी नहीं लगे थे कि लॉकडाउन इतनी जल्दी लग जाएगा।’ गौरतलब है कि नेचुरल्स की आइसक्रीम प्रâेश प्रâूट जूस से बनी होती है, इसलिए इनकी लाइफ भी करीब १५ दिन ही होती है। लॉकडाउन के बाद कंपनी ने कोशिश की कि इन आइसक्रीम को एक्सपायर होने से पहले ही गरीबों में बांट दिया जाए। मगर इसकी इजाजत नहीं मिली। प्रशासन सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई के लिए इजाजत दे रहा था। आइसक्रीम आवश्यक वस्तु की श्रेणी में नहीं है। अब कंपनी के पास समस्या यह थी कि २६ टन आइसक्रीम को कहां और वैâसे फेंका जाए? इतनी ज्यादा मात्रा होने की वजह से न तो इसे गटर में फेंक सकते थे न कहीं और। इसलिए कंपनी ने संजीवनी ए३ नामक एक फर्म से संपर्क किया, जिसके पास मुंबई में रेयर वेट डिस्पोजल प्लांट है। इस प्लांट में आइसक्रीम का निस्तारण किया गया और उसे बायोगैस में बदल दिया गया। हालांकि लॉकडाउन की वजह से इस गैस का भी कहीं इस्तेमाल नहीं हो पाया और इसे वैसे ही जला दिया गया। इस तरह ठंडी आइसक्रीम बायोगैस बनकर आग में जल गई।