" /> मीरा-भायंदर को लगा बिजली का झटका!,बिजली कंपनियों की अवैध वसूली

मीरा-भायंदर को लगा बिजली का झटका!,बिजली कंपनियों की अवैध वसूली

कोरोना वायरस पर लगाम लगाने के लिए लगे लॉकडाउन के कारण पहले ही आम आदमी आर्थिक तंगी की चपेट में आ चुका है। ऊपर से बिजली कंपनियों ने अनुमानित बिजली बिल के नाम पर १० गुना ज्यादा बिजली बिल भेजकर लोगों को जोरदार झटका दे दिया है। इससे बिजली उपभोक्ताओं में रोष व्याप्त है। अडानी इलेक्ट्रिसिटी की इस अवैध वसूली के कारण मीरा-भायंदर के स्थानीय नागरिकों में काफी रोष है। बिजली कंपनी की मनमानी और नागरिकों के रोष को देखते हुए शिवसेना ने आंदोलन छेड़ दिया है। कई नागरिकों की शिकायत है कि उनका इस माह का बिल पिछले एक साल के बिजली बिल के बराबर आया है।
मिली जानकारी के अनुसार भारी-भरकम आए बिजली बिल की शिकायत करने जाने पर बिजली कंपनियों के अधिकारी शिकायतकर्ताओं से सीधे मुंह बात तक नहीं कर रहे। उनके द्वारा अनाप-शनाप जवाब दिए जाने के भी आरोप लोगों द्वारा लगाए जा रहे हैं। बिजली कंपनियों की दलील है कि वर्क प्रâॉम होम और लॉकडाउन की अवधि में परिवार के सभी सदस्यों के घरों में रहने की वजह से बिजली की खपत ज्यादा हुई है इसलिए सभी के बिजली बिल की राशि में बढ़ोतरी हुई है। मगर बहुत से ऐसे घर भी हैं जो चॉल में हैं और वहां वर्क प्रâॉम होम भी नहीं है। मगर फिर भी वहां बिजली का बिल कई गुना ज्यादा भेजा गया है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने इस सिलसिले में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर उन्हें आम नागरिकों के इस दर्द से अवगत कराया है। सरनाईक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गुजारिश की है कि एक कुटुंब प्रमुख के रूप में इस मामले में वे हस्तक्षेप करें और लोगों को दिलासा दें। सरनाईक ने अपने पत्र में लिखा है कि बढ़े हुए बिल भेजकर बिजली कंपनियां लोगों से सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि उनका मानसिक छल भी कर रही हैं। चॉल में रहनेवाले सामान्य नागरिकों के घरों से न तो `वर्क प्रâॉम होम’ किया जाता है और न ही उनके घरों में हीटर, एसी, ओवन जैसे अधिक बिजली खपत करनेवाले उपकरण होते हैं। इसके बावजूद उनके बिजली बिल १,५०० की जगह २०,००० तक भेजे गए हैं। लॉकडाउन के कारण पहले ही आर्थिक रूप से लोगों की कमर टूटी हुई है। ऐसे में बिजली कंपनी की इस मनमानी ने लोगों की समस्याएं और बढ़ा दी हैं।

अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड के प्रवक्ता का कहना है कि हमने फिजिकल मीटर रीडिंग फिर से शुरू कर दी है। इसे मार्च महीने से कुछ समय के लिए कोविड-१९ के कारण रोक दिया गया था। पिछले तीन महीने दिसंबर, जनवरी और फरवरी ठंड के महीने थे। वे बिल औसत आधार पर तैयार किए गए थे और काफी कम थे। गर्मी के कारण अप्रैल, मई और जून माह में इसकी अपेक्षा खपत और उपयोगिता (लॉकडाउन/वर्क प्रâॉम होम के कारण) ज्यादा रही। अब ग्राहकों को टैरिफ स्लैब के साथ उनके वास्तविक खपत के आधार पर बिल मिलने शुरू हो जाएंगे। एमईआरसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार पिछली अवधि के लिए बिल की राशि का हिसाब किया जाएगा। ग्राहकों के बिल संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए भी कई उपक्रम शुरू किए गए हैं।

बिजली कंपनियों द्वारा भेजी गई भारी भरकम बिल से आम नागरिकों, उपभोक्ताओं में बहुत रोष है। लॉकडाउन की वजह से सभी की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। ऐसे समय में हम बिजली कंपनियों से लोगों को सहूलियत दिए जाने की अपेक्षा कर रहे थे। अब इतना बिल कहां से भरें, यह समस्या आम लोगों के सामने आ गई है। इस संदर्भ में मैंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से हस्तक्षेप कर लोगों को दिलासा देने की विनती की है। शीघ्र ही इसका कोई उचित समाधान निश्चित किया जाएगा, ऐसी हमें आशा है।
प्रताप सरनाईक (शिवसेना विधायक)

हाल ही में हमने अडानी इलेक्ट्रिसिटी कंपनी के अधिकारियों के साथ एक मीटिंग की थी, जिसमें हमने बढ़े हुए बिजली बिलों पर स्पष्टीकरण देने, नागरिकों के शिकायतों का संतोषजनक उत्तर देने, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक आये बिलों की राशि की जांच करने और जिनके बिल ज्यादा आए हैं, उनको किश्तों में बिल अदा करने की सुविधा देने की मांग की है।
ज्योत्स्ना हसनाले (एमबीएमसी महापौर)

भारी भरकम आए बिजली बिल के संदर्भ में बिजली कंपनियों द्वारा दी जानेवाली दलील बिल्कुल खोखली है। रिक्शा चालक, फेरीवाले, विभिन्न दुकानदार आदि के घरों से कौन सा वर्क प्रâॉम होम होता है। लॉकडाउन की वजह से सभी के धंधे, रोजगार आदि बंद हैं। ऐसे में बिजली कंपनियों द्वारा भेजा गया मनमाना बिल उपभोगताओं के लिए अन्यायपूर्ण है। इस पर शीघ्र संज्ञान लेने की आवश्यकता है
स्नेहा शैलेश पांडे ( शिवसेना नगरसेविका)

मेरा स्टील बफिंग का व्यवसाय है। लॉकडाउन में मेरे बंद कारखाने का बिल ३०,००० आया है और मेरे घर से किसी प्रकार का वर्क प्रâॉम होम नहीं किया जाता। वर्क प्रâॉम होम अधिकांश रूप से आई टी सेक्टर से जुड़े लोग ही कर रहे हैं। मेरे घर का बिल १,८०० से २,२०० के बीच आता था। इस बार मेरे घर का बिल ९,००० रुपए का आया है। बिजली कंपनियों ने अंधाधुंध बिल भेजकर लूट मचा रखी है।
अखिलेश उपाध्याय ( स्थानीय नागरिक)